उत्तर प्रदेश

दान विवाद में BJP-विपक्ष आमने-सामने

Kavita2
3 Aug 2026 4:07 PM IST
दान विवाद में BJP-विपक्ष आमने-सामने
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उत्तरप्रदेश : अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान की कथित चोरी के मामले को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि संसद भवन परिसर में किए गए विरोध प्रदर्शन के दौरान उसने हिंदू संतों और धार्मिक प्रतीकों का अपमान किया है। भाजपा ने इस मामले में विपक्ष के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की।

यह विवाद उस समय सामने आया जब सोमवार को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्षी सांसदों ने संसद भवन परिसर में प्रदर्शन किया। विपक्षी नेताओं ने राम मंदिर में दान की कथित चोरी के आरोपों और छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।

प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने केंद्र सरकार से जवाबदेही की मांग की। उनका कहना था कि धार्मिक संस्थानों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता होनी चाहिए और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।

इसके बाद भाजपा ने विपक्ष के प्रदर्शन के तरीके पर आपत्ति जताई। संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं ने विरोध प्रदर्शन के दौरान भगवा वस्त्र पहनकर भगवा रंग और हिंदू संतों का अपमान किया।

तरुण चुघ ने कहा कि विपक्ष ने राजनीतिक विरोध के लिए धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल किया और इससे हिंदू समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान भगवा रंग को लेकर जिस तरह की प्रस्तुति की गई, वह हिंदू परंपराओं और संतों का मजाक उड़ाने जैसा है।

भाजपा नेताओं ने मांग की कि इस तरह की गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। पार्टी का कहना है कि धार्मिक आस्थाओं और प्रतीकों का राजनीतिक इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

वहीं, विपक्ष की ओर से भाजपा के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया कि उनका प्रदर्शन भ्रष्टाचार और जवाबदेही के मुद्दे को लेकर था। विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे किसी धर्म या परंपरा का अपमान नहीं कर रहे थे, बल्कि कथित अनियमितताओं पर सवाल उठा रहे थे।

राम मंदिर से जुड़े दान और चढ़ावे का मुद्दा पहले भी राजनीतिक बहस का विषय रहा है। मंदिर निर्माण और उससे जुड़े कार्यों को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल समय-समय पर अपने विचार रखते रहे हैं। हालांकि, इस बार मामला संसद परिसर में प्रदर्शन और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया है।

भाजपा का कहना है कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इससे जुड़े मामलों में राजनीति नहीं होनी चाहिए। पार्टी नेताओं ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रहा है।

दूसरी ओर, विपक्ष का तर्क है कि किसी भी संस्था से जुड़े वित्तीय मामलों में पारदर्शिता जरूरी है। नेताओं का कहना है कि अगर किसी तरह की शिकायत सामने आती है तो उसकी जांच होना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।

इस पूरे विवाद ने संसद के मानसून सत्र के दौरान राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। दोनों पक्ष अपने-अपने मुद्दों को लेकर आक्रामक नजर आ रहे हैं। भाजपा जहां इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बता रही है, वहीं विपक्ष इसे जवाबदेही और जांच का मुद्दा बता रहा है।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, राम मंदिर से जुड़े मुद्दे का भावनात्मक और राजनीतिक महत्व दोनों है। इसलिए इससे जुड़े किसी भी विवाद पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेजी से सामने आती हैं।

फिलहाल राम मंदिर दान विवाद को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी है। भाजपा ने जहां विपक्ष के प्रदर्शन को लेकर कार्रवाई की मांग की है, वहीं विपक्ष अपने सवालों पर कायम है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।

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