जम्मू और कश्मीर

CM उमर ने बुलाई कैबिनेट बैठक, कई अहम मुद्दों पर चर्चा

Rajeshwari Nishad
27 Oct 2026 10:28 PM IST
CM उमर ने बुलाई कैबिनेट बैठक, कई अहम मुद्दों पर चर्चा
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को मंत्रिमंडल विस्तार के बाद श्रीनगर स्थित नागरिक सचिवालय में कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में संतुलित और समान विकास सुनिश्चित करने से संबंधित कई प्रस्तावों पर चर्चा हुई। इससे पहले दिन में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के चार विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई थी। नए मंत्रियों के शामिल होने के कुछ ही घंटों बाद मुख्यमंत्री ने कैबिनेट बैठक बुलाई। इसमें प्रशासनिक प्राथमिकताओं, विकास कार्यों और नए मंत्रियों की जिम्मेदारियों से जुड़े मुद्दों पर विचार किया गया। हालांकि, बैठक में लिए गए अंतिम निर्णयों का विस्तृत आधिकारिक विवरण अभी सामने नहीं आया है।
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पहली कैबिनेट बैठक
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार दोपहर श्रीनगर के नागरिक सचिवालय में मंत्रिपरिषद की बैठक की अध्यक्षता की।मंत्रिमंडल विस्तार के बाद आयोजित इस पहली बैठक में सरकार की विकास संबंधी प्राथमिकताओं पर विशेष ध्यान दिया गया।बैठक में उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी, मंत्री सकीना इटू, जावेद अहमद डार और जावेद अहमद राणा शामिल हुए।इसके अलावा नए मंत्री अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कल्लू ने भी बैठक में हिस्सा लिया।इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मंत्रिमंडल में नए चेहरों के शामिल होने के बाद विभागीय जिम्मेदारियों और सरकार की आगामी कार्ययोजना को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
चार नए मंत्रियों ने ली पद और गोपनीयता की शपथ
मंगलवार सुबह श्रीनगर स्थित लोक भवन में आयोजित समारोह में चार नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई।उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कल्लू को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।इस अवसर पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।चारों नए मंत्री नेशनल कॉन्फ्रेंस से जुड़े हैं।यह अक्टूबर 2024 में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद पहला बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार है।इस विस्तार के साथ जम्मू-कश्मीर मंत्रिपरिषद में निर्धारित अधिकतम संख्या के अनुसार सभी पद भर गए हैं।
अली मोहम्मद सागर समेत अनुभवी नेताओं को मौका
नए मंत्रियों में अली मोहम्मद सागर नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं।वह श्रीनगर के खानयार विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और सात बार विधायक चुने जा चुके हैं।मीर सैफुल्लाह भी लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं। वह कुपवाड़ा जिले के त्रेहगाम विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।शमीमा फिरदौस श्रीनगर की हब्बाकदल विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करती हैं।वहीं, अल्ताफ अहमद कल्लू पहलगाम विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित विधायक हैं।इन नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल करने के पीछे प्रशासनिक अनुभव और सरकार के कामकाज को मजबूत करने की आवश्यकता महत्वपूर्ण मानी जा रही है।हालांकि, नियुक्तियों के राजनीतिक प्रभाव को लेकर अलग-अलग दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
संतुलित विकास के प्रस्तावों पर हुई चर्चा
मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक का प्रमुख विषय जम्मू-कश्मीर के विभिन्न क्षेत्रों में संतुलित और समान विकास सुनिश्चित करना रहा।बैठक में ऐसे प्रस्तावों पर विचार किया गया, जिनका उद्देश्य विकास कार्यों का लाभ अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाना है।जम्मू-कश्मीर में पहाड़ी, सीमावर्ती और दूरदराज के कई इलाके हैं, जहां बुनियादी सुविधाओं की आवश्यकता अलग-अलग है।ऐसे क्षेत्रों में सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण विषय हैं।हालांकि, बैठक में किस विशेष परियोजना को मंजूरी दी गई या कितनी धनराशि आवंटित की गई, इस संबंध में विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।इसलिए फिलहाल इन मुद्दों को बैठक में चर्चा के विषय के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि स्वीकृत योजनाओं के रूप में।
नए मंत्रियों को जल्द मिल सकते हैं विभाग
कैबिनेट विस्तार के बाद मंत्रियों के विभागों के बंटवारे को लेकर भी चर्चा जारी है।चार नए मंत्रियों के शामिल होने और एक मंत्री को हटाए जाने के कारण विभागीय जिम्मेदारियों में बदलाव आवश्यक हो गया है।मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को नए मंत्रियों के बीच विभागों का वितरण करना है।प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, विभागों के आवंटन की घोषणा मंगलवार शाम या बुधवार तक होने की संभावना जताई गई थी।हालांकि, बैठक के समय तक विभागों के अंतिम बंटवारे की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई थी।नए मंत्रियों को मिलने वाले विभागों से यह स्पष्ट होगा कि सरकार किन क्षेत्रों में किसे जिम्मेदारी सौंप रही है।
मंत्री सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से हटाया गया
मंत्रिमंडल विस्तार के साथ सरकार में एक महत्वपूर्ण बदलाव भी किया गया है।पहले से मंत्री रहे सतीश शर्मा को मंत्रिपरिषद से हटा दिया गया।वह मंगलवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में भी शामिल नहीं हुए।
चार नए मंत्रियों को जगह देने के लिए यह बदलाव किया गया, ताकि मंत्रिपरिषद की संख्या कानूनी सीमा के भीतर रहे।सतीश शर्मा जम्मू क्षेत्र के छंब विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।उनके हटाए जाने के बाद जम्मू क्षेत्र के प्रतिनिधित्व को लेकर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है।मंत्रिमंडल में बदलाव के बाद विभागों का पुनर्वितरण भी किया जाना है।जम्मू और कश्मीर के प्रतिनिधित्व पर उठे सवालमंत्रिमंडल विस्तार के बाद राजनीतिक दलों के बीच क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर बहस शुरू हो गई है।
चारों नए मंत्री कश्मीर घाटी से आते हैं।
विस्तार के बाद मुख्यमंत्री सहित नौ सदस्यीय मंत्रिपरिषद में सात सदस्य कश्मीर क्षेत्र से हैं, जबकि जम्मू क्षेत्र का प्रतिनिधित्व दो मंत्रियों के पास है।उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी और मंत्री जावेद अहमद राणा जम्मू क्षेत्र से हैं।विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने इस बदलाव पर सवाल उठाते हुए मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय असंतुलन का आरोप लगाया है।वहीं, सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के कुछ नेताओं में भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने को लेकर असंतोष सामने आया है।यह राजनीतिक विवाद मंत्रिमंडल विस्तार के साथ सरकार के सामने नई चुनौती बनकर उभरा है।
मुख्यमंत्री ने नए मंत्रियों से की मुलाकात
कैबिनेट बैठक के अलावा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नागरिक सचिवालय में नए मंत्रियों के कार्यालयों का दौरा किया।उन्होंने अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद कल्लू को नई जिम्मेदारियां संभालने पर बधाई दी।मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि नए मंत्री पूरी निष्ठा के साथ काम करेंगे और जम्मू-कश्मीर के विकास में योगदान देंगे।उन्होंने सामूहिक प्रयासों पर जोर देते हुए कहा कि सरकार के विकास संबंधी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए सभी मंत्रियों को मिलकर काम करना होगा।मुख्यमंत्री ने जनता की आवश्यकताओं को पूरा करने और शासन व्यवस्था को मजबूत बनाने की अपेक्षा भी जताई।नए मंत्रियों ने भी सरकार की प्राथमिकताओं के अनुसार मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
अक्टूबर 2024 में बनी थी उमर अब्दुल्ला सरकार
जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के बाद अक्टूबर 2024 में उमर अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।इसके बाद से वह केंद्र शासित प्रदेश की निर्वाचित सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं।सरकार गठन के समय मंत्रिमंडल में कुछ पद खाली रखे गए थे।जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश में मंत्रिपरिषद की संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।90 सदस्यीय विधानसभा के आधार पर मुख्यमंत्री सहित अधिकतम नौ मंत्री हो सकते हैं।मंगलवार को हुए विस्तार के बाद मंत्रिपरिषद इस निर्धारित सीमा तक पहुंच गई है।
राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा भी महत्वपूर्ण
जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग लंबे समय से राजनीतिक चर्चा का विषय बनी हुई है।मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस इस मुद्दे को लगातार उठाते रहे हैं।केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा होने के कारण प्रशासनिक अधिकारों और विभागीय जिम्मेदारियों की व्यवस्था पूर्ण राज्य से अलग है।मंत्रिमंडल विस्तार से पहले भी उमर अब्दुल्ला ने संकेत दिया था कि राज्य का दर्जा बहाल होने से सरकार की
प्रशासनिक
संरचना में बदलाव की गुंजाइश बढ़ सकती है।हालांकि, राज्य का दर्जा बहाल किए जाने को लेकर केंद्र सरकार की ओर से कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है।
जनता की उम्मीदों को पूरा करना बड़ी जिम्मेदारी
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद उमर अब्दुल्ला सरकार के सामने विकास योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने की चुनौती है।जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं का क्रियान्वयन महत्वपूर्ण होगा।सरकार को प्रशासनिक समन्वय, विभागीय जिम्मेदारियों और नागरिक सेवाओं पर ध्यान देना होगा।इसके अलावा क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर उठे राजनीतिक सवालों के बीच विकास संबंधी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाना भी जरूरी होगा।
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