उत्तर प्रदेश

घर के बाद अब कमाई के अवसर, यूपी के ग्रामीण परिवारों के लिए नई पहल

nidhi
28 Oct 2026 6:35 AM IST
घर के बाद अब कमाई के अवसर, यूपी के ग्रामीण परिवारों के लिए नई पहल
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लाभार्थियों को पक्के मकान के साथ दूसरी जरूरी सुविधाओं से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि आवास मिलने के बाद परिवारों को पेयजल, बिजली, रसोई गैस और आजीविका के अवसर भी उपलब्ध हों। दैनिक जागरण की 28 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, आवास लाभार्थियों तक अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने और मकानों के निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी मजबूत करने की जरूरत बताई गई है। इस पहल में परिवारों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने पर ध्यान है।
पक्का मकान ग्रामीण परिवार को मौसम की मार और असुरक्षित आवास की परेशानियों से राहत दे सकता है। हालांकि, परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए कमाई के साधन भी जरूरी हैं। इसी वजह से आवास के साथ रोजगार और आवश्यक सेवाओं को जोड़ने का विषय महत्वपूर्ण हो गया है। उपलब्ध रिपोर्ट में लाभार्थियों को रोजगार के साधनों से जोड़ने पर जोर है। इसमें प्रत्येक परिवार को सरकारी नौकरी देने, निश्चित वेतन उपलब्ध कराने या नई नकद सहायता के लिए आवेदन शुरू होने की जानकारी नहीं दी गई है।
ग्रामीण आवास से जुड़े इन्हीं व्यापक मुद्दों के बीच लखनऊ में 27 और 28 अक्टूबर को प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित की गई है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, इसमें मेजबान उत्तर प्रदेश सहित नौ राज्यों के करीब 150 अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री कमलेश पासवान और प्रदेश की ग्रामीण विकास राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम शामिल हुए। इस अवसर पर कुछ लाभार्थियों को गृह प्रवेश के तहत प्रतीकात्मक रूप से आवास की चाबियां भी सौंपी गईं।
कार्यशाला में अधूरे मकानों को जल्द पूरा कराने, निर्माण में आने वाली बाधाओं और अगले चरण के सुधारों पर चर्चा हुई। प्रस्तावित सुधारों में समूह आधारित आवास, ग्रामीण राजमिस्त्रियों के प्रशिक्षण को मजबूत करना, उत्कृष्टता केंद्र और ग्रामीण आवास के लिए ऋण व्यवस्था शामिल हैं। ये विषय अभी विचार-विमर्श का हिस्सा हैं। इन्हें सभी लाभार्थियों के लिए तत्काल लागू हो चुकी नई सुविधाओं के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अधिकारियों ने किस्तों के समय पर भुगतान, निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण पात्र परिवारों के छूटने जैसी समस्याओं पर भी चर्चा की।
उत्तर प्रदेश में ग्रामीण आवास का दायरा बढ़ाने के लिए पहले भी बड़ी स्वीकृति दी जा चुकी है। केंद्र सरकार की 25 जून 2026 की विज्ञप्ति के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के नए चरण में प्रदेश के लिए 6,18,482 मकानों की मंजूरी दी गई थी। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इसका अनुमोदन पत्र सौंपा था। उस समय ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे मकानों में रहने वाले पात्र परिवारों को चरणबद्ध तरीके से पक्का घर उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। यह संख्या स्वीकृत मकानों की है, सभी मकानों का निर्माण पूरा होने की नहीं।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का मूल उद्देश्य भी बुनियादी सुविधाओं सहित सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। केंद्र सरकार के विवरण के मुताबिक, योजना में दूसरे कार्यक्रमों के साथ समन्वय के जरिए स्वच्छता, पेयजल, स्वच्छ ईंधन और बिजली तक पहुंच बढ़ाने पर ध्यान दिया जाता है। इसलिए मकान बनने के बाद यह देखना जरूरी है कि परिवार वास्तव में इन सेवाओं का इस्तेमाल कर पा रहा है या नहीं। केवल कनेक्शन दर्ज होना और सुविधा का नियमित रूप से उपलब्ध होना, दोनों अलग स्थितियां हो सकती हैं।
निर्माण की निगरानी के लिए योजना में डिजिटल रिकॉर्ड और स्थानीय स्तर की जांच की व्यवस्था भी है। सरकारी जानकारी के अनुसार, मकान बनने के विभिन्न चरणों की जियोटैग तस्वीरें दर्ज की जाती हैं और आर्थिक सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है। ब्लॉक और जिला स्तर के निरीक्षण तथा सामाजिक लेखा परीक्षा भी निगरानी व्यवस्था का हिस्सा हैं। इन प्रक्रियाओं का उद्देश्य निर्माण की वास्तविक प्रगति जानना, गुणवत्ता देखना और सहायता के इस्तेमाल में पारदर्शिता बनाए रखना है।
रोजगार तलाश रहे लोगों के लिए उत्तर प्रदेश सेवायोजन विभाग का रोजगार संगम पोर्टल अलग से उपलब्ध है। यहां अभ्यर्थी पंजीकरण करके सरकारी, निजी और आउटसोर्सिंग की रिक्तियों के साथ रोजगार मेलों की जानकारी देख सकते हैं। पोर्टल पर स्थान, शैक्षिक योग्यता और वेतन के आधार पर अवसर खोजने की सुविधा है। हालांकि, यह सामान्य रोजगार मंच है; उपलब्ध सूचना में इसे सभी आवास लाभार्थियों के लिए घोषित किसी विशेष भर्ती अभियान का हिस्सा नहीं बताया गया है। आवास और आजीविका को साथ लेकर चलने का व्यावहारिक महत्व यह है कि परिवार घर मिलने के बाद उसके रखरखाव और दैनिक जरूरतों का खर्च उठा सके। पानी और बिजली की उपलब्धता घरेलू कामों को आसान बना सकती है, जबकि उपयुक्त रोजगार आर्थिक स्थिरता में मदद कर सकता है। इस प्रयास का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि पात्र परिवारों की जरूरतें कितनी सही पहचानी जाती हैं और संबंधित सुविधाएं उन तक कितनी नियमितता से पहुंचती हैं।
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