उत्तर प्रदेश

भवं भवानी साहित्य परीषद की 163 वीं मासिक कवि गोष्ठी सम्पन्न

Gulabi Jagat
14 April 2025 7:53 PM IST
भवं भवानी साहित्य परीषद की 163 वीं मासिक कवि गोष्ठी सम्पन्न
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Rajapakad/कुशीनगर: तमकुहीराज क्षेत्र के गोसाईंपट्टी छिहुला ब्रह्म स्थान स्थित शिव मंदिर परिसर में भवं भवानी साहित्य परिषद की 163वीं मासिक कवि गोष्ठी सम्पन्न हुई। कवियों ने अपनी रचना पढ़कर वाहवाही बटोरी। कवि गोष्ठी की शुभारंभ कवि रामपति रसिया की वाणी वंदना शारदा के कर जोरि बिनती करबानी, करतानी माई के गोहार जी... से हुई। अध्यक्षीय कविता पाठ करते हुए रसिया ने कहवां धरम बा लुकाईल ए बिचारी भाई, कहंवा धरम बा लुकाईल.. व्यंग्य रचना सुनाकर सबको झकझोर दिया। विद्रोही तेवर के कवि नंदलाल विद्रोही ने गांव गांव गली गली में नफरत के बीज बोआईलबा, जे दिहल जान देश की खातिर नाम ओकर गद्दार धराईल बा। बापू! ई कईसन राष्ट्रवाद आईल बा सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी। बिहार से पधारे श्री कृष्ण सिंह चुलबुल ने पश्चिम से जब आधी चलल धा-धा गेंहू पर परल। काटल पसई उड़ाके ले गईल अकाशे, डाकू से तनिको कम नईखे बनल बदमासे..सुनाकर वाहवाही बटोरी। कवि भुआल कुशवाहा ने धरती के स्वच्छ बनाव मोरे भाई हो, तबे जीवन सुखी रहि पाई हो..सुनाकर अच्छा संदेश दिया।
कवि दीपराज दीपक ने ईंट अटारी सिर सजल,बुझी नींव का भीर, चीलम समझे आगि के,कईसन होला पीर.. दोहा पढ़कर तालियां बटोरी। कवि पारसनाथ पाण्डेय ने चहुंओर अट्टहास करे दु:शासन। वो किस किस से पार पायेंगे, बिनती करना छोड़ द्रौपदी,आज कृष्ण नहीं आयेंगे.. सुनाकर सोचने पर विवश किया ।गजलकार अंगद उदास ने हो तबीयत तेरी तो ये मौसम भी बदल जायेगा, देखते-देखते ये पत्थर भी पिघल जायेगा.. सुनाकर कवि गोष्ठी को उंचाई दी। आयोजक रमापति रसिया ने सभी कवियों व श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर ग्रापए के मंडलीय मंत्री अजय कुमार सिंह, अंजनी सिंह, मुनेश्वर यादव, तपन ठाकुर, हरिमोहन प्रसाद आदि उपस्थित रहे।
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