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बड़ी कांटी गोशाला में बदहाली पर मंडलायुक्त सख्त, सीवीओ व एडीओ पंचायत के निलंबन की संस्तुति

प्रयागराज। गोशालाओं में गोवंश की देखभाल और व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन भले ही लगातार दावे करता हो, लेकिन जसरा ब्लाक की बड़ी कांटी गोशाला के निरीक्षण में जमीनी हकीकत ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए। सोमवार को मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. ने गोशाला का निरीक्षण किया तो वहां भारी अव्यवस्था मिली। कई गाय घायल अवस्था में पड़ी थीं। परिसर में गंदगी का आलम था और दुर्गंध के कारण वहां सांस लेना तक मुश्किल हो रहा था। गोवंश के बैठने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी और कई गायें इधर-उधर खड़ी मिलीं।
निरीक्षण के दौरान गोशाला की व्यवस्थाओं को देखकर मंडलायुक्त ने नाराजगी जताई और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) डॉ. शिवचरन यादव और जसरा के एडीओ पंचायत विनोद द्विवेदी के निलंबन की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट शासन को भेजने के निर्देश दिए।
घायल अवस्था में मिलीं कई गायें
मंडलायुक्त के निरीक्षण में गोशाला की स्थिति बेहद खराब मिली। कई गायें घायल अवस्था में पड़ी थीं। उनके उपचार और देखभाल की व्यवस्था संतोषजनक नहीं मिली। गोशाला में मौजूद गोवंश को पर्याप्त स्थान भी नहीं मिल पा रहा था। कई पशु खड़े दिखाई दिए, जबकि उनके बैठने के लिए आवश्यक व्यवस्था होनी चाहिए थी।
गोवंश की देखभाल के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हुए। निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि नियमित निगरानी और व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने में लापरवाही बरती गई।
गंदगी और दुर्गंध से बिगड़े हालात
गोशाला परिसर में साफ-सफाई की स्थिति भी बेहद खराब मिली। जगह-जगह गंदगी होने के कारण दुर्गंध फैली हुई थी। स्थिति ऐसी थी कि वहां मौजूद लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही थी। गोशालाओं में स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि गंदगी से पशुओं में संक्रमण और बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
मंडलायुक्त ने निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई की बदहाल स्थिति पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों को व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
सीडीओ को कारण बताओ नोटिस
गोशाला में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के पूर्व दिए गए निर्देशों का अनुपालन नहीं होने पर मंडलायुक्त ने मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। प्रशासनिक स्तर पर यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि गोशालाओं की व्यवस्थाओं की निगरानी और उन्हें दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होती है।
मंडलायुक्त ने स्पष्ट किया कि शासन और प्रशासन की ओर से गोवंश संरक्षण के लिए उपलब्ध कराए जा रहे संसाधनों का सही इस्तेमाल होना चाहिए। यदि गोशालाओं में पशुओं को बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं तो इसके लिए जिम्मेदारी तय की जाएगी।
ग्राम विकास अधिकारी निलंबित
मंडलायुक्त के निर्देश के बाद जिला विकास अधिकारी जीपी कुशवाहा ने बड़ी कांटी गोशाला से संबंधित ग्राम विकास अधिकारी जितेंद्र गौड़ को निलंबित कर दिया। इससे गोशाला की व्यवस्था में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों में कार्रवाई को लेकर संदेश गया है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गोशाला में गोवंश की स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं की अनदेखी को स्वीकार नहीं किया जाएगा। निरीक्षण में सामने आई कमियों के आधार पर जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की जा रही है।
विभागीय कार्रवाई की भी संस्तुति
मंडलायुक्त ने सीवीओ, एडीओ पंचायत और संबंधित पशु चिकित्सक को प्रतिकूल प्रविष्टि देने के साथ विभागीय कार्यवाही की संस्तुति भी की है। इसका मतलब है कि संबंधित अधिकारियों की सेवा पुस्तिका में उनके कार्य प्रदर्शन और लापरवाही से जुड़ी प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज की जाएगी और उनके खिलाफ विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सकती है।
गोशाला में पशु चिकित्सकीय देखभाल की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण होती है। घायल गोवंश का समय पर उपचार और बीमार पशुओं की निगरानी नहीं होने से उनकी स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में पशु चिकित्सक की भूमिका पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
जिम्मेदारी तय करने का संदेश
बड़ी कांटी गोशाला की बदहाली सामने आने के बाद मंडलायुक्त की कार्रवाई को प्रशासन की ओर से कड़ा संदेश माना जा रहा है। गोशालाओं में गोवंश के संरक्षण और देखभाल के लिए सरकार की ओर से विभिन्न व्यवस्थाएं की जाती हैं। ऐसे में अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी है कि उपलब्ध संसाधनों का उपयोग सही तरीके से हो और पशुओं को भोजन, पानी, उपचार, साफ-सफाई तथा पर्याप्त स्थान जैसी मूलभूत सुविधाएं मिलें।
मंडलायुक्त के निरीक्षण ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल कागजी रिपोर्ट के आधार पर गोशालाओं की व्यवस्थाओं को सही नहीं माना जाएगा। अधिकारी मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति देख सकते हैं और कमी मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जा सकती है।
आगे भी हो सकती है निगरानी
बड़ी कांटी गोशाला में कार्रवाई के बाद अब अन्य गोशालाओं की व्यवस्थाओं को लेकर भी निगरानी बढ़ने की संभावना है। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहेगा कि कहीं और भी गोवंश को इसी तरह की समस्याओं का सामना न करना पड़े।
बड़ी कांटी गोशाला में घायल गायों, गंदगी, दुर्गंध और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने जैसी कमियां मिलने के बाद मंडलायुक्त ने जिस तरह जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई कराई है, उससे साफ है कि गोशालाओं की व्यवस्थाओं में लापरवाही अब अधिकारियों के लिए भारी पड़ सकती है।





