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चंद्रमौलीश्वर स्वरूप में सपरिवार सारनाथ पहुंचे बाबा विश्वनाथ

वाराणसी। सावन के अंतिम सोमवार के बाद मंगलवार को बाबा विश्वनाथ अपने चंद्रमौलीश्वर स्वरूप में सपरिवार सारनाथ स्थित अपनी ससुराल पहुंचे। बाबा की इस विशेष यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। पालकी में भगवान शिव की गोद में प्रथमेश और उनके साथ माता पार्वती विराजमान थीं। जैसे ही पालकी यात्रा आगे बढ़ी, पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से गूंज उठा।
सावन के अंतिम सोमवार के बाद होने वाली इस धार्मिक परंपरा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भक्तों ने रास्ते में बाबा के दर्शन किए और पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया। यात्रा के दौरान भक्ति और आस्था का ऐसा माहौल रहा कि सारनाथ का पूरा क्षेत्र शिवमय नजर आया।
51 डमरुओं के निनाद के बीच शुरू हुई पालकी यात्रा
बाबा विश्वनाथ की पालकी यात्रा सारनाथ के गंज इलाके स्थित संकटमोचन मंदिर से शुरू हुई। यात्रा के शुभारंभ के समय 51 डमरुओं का निनाद किया गया। डमरुओं की गूंज और शिवभक्तों के जयघोष के बीच बाबा की पालकी आगे बढ़ी।
पालकी यात्रा को देखने और बाबा का आशीर्वाद लेने के लिए रास्ते में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। भक्तों ने बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती के दर्शन किए। धार्मिक आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा वातावरण बना रहा।
यात्रा के दौरान श्रद्धालु लगातार भगवान शिव के जयकारे लगाते रहे। जगह-जगह लोगों ने पालकी का स्वागत किया। कई श्रद्धालु यात्रा के साथ चलते हुए मंदिर तक पहुंचे।
विभिन्न मार्गों से होकर पहुंची पालकी
संकटमोचन मंदिर से शुरू हुई पालकी यात्रा म्यूजियम मार्ग, श्रेयांशनाथ जन्मस्थली और मूलगंध कुटी विहार होते हुए सारंगनाथ मंदिर पहुंची। यात्रा के पूरे मार्ग को धार्मिक उत्साह के अनुरूप सजाया गया था।
श्रद्धालुओं के लिए बाबा की यह यात्रा विशेष महत्व रखती है। मान्यता के अनुसार सावन के अंतिम सोमवार के बाद बाबा विश्वनाथ चंद्रमौलीश्वर स्वरूप में सपरिवार अपनी ससुराल सारनाथ पहुंचते हैं। इसी परंपरा के तहत मंगलवार को बाबा की पालकी यात्रा निकाली गई।
सारंगनाथ मंदिर में हुआ विशेष पूजन
पालकी यात्रा के सारंगनाथ मंदिर पहुंचने के बाद धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। प्रदोष काल में बाबा को झूले पर विराजमान कराया गया। इसके बाद 501 पार्थिव शिवलिंगों का महाभिषेक किया गया।
महाभिषेक के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से मंदिर परिसर का वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
501 पार्थिव शिवलिंगों के महाभिषेक को आयोजन का प्रमुख आकर्षण माना गया। श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होकर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया।
प्रथमेश और माता पार्वती के साथ बाबा के दर्शन
इस यात्रा में बाबा विश्वनाथ के साथ माता पार्वती और प्रथमेश के विराजमान होने से आयोजन की भव्यता और बढ़ गई। पालकी में महादेव की गोद में प्रथमेश और उनके साथ माता पार्वती के स्वरूप को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
भक्तों ने परिवार सहित भगवान शिव के दर्शन किए और मंगलकामना की। कई श्रद्धालुओं ने यात्रा के दौरान पालकी के सामने माथा टेककर आशीर्वाद लिया।
सावन के बाद भी शिवभक्ति का उत्साह
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। पूरे सावन काशी और आसपास के क्षेत्रों में शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। सावन के अंतिम सोमवार के बाद भी बाबा विश्वनाथ की यह विशेष यात्रा शिवभक्तों के उत्साह को बनाए रखती है।
सारनाथ में आयोजित इस कार्यक्रम में धार्मिक परंपरा और लोक आस्था का सुंदर संगम देखने को मिला। एक ओर डमरुओं की गूंज थी तो दूसरी ओर हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण शिवमय बना हुआ था।
श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह
बाबा की पालकी यात्रा को लेकर सुबह से ही श्रद्धालुओं में उत्साह था। यात्रा के निर्धारित मार्ग पर लोगों की मौजूदगी रही। पालकी के पहुंचते ही भक्तों ने जयकारे लगाकर बाबा का स्वागत किया।
श्रद्धालुओं के लिए यह केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि काशी की प्राचीन परंपराओं और आस्था से जुड़ने का अवसर भी रहा। बाबा विश्वनाथ के ससुराल पहुंचने की परंपरा को लेकर स्थानीय लोगों में विशेष उत्साह दिखाई दिया।
सावन के अंतिम सोमवार के बाद चंद्रमौलीश्वर स्वरूप में बाबा विश्वनाथ के सपरिवार सारनाथ पहुंचने और 501 पार्थिव शिवलिंगों के महाभिषेक के साथ धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। 51 डमरुओं की गूंज, पालकी यात्रा और हर-हर महादेव के जयघोष ने पूरे सारनाथ को भक्तिमय बना दिया।





