तेलंगाना

23 साल पुराने जमीन विवाद में सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, BRS पर बरसे CM रेवंत रेड्डी

Ratna Netam
30 Oct 2026 7:45 PM IST
23 साल पुराने जमीन विवाद में सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, BRS पर बरसे CM रेवंत रेड्डी
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हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद के मियापुर में स्थित करीब 550 एकड़ विवादित जमीन पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस फैसले को राज्य सरकार के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने लगभग 23 वर्षों से जारी कानूनी विवाद में तेलंगाना सरकार के स्वामित्व को बरकरार रखा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, विवादित जमीन की कीमत करीब 50 हजार करोड़ रुपये है। इस दौरान उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (KCR) और उनकी पार्टी भारत राष्ट्र समिति (BRS) पर सरकारी जमीनों पर कथित कब्जे की कोशिशों को लेकर गंभीर आरोप लगाए।सुप्रीम कोर्ट ने 29 अक्टूबर 2026 को मियापुर की जमीन से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने निजी पक्षों की ओर से दाखिल अपीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि मियापुर गांव के सर्वे नंबर 100 और 101 में स्थित करीब 550 एकड़ 39 गुंटा जमीन सरकारी संपत्ति है। इस फैसले से निजी पक्षों के स्वामित्व संबंधी दावों को झटका लगा है।अदालत ने पूर्ववर्ती आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट और भूमि कब्जा मामलों की विशेष अदालत के निष्कर्षों को सही ठहराया। न्यायालय के अनुसार, अपीलकर्ताओं ने जमीन पर वैध मालिकाना अधिकार साबित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए। अदालत ने राजस्व रिकॉर्ड में अनियमित प्रविष्टियों के आधार पर सरकारी भूमि पर दावा करने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।
KCR और BRS पर रेवंत रेड्डी के गंभीर आरोप
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विपक्षी बीआरएस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव, उनके परिवार के सदस्यों और कुछ सहयोगियों ने हैदराबाद तथा तेलंगाना के अन्य हिस्सों में सरकारी जमीनों पर कब्जा करने की कोशिश की थी।रेवंत रेड्डी ने विशेष रूप से केसीआर के करीबी बताए जाने वाले दामोदर राव और गोल्डस्टोन प्रसाद का नाम लेते हुए मियापुर की जमीन से संबंधित कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि जमीन से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड में छेड़छाड़ करने के प्रयास किए गए थे।मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि जमीन के सौदे से जुड़े मामलों में महंगी गाड़ियों और नकद राशि के जरिए रिश्वत देने की कोशिशें हुई थीं। हालांकि, ये मुख्यमंत्री के आरोप हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमीन के सरकारी स्वामित्व की पुष्टि को इन व्यक्तियों के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों की न्यायिक पुष्टि नहीं माना जा सकता।
23 साल पुराना जमीन विवाद समाप्त
मियापुर जमीन विवाद करीब 23 वर्षों से विभिन्न अदालतों में लंबित था। यह जमीन हैदराबाद के तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में स्थित है। आसपास आवासीय परियोजनाएं, व्यावसायिक परिसर और परिवहन सुविधाएं विकसित होने के कारण इसकी आर्थिक अहमियत काफी बढ़ गई है।मामले में निजी व्यक्तियों और कुछ सहकारी आवास समितियों ने भूमि पर मालिकाना हक जताया था। हालांकि, निचली अदालतों और हाईकोर्ट ने सरकारी पक्ष के दावों को स्वीकार किया था।सुप्रीम कोर्ट में इस निर्णय को चुनौती दी गई थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने निजी पक्षों की अपीलें खारिज कर दीं। इसके बाद विवादित जमीन पर राज्य सरकार के स्वामित्व की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो गई है।जमीन के मूल्य को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में 25 हजार करोड़ से 55 हजार करोड़ रुपये तक के अनुमान सामने आए हैं। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने इसकी कीमत लगभग 50 हजार करोड़ रुपये बताई है।
जमीन बेचकर विकास कार्यों में लगाएगी सरकार पैसा
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बताया कि राज्य सरकार मियापुर की कीमती जमीन के उपयोग को लेकर योजना तैयार कर रही है। सरकार इस भूमि की नीलामी करके प्राप्त धनराशि का इस्तेमाल सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विकास परियोजनाओं में करने पर विचार कर रही है।उन्होंने कहा कि संसाधन जुटाने के लिए गठित मंत्रिमंडलीय उपसमिति इस प्रस्ताव का अध्ययन करेगी। समिति की सिफारिशों को मंत्रिमंडल के सामने रखा जाएगा और उसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अभी जमीन की बिक्री को लेकर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। सरकार सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद आगे की कार्रवाई करेगी।
जमीन की सुरक्षा के लिए अधिकारियों को निर्देश
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को विवादित जमीन का कब्जा सुनिश्चित करने और उसकी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।उन्होंने कहा कि जमीन की घेराबंदी की जाए, ताकि भविष्य में अतिक्रमण की संभावना को रोका जा सके। अधिकारियों को वहां मौजूद निर्माणों की पहचान करने और राजस्व रिकॉर्ड की जांच करने के लिए भी कहा गया है।मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार नहीं चाहती कि इतनी मूल्यवान सार्वजनिक संपत्ति लंबे समय तक असुरक्षित पड़ी रहे। उन्होंने भूमि के संरक्षण को प्राथमिकता देने की बात कही।
डेढ़ लाख करोड़ की जमीन बचाने का दावा
रेवंत रेड्डी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता संभालने के बाद से लगभग 1.50 लाख करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीनों को कथित अवैध कब्जे से सुरक्षित किया है।उन्होंने गाचीबोवली, मामीदिपल्ली, मंचिरेवुला और गुर्रमगुडा सहित कई क्षेत्रों का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में इन क्षेत्रों की सरकारी भूमि पर कब्जा करने के प्रयास हुए थे।उन्होंने बताया कि मंचिरेवुला में करीब 143 एकड़ जमीन बचाई गई है। इसके अलावा जयशंकर भूपालपल्ली जिले की करीब 400 एकड़ वनभूमि को लेकर भी कानूनी लड़ाई लड़ी गई।ये आंकड़े और आरोप मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत किए गए हैं। इन मामलों की अलग-अलग कानूनी परिस्थितियां रही हैं।
विधानसभा में बहस की चुनौती
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बीआरएस नेताओं को विधानसभा में सरकारी जमीनों और कथित अतिक्रमण के मुद्दे पर खुली चर्चा करने की चुनौती दी।उन्होंने कहा कि विपक्ष को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं ने सरकारी संपत्तियों से जुड़े मामलों में जनता के हितों की अनदेखी की।उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने विपक्ष में रहते हुए जमीन से जुड़े विवादों को उठाया था और अब सरकार में आने के बाद सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।फिलहाल इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए सभी आरोपों पर बीआरएस की विस्तृत प्रतिक्रिया की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला तेलंगाना सरकार के लिए कानूनी रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे सरकार के लिए मियापुर की विवादित जमीन को सुरक्षित रखने और भविष्य में उसके उपयोग पर निर्णय लेने का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, प्रस्तावित नीलामी और उससे मिलने वाली धनराशि के इस्तेमाल पर अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद ही होगा।
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