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उत्तर प्रदेश
योगी सरकार का बड़ा फैसला, श्रमिकों को मिलेगी राहत
Rajeshwari Nishad
27 Oct 2026 10:36 PM IST

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने श्रमिकों के हित में महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए प्रदेश के 74 अनुसूचित नियोजनों में कार्यरत कामगारों के लिए परिवर्तनीय महंगाई भत्ते (VDA) की संशोधित दरें लागू कर दी हैं। नई व्यवस्था के तहत विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों की न्यूनतम मासिक मजदूरी में लगभग 174.25 रुपये से लेकर 238.39 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। संशोधित मजदूरी दरें 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी और 31 मार्च 2027 तक लागू रहेंगी। राज्य सरकार के श्रम विभाग ने 21 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में कार्यालय ज्ञापन जारी किया था। सरकार के इस फैसले से उद्योगों, दुकानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और अन्य अधिसूचित क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
74 अनुसूचित नियोजनों के श्रमिकों को मिलेगा लाभ
उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी व्यवस्था के तहत आने वाले 74 अनुसूचित नियोजनों के लिए संशोधित दरें घोषित की हैं।इनमें दुकानों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों और विभिन्न औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े पात्र श्रमिक शामिल हैं।सरकार का उद्देश्य महंगाई में होने वाले बदलाव के अनुसार श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी का समायोजन करना है।नई व्यवस्था में श्रमिकों को उनके कौशल स्तर और कार्यस्थल के जिले के आधार पर न्यूनतम मजदूरी दी जाएगी।श्रम विभाग ने अकुशल, अर्द्धकुशल और कुशल श्रमिकों के लिए अलग-अलग दरें तय की हैं।इन दरों से कम भुगतान करने वाले नियोक्ताओं को संबंधित श्रम कानूनों के तहत जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
1 अक्टूबर से 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेंगी दरें
राज्य सरकार के श्रम अनुभाग-2 ने 21 अक्टूबर 2026 को कार्यालय ज्ञापन संख्या I/1498869/2026-2041256 जारी किया।इसके अनुसार, संशोधित परिवर्तनीय महंगाई भत्ते की दरें 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगी।इनका प्रभाव 31 मार्च 2027 तक रहेगा।इसका अर्थ है कि पात्र श्रमिकों की अक्टूबर महीने की मजदूरी की गणना नई निर्धारित न्यूनतम दरों के अनुसार होनी चाहिए।नई दरें अप्रैल 2026 में निर्धारित मूल न्यूनतम मजदूरी और अक्टूबर से लागू संशोधित महंगाई भत्ते को जोड़कर तय की गई हैं।अधिकारियों को संबंधित क्षेत्रों में आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
नोएडा और गाजियाबाद के श्रमिकों को कितनी मिलेगी मजदूरी?
गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद को न्यूनतम मजदूरी की पहली श्रेणी में रखा गया है।इन जिलों में अकुशल श्रमिकों के लिए संशोधित न्यूनतम मासिक मजदूरी 13,883.59 रुपये निर्धारित की गई है।अर्द्धकुशल श्रमिकों को न्यूनतम 15,271.41 रुपये और कुशल श्रमिकों को 17,106.39 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे।इस प्रकार पहली श्रेणी के जिलों में कुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी 17 हजार रुपये से अधिक हो गई है।नोएडा और गाजियाबाद में बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां, कारखाने तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं।ऐसे में संशोधित मजदूरी दरें इन क्षेत्रों में काम करने वाले पात्र कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
नगर निगम वाले जिलों में भी बढ़ी न्यूनतम मजदूरी
उत्तर प्रदेश के नगर निगम श्रेणी में आने वाले जिलों के लिए अलग मजदूरी दरें निर्धारित की गई हैं।इन क्षेत्रों में अकुशल श्रमिकों को अब न्यूनतम 13,189.68 रुपये प्रतिमाह मजदूरी मिलेगी।अर्द्धकुशल श्रमिकों के लिए यह राशि 14,507.46 रुपये निर्धारित की गई है।वहीं, कुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम मासिक मजदूरी 16,250.86 रुपये तय की गई है।इन दरों से शहरी क्षेत्रों के विभिन्न अधिसूचित प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।हालांकि, कोई प्रतिष्ठान किस श्रेणी में आता है, इसका निर्धारण संबंधित सरकारी अधिसूचना के अनुसार होगा।
अन्य जिलों के लिए कितनी तय हुई मजदूरी?
गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद और नगर निगम श्रेणी से अलग अन्य जिलों के लिए तीसरी श्रेणी निर्धारित है।इन जिलों में अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मासिक मजदूरी 12,530.25 रुपये तय की गई है।अर्द्धकुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी 13,782.30 रुपये होगी।इसके अलावा कुशल श्रमिकों को न्यूनतम 15,438.42 रुपये प्रतिमाह दिए जाने का प्रावधान है।इस तरह राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में मजदूरी दरों में अंतर रखा गया है।इनका उद्देश्य भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार न्यूनतम पारिश्रमिक निर्धारित करना है।
जानिए तीनों श्रेणियों की नई न्यूनतम मजदूरी
मासिक मजदूरी, रुपये में — मूल वेतन और संशोधित VDA सहित
क्षेत्र अकुशल अर्द्धकुशल कुशल
गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद ₹13,883.59 ₹15,271.41 ₹17,106.39
नगर निगम श्रेणी के जिले ₹13,189.68 ₹14,507.46 ₹16,250.86
अन्य जिले ₹12,530.25 ₹13,782.30 ₹15,438.42
स्रोत: उत्तर प्रदेश श्रम विभाग के 21 अक्टूबर 2026 के आदेश पर आधारित प्रकाशित दरें।
क्या होता है परिवर्तनीय महंगाई भत्ता?
परिवर्तनीय महंगाई भत्ता यानी Variable Dearness Allowance न्यूनतम मजदूरी का वह हिस्सा है, जिसमें महंगाई के अनुसार समय-समय पर बदलाव किया जाता है।इसका उद्देश्य श्रमिकों की क्रय शक्ति पर महंगाई के प्रभाव को कुछ हद तक कम करना है।जब रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव होता है, तो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर महंगाई भत्ते की समीक्षा की जाती है।उत्तर प्रदेश में इस बार जनवरी से जून 2026 के अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के औसत 431 अंकों को आधार बनाया गया है।निर्धारित आधार सूचकांक 400 अंक है।इस अंतर के आधार पर मूल मजदूरी का 7.75 प्रतिशत परिवर्तनीय महंगाई भत्ता निर्धारित हुआ है।
न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी कैसे होगी लागू?
संशोधित दरें उन श्रमिकों के लिए निर्धारित न्यूनतम भुगतान हैं, जो संबंधित 74 अनुसूचित नियोजनों के अंतर्गत आते हैं।इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रदेश के सभी कर्मचारियों के वेतन में एक समान राशि बढ़ेगी।जिन कर्मचारियों को पहले से निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से अधिक वेतन मिल रहा है, उनका वेतन इस आदेश के कारण अपने आप कम नहीं किया जा सकता।नियोक्ताओं को लागू श्रेणी के अनुसार न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करनी होगी।यदि किसी कर्मचारी का वर्तमान वेतन संशोधित न्यूनतम मजदूरी से कम है, तो उसे नई दर के अनुसार भुगतान किया जाना आवश्यक होगा।दैनिक और प्रति घंटा मजदूरी के मामलों में भी संबंधित अधिसूचना के प्रावधान लागू होंगे।
महंगाई के बीच श्रमिक परिवारों को मिलेगी राहत
उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका मजदूरी और औद्योगिक रोजगार पर निर्भर करती है।ऐसे परिवारों के मासिक खर्च में भोजन, बच्चों की पढ़ाई, आवास, बिजली और परिवहन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।महंगाई बढ़ने पर इन खर्चों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।न्यूनतम मजदूरी में संशोधन से पात्र श्रमिकों को कुछ अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलेगी।हालांकि, लगभग 174 से 238 रुपये की मासिक बढ़ोतरी परिवार के कुल खर्च के मुकाबले सीमित है।इसलिए इसे महंगाई से पूरी राहत मिलने के बजाय न्यूनतम मजदूरी का नियमित समायोजन समझना अधिक उचित होगा।
उद्योगों और प्रतिष्ठानों को करना होगा पालन
नई मजदूरी दरें लागू होने के बाद संबंधित नियोक्ताओं को अपने वेतन रिकॉर्ड की समीक्षा करनी होगी।उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी पात्र श्रमिक को निर्धारित न्यूनतम दर से कम भुगतान नहीं किया जा रहा है।इस व्यवस्था का प्रभाव औद्योगिक इकाइयों, दुकानों और अन्य अधिसूचित प्रतिष्ठानों की वेतन गणना पर पड़ सकता है।श्रम विभाग के अधिकारियों के लिए भी संशोधित दरों का अनुपालन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा।श्रमिक अपने वेतन की जानकारी और शिकायत के संबंध में स्थानीय श्रम विभाग कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
श्रमिकों को क्या करना चाहिए?
कामगारों को सबसे पहले यह जानना चाहिए कि उनका रोजगार किस अनुसूचित नियोजन में शामिल है।इसके बाद अपने जिले की श्रेणी और कौशल वर्ग के अनुसार नई न्यूनतम मजदूरी की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।यदि किसी श्रमिक को निर्धारित राशि से कम वेतन मिल रहा है, तो वह अपनी वेतन पर्ची और आवश्यक दस्तावेजों के साथ संबंधित श्रम कार्यालय में जानकारी या सहायता मांग सकता है।वेतन संबंधी विवाद में नियुक्ति की शर्तें, कार्य दिवस और अन्य कानूनी प्रावधान भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
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