उत्तर प्रदेश

अर्नब चक्रवात का कहर, कनहर बांध का फाटक फिर खोला गया

Rajeshwari Nishad
30 Oct 2026 7:56 PM IST
अर्नब चक्रवात का कहर, कनहर बांध का फाटक फिर खोला गया
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सोनभद्र। छत्तीसगढ़ और झारखंड में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में भी दिखाई देने लगा है। दोनों राज्यों के ऊपरी और पहाड़ी इलाकों से बड़ी मात्रा में पानी पहुंचने के कारण अमवार स्थित कनहर सिंचाई परियोजना के बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को बांध का जलस्तर 265.1 मीटर दर्ज किया गया। पानी की लगातार आवक को देखते हुए सिंचाई विभाग ने एहतियातन बांध का गेट नंबर दो खोलकर पानी की निकासी शुरू कर दी है। शुरुआत में फाटक को 350 मिलीमीटर खोला गया था, लेकिन पानी का दबाव बढ़ने के बाद इसे 500 मिलीमीटर तक खोल दिया गया। बांध से पानी छोड़े जाने के कारण कनहर नदी में जलस्तर बढ़ रहा है। प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों के लोगों को सतर्क रहने और नदी तथा डूब क्षेत्र से दूर रहने की सलाह दी है। सिंचाई विभाग की तकनीकी टीम बांध की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रही है।
265.1 मीटर पहुंचा कनहर बांध का जलस्तर
अमवार स्थित कनहर सिंचाई परियोजना के बांध में शुक्रवार को पानी का स्तर 265.1 मीटर दर्ज किया गया।परियोजना अधिकारियों के अनुसार, छत्तीसगढ़ और झारखंड के कैचमेंट एरिया में लगातार हो रही बारिश के कारण बांध में पानी की आवक बनी हुई है।ऊपरी क्षेत्रों में होने वाली बारिश का पानी नदी और छोटी जलधाराओं के माध्यम से बांध तक पहुंच रहा है।इससे जलाशय के स्तर में बढ़ोतरी हुई है।अधिकारियों का कहना है कि पानी की आवक और जलाशय की स्थिति को ध्यान में रखते हुए निकासी का निर्णय लिया गया है।बांध की सुरक्षा और जलस्तर को नियंत्रित बनाए रखना विभाग की प्राथमिकता है।
गेट नंबर दो को 500 मिलीमीटर तक खोला
जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए परियोजना प्रबंधन ने बांध का गेट नंबर दो खोलने का फैसला किया।शुरुआत में फाटक को 350 मिलीमीटर यानी 35 सेंटीमीटर तक खोला गया।लेकिन ऊपरी इलाकों से पानी की आवक जारी रहने के कारण बाद में इसकी ऊंचाई बढ़ाकर 500 मिलीमीटर यानी 50 सेंटीमीटर कर दी गई।इससे बांध में जमा अतिरिक्त पानी को नियंत्रित तरीके से कनहर नदी में छोड़ा जा रहा है।अधिकारियों के अनुसार, जलाशय में पानी की आवक के आधार पर फाटक खोलने की स्थिति में आगे भी बदलाव किया जा सकता है।हालांकि, बांध से प्रति सेकंड कितने क्यूसेक पानी की निकासी हो रही है, इसका ताजा आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।फाटक खुलने की ऊंचाई को ही छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा नहीं माना जा सकता।
कनहर नदी में बढ़ा पानी का बहाव
बांध का फाटक खोले जाने के बाद कनहर नदी के निचले हिस्सों में पानी का बहाव बढ़ने लगा है।ऐसे में नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए विशेष सतर्कता जरूरी हो गई है।सिंचाई विभाग के अनुसार, बांध से पानी छोड़ने का उद्देश्य जलाशय का स्तर नियंत्रित रखना और बढ़ते जल दबाव का सुरक्षित प्रबंधन करना है।नदी में पानी की मात्रा बढ़ने से निचले क्षेत्रों में जलस्तर प्रभावित हो सकता है।हालांकि, फिलहाल किसी विशेष गांव में बाढ़ आने या बड़े पैमाने पर नुकसान होने की पुष्टि नहीं हुई है।प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों को आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है।
इन गांवों के लोगों को सतर्क रहने की हिदायत
बांध से पानी छोड़े जाने के मद्देनजर प्रशासन और पुलिस ने नदी किनारे स्थित गांवों में निगरानी बढ़ा दी है।अमवार, सुंदरी, टेंढा, कोरगी और महुली समेत आसपास के इलाकों के लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है।ग्रामीणों को नदी के किनारे जाने, पानी के तेज बहाव में उतरने और डूब क्षेत्र में प्रवेश करने से बचने की सलाह दी गई है।इसके अलावा नदी के आसपास मवेशियों को ले जाने से भी बचना चाहिए।प्रशासन का उद्देश्य किसी भी संभावित आपात स्थिति से पहले लोगों को सुरक्षित रखना है।खासकर बच्चों और बुजुर्गों को नदी के तेज बहाव से दूर रखने की आवश्यकता है।
चक्रवाती मौसम का दिखाई दे रहा असर
अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में चक्रवाती तूफान अर्नब और उससे जुड़े मौसमी प्रभावों के कारण छत्तीसगढ़ तथा आसपास के क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं।कई इलाकों में लगातार बारिश होने के कारण नदियों और जलाशयों में पानी की आवक बढ़ने की स्थिति बनी हुई है।कनहर नदी का जलग्रहण क्षेत्र छत्तीसगढ़ और झारखंड के हिस्सों तक फैला हुआ है।इसलिए इन क्षेत्रों में होने वाली बारिश का असर सोनभद्र में स्थित कनहर बांध पर भी पड़ता है।कई बार बांध के आसपास बारिश कम होने के बावजूद ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में भारी वर्षा के कारण जलस्तर बढ़ सकता है।यही वजह है कि बांध प्रबंधन केवल स्थानीय मौसम नहीं, बल्कि पूरे कैचमेंट एरिया में होने वाली बारिश और पानी की आवक पर नजर रखता है।
अगस्त में भी खोले गए थे छह फाटक
कनहर सिंचाई परियोजना में बढ़ते जलस्तर के कारण इससे पहले भी फाटक खोलने की नौबत आ चुकी है।24 अगस्त 2026 को लगातार बारिश के कारण बांध का जलस्तर 262.350 मीटर तक पहुंच गया था।उस समय सिंचाई विभाग ने बांध के छह फाटक खोलकर पानी की निकासी शुरू की थी।गेट नंबर 2, 4, 5, 6, 11 और 13 से पानी छोड़ा गया था।उस दौरान भी कनहर नदी के तटीय इलाकों में सतर्कता बढ़ाई गई थी।ग्रामीणों को डूब क्षेत्र और नदी के तेज बहाव वाले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी गई थी।अब अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में दोबारा जलस्तर बढ़ने से सिंचाई विभाग को एक बार फिर नियंत्रित जल निकासी करनी पड़ रही है।
सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण है कनहर परियोजना
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में स्थित कनहर सिंचाई परियोजना क्षेत्र की प्रमुख जल संसाधन परियोजनाओं में शामिल है।इस परियोजना का उद्देश्य कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।परियोजना से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, इसके माध्यम से लगभग 26 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है।इसमें मुख्य नहरों और छोटी वितरण नहरों के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था प्रस्तावित है।कनहर नदी सोन नदी की सहायक नदी है और इसका जलग्रहण क्षेत्र कई राज्यों में फैला हुआ है।इसी कारण विभिन्न राज्यों में होने वाली बारिश का असर इस परियोजना के जलाशय पर पड़ता है।
लगातार निगरानी कर रही सिंचाई विभाग की टीम
कनहर बांध में पानी की आवक को देखते हुए सिंचाई विभाग की तकनीकी टीम सतर्क है।अधिकारियों के अनुसार, बांध का जलस्तर और फाटकों से पानी की निकासी लगातार देखी जा रही है।यदि ऊपरी इलाकों में बारिश जारी रहती है और पानी की आवक बढ़ती है, तो जल प्रबंधन की स्थिति की दोबारा समीक्षा की जा सकती है।इस दौरान आवश्यकतानुसार फाटक के खुलने की ऊंचाई में बदलाव संभव है।हालांकि, फिलहाल अन्य फाटक खोलने का कोई निश्चित निर्णय सामने नहीं आया है।
ग्रामीणों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील
बांध से पानी छोड़े जाने की खबर के बाद आसपास के क्षेत्रों में लोगों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।ऐसी स्थिति में प्रशासनिक सूचनाओं पर भरोसा करना और अफवाहों से बचना जरूरी है।नदी के पास रहने वाले लोगों को जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहना चाहिए।नदी पार करने, मछली पकड़ने या तेज बहाव के बीच वाहन उतारने जैसी गतिविधियों से बचना आवश्यक है।
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