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आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ताजमहल परिसर के भीतर तिरंगा फहराने की कोशिश का मामला सामने आया है। अखिल भारत हिंदू महासभा से जुड़े कुछ नेता राष्ट्रीय ध्वज लेकर ताजमहल पहुंचे थे, लेकिन केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी सीआईएसएफ के जवानों ने उन्हें समय रहते रोक लिया। सुरक्षाकर्मियों ने नेताओं को हिरासत में लेकर उनकी कोशिश नाकाम कर दी। घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है।
जानकारी के अनुसार हिंदूवादी नेता 15 अगस्त को पर्यटकों के साथ ताजमहल परिसर में दाखिल हुए थे। उनकी योजना स्मारक के भीतर तिरंगा फहराने की थी। हालांकि परिसर में तैनात सीआईएसएफ के जवानों की सतर्कता के कारण वे अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो सके। संदिग्ध गतिविधि नजर आते ही सुरक्षाकर्मियों ने संबंधित लोगों को पकड़ लिया और अपने साथ ले गए। इस दौरान कुछ समय के लिए परिसर में हलचल की स्थिति बनी रही।
हिंदू महासभा ने कार्रवाई के बाद भी अपने रुख में बदलाव नहीं किया है। संगठन के नेताओं ने घोषणा की है कि वे भविष्य में भी ताजमहल पर तिरंगा फहराने की कोशिश जारी रखेंगे। उनका कहना है कि राष्ट्रीय पर्व पर ऐतिहासिक स्मारक में तिरंगा फहराया जाना चाहिए। दूसरी ओर ताजमहल संरक्षित स्मारक है, जहां सुरक्षा और प्रवेश से संबंधित नियमों का पालन करना सभी पर्यटकों के लिए अनिवार्य है। प्रतिबंधित वस्तु ले जाने अथवा बिना अनुमति किसी प्रकार की गतिविधि करने पर सुरक्षाकर्मी कार्रवाई करते हैं।
ताजमहल परिसर में किसी गतिविधि को लेकर हिंदू महासभा और प्रशासन के आमने-सामने आने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले तीन अगस्त को संगठन से जुड़ी महिलाओं ने श्रावण मास के पहले सोमवार पर परिसर में प्रवेश करके जलाभिषेक करने की कोशिश की थी। हिंदू महासभा के कार्यकर्ता ताजमहल को शिव मंदिर बताते हुए इसे तेजोमहालय होने का दावा करते रहे हैं।
पुलिस को सूचना मिली थी कि संगठन से जुड़ी 11 महिलाएं ताजमहल में जलाभिषेक करने के लिए पहुंच सकती हैं। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई थी। पुलिस ने महिलाओं को पहले ही रोक लिया और उन्हें राजेश्वर मंदिर ले जाकर जलाभिषेक करवाया था। इस दौरान किसी को भी ताजमहल परिसर में नियमों का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं दी गई।
हिंदू महासभा की जिला अध्यक्ष मीरा राठौर का दावा है कि ताजमहल वास्तव में एक शिव मंदिर है। उनका कहना है कि यदि स्मारक में कव्वाली हो सकती है तो पूजा-अर्चना की अनुमति भी मिलनी चाहिए। संगठन ने श्रावण मास के आने वाले सोमवारों पर कांवड़ लेकर ताजमहल में पूजा करने का प्रयास जारी रखने की बात भी कही थी। संगठन के कार्यकर्ता पिछले कई वर्षों से सावन के दौरान ताजमहल में पूजा और जलाभिषेक करने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां उन्हें हर बार रोकती रही हैं।
इस बीच ताजमहल में जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और धार्मिक त्योहारों पर पूजा-अर्चना की अनुमति मांगने से संबंधित मामला अदालत में विचाराधीन है। अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन सात रजत शुक्ला की अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए दो सितंबर की तारीख निर्धारित की है।
यह वाद अजय तोमर ने 23 जुलाई 2024 को वरिष्ठ अधिवक्ता शिव आधार सिंह तोमर के माध्यम से दायर किया था। याचिका में ताजमहल को तेजोमहालय मानते हुए सावन सहित अन्य धार्मिक त्योहारों पर जलाभिषेक और पूजा करने की अनुमति देने की मांग की गई है। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां वायरल वीडियो और पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही हैं।
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