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उत्तर प्रदेश
सस्टेनेबल डवलपमेंट के लिए टेक्नोलॉजी और एथिक्स की इन्क्यूसिव एप्रोच जरूरीः Dr. Saurabh
Gulabi Jagat
25 April 2025 10:37 PM IST

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Moradabad: तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के प्रबंधन संस्थान टिमिट की ओर से सस्टेनेबल डवलपमेंट गोल्सः चैलेंजेस, इश्यूज़ एंड प्रैक्टिसेस पर दो दिनी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का शंखनाद | गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय इंटेलिजेंस ग्रिड के सलाहकार डॉ. सौरभ गुप्ता बोले, सतत विकास लक्ष्य केवल सरकारी नीतियों का हिस्सा नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी हैं। हमें यह समझना होगा कि जब तक समाज का हर व्यक्ति इन लक्ष्यों को आत्मसात नहीं करता, तब तक इनका वास्तविक क्रियान्वयन संभव नहीं है। हर नागरिक को अपनी भूमिका निभानी होगी, चाहे वह ऊर्जा की बचत हो, जल संरक्षण हो या सामाजिक समानता की दिशा में प्रयास करना हो। इसके साथ ही हमें तकनीकी प्रगति के साथ नैतिक मूल्यों का संतुलन बनाए रखना होगा, क्योंकि केवल तकनीकी विकास बिना नैतिक दिशा के समाज को विकृत कर सकता है। इसलिए टेक्नोलॉजी और एथिक्स का समावेशी दृष्टिकोण ही हमें सतत भविष्य की ओर ले जा सकता है। डॉ. गुप्ता तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के प्रबंधन संस्थान टिमिट की ओर से सस्टेनेबल डवलपमेंट गोल्सः चैलेंजेस, इश्यूज़ एंड प्रैक्टिसेस पर आयोजित दो दिनी इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के शुभारम्भ मौके पर बतौर मुख्य अतिथि ब्लेंडेड मोड में बोल रहे थे। इससे पूर्व ऑनलाइन मुख्य अतिथि डॉ. सौरभ गुप्ता के संग-संग बतौर विशिष्ट अतिथि- गुरू जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. सचिन माहेश्वरी, प्रीमियर ग्रीन इन्नोवेशंस के डायरेक्टर प्रो. आरके खंडेल, मनहारी ग्रुप के चेयरमैन डॉ. हरेन्द्र कुमार गर्ग, टीएमयू के वीसी प्रो. वीके जैन, टिमिट के डीन प्रो. विपिन जैन आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके टीएमयू के ऑडी में इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का शंखनाद किया।
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कॉन्फ्रेंस का मकसद संयुक्त राष्ट्र के निर्धारित 17 सतत विकास लक्ष्यों पर वैश्विक संवाद को प्रोत्साहित करना है। कॉन्फ्रेंस में गरीबी उन्मूलन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वच्छ जल एवं स्वच्छता, हरित ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, सतत शहरीकरण और वैश्विक साझेदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा हुई। सभी मेहमानों का बुके देकर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। अंत में स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कॉन्फ्रेंस में अतिथियों ने कॉन्फ्रेंस प्रोसीडिंग का विमोचन किया। गुरू जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. सचिन माहेश्वरी बोले, विश्वविद्यालयों की भूमिका अब केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि सतत विकास में भागीदारी भी अनिवार्य है। छात्रों को नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व की दिशा में प्रेरित करना समय की मांग है। प्रीमियर ग्रीन इन्नोवेशंस के डायरेक्टर प्रो. आरके खंडेल ने कहा, उद्योग जगत को अब ग्रीन इन्नोवेशन अपनाना ही होगा, तभी हम भविष्य सुरक्षित कर पाएंगे। हमारा हर उत्पाद, हर निर्णय पर्यावरण और समाज के अनुकूल होना चाहिए। मनहारी ग्रुप के चेयरमैन डॉ. हरेन्द्र कुमार गर्ग बोले, नवाचार, स्टार्ट-अप्स और उद्यमशीलता आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ है। गुणवत्तापूर्ण विकास तभी संभव है, जब हम स्थानीय संसाधनों का सम्मान करें। हमें समावेशी दृष्टिकोण अपनाकर भविष्य की ओर बढ़ना होगा। गुरुकुल कांगड़ी यूनिवर्सिटी, हरिद्वार प्रो. पंकज मदान ने कहा, शिक्षा प्रणाली में एसडीजी को एक विषय नहीं, बल्कि संस्कार बनाना होगा। हमारे छात्र वैश्विक नागरिक बनें, यह हमारी शिक्षा की प्राथमिकता होनी चाहिए। एचडीएफसी बैंक लिमिटेड के वीपी निशांत कृष्ण गुप्ता बोले, वित्तीय समावेशन सतत विकास का आधार है। बैंकिंग क्षेत्र को समाज की जमीनी ज़रूरतों से जुड़कर काम करना होगा। इंटरनेशनल ट्रैक्टर्स लिमिटेड के ज्वाइंट जीएम डॉ. विक्रांत सिंह ने कहा, कृषि में नवाचार और सतत तकनीकें ही किसानों का भविष्य बदल सकती हैं। उद्योगों को ग्रामीण भारत से जुड़ना चाहिए ताकि समावेशी विकास संभव हो सके।
टीएमयू के कुलपति प्रो. वीके जैन बोले, सतत विकास लक्ष्यों को क्रियान्वयन के स्तर तक ले जाना हम सभी की जिम्मेदारी है। टीएमयू शिक्षा के साथ सामाजिक चेतना भी प्रदान करता है। डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन ने कहा, स्टुडेंट्स को रिसर्च और इनोवेशन के माध्यम से समाज की चुनौतियों से जोड़ना होगा। एकेडेमिक्स और सस्टेनेबिलिटी का मेल ही नई शिक्षा नीति की आत्मा है। टिमिट के डीन प्रो. विपिन जैन ने कहा, इस सम्मेलन का उद्देश्य युवाओं को ग्लोबल मुद्दों की समझ देना है। हम छात्रों को समाधान-आधारित सोच की ओर बढ़ा रहे हैं। इंटरनेशल कॉन्फ्रेंस में डीन स्टुडेंट वेलफेयर प्रो. एमपी सिंह, प्रो. अमित कंसल, डॉ. ज्योति पुरी, डॉ. अशेन्द्र कुमार सक्सेना आदि शामिल रहे। अंत में चले पैनल डिस्कशन में जगन्नाथ यूनिवर्सिटी, जयपुर की प्रो. वैशाली शर्मा, हरिद्वार सूर्या रोशनी लिमिटेड के डॉ. प्रतोष मिश्रा, माया देवी यूनिवर्सिटी, एचडीएफसी बैंक लिमिटेड के हरीश चौहान, उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी के प्रो. अनुराग भट्ट, सतधन सस्टेनेबिलिटी फाउंडेशन के निदेशक डॉ. ऋत्विक दुबे आदि शामिल रहे। कॉन्फ्रेंस हाल के बाहर मैनेजमेंट के स्टुडेंट्स ने स्टाल्स लगाकर अपनी उद्यमशीलता प्रस्तुत की। इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में 468 शोध पत्र भी प्रस्तुत हुए। संचालन डॉ. दीप्ति राज वर्मा, आनन्द जोशी और अंशु चौहान ने किया। फिजी, ओमान, उज्बेकिस्तान, यूके, यूएई, स्विट्ज़रलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका आदि के बतौर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधि ब्लेंडेड मोड में दूसरे दिन शिरकत करेंगे।
ख़ास बातें
प्रो. सचिन बोले, सतत विकास में विवि की भागीदारी भी अनिवार्य
उद्योग जगत को अब अपनाना ही होगा ग्रीन इनोवेशनः प्रो. खंडेल
नवाचार और स्टार्ट-अप्स आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ः डॉ. हरेन्द्र कुमार
एसडीजी को विषय नहीं, बल्कि संस्कार बनाएंः प्रो. पंकज मदान
निशांत कृष्ण बोले, वित्तीय समावेशन सतत विकास का आधार
कृषि में नवाचार से बदलेगा किसानों का भविष्यः डॉ. विक्रांत सिंह
प्रो. वीके जैन बोले, एसडीजी का क्रियान्वयन हम सभी की जिम्मेदारी
एकेडेमिक्स और सस्टेनेबिलिटी का मेल एनईपी की आत्माः प्रो. मंजुला
कॉन्फ्रेंस में आधा दर्जन से अधिक विषयों पर हुआ पैनल डिसक्शन
468 शोधपत्र प्रस्तुत, विदेश प्रतिनिधि कल ब्लेंडेड मोड में देंगे व्याख्यान
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