उत्तर प्रदेश

अमेठी के सलमान खान ने एशियाई खेलों में जीता कांस्य, रोइंग में भारत का बढ़ाया मान

Kavita2
24 Sept 2026 12:47 PM IST
अमेठी के सलमान खान ने एशियाई खेलों में जीता कांस्य, रोइंग में भारत का बढ़ाया मान
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अमेठी। उत्तर प्रदेश के अमेठी के रहने वाले सलमान खान ने जापान में चल रहे एशियाई खेल 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए कांस्य पदक जीता है। भारतीय सेना से जुड़े सलमान खान ने पंजाब के सतनाम सिंह के साथ पुरुष डबल स्कल्स रोइंग स्पर्धा में तीसरा स्थान हासिल किया। दोनों भारतीय खिलाड़ियों की इस उपलब्धि से देश के साथ उत्तर प्रदेश और अमेठी में खुशी का माहौल है।

सलमान खान और सतनाम सिंह की भारतीय जोड़ी गुरुवार को आइची-नगोया में आयोजित पुरुष डबल स्कल्स स्पर्धा के फाइनल में उतरी। भारतीय खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही पदक की दौड़ में बने रहने के लिए पूरा जोर लगाया। दोनों ने तालमेल के साथ अपनी नाव को आगे बढ़ाया और 6 मिनट 13.25 सेकेंड का समय निकालते हुए तीसरे स्थान पर फिनिश किया। इसके साथ ही भारत के खाते में कांस्य पदक आया।

पुरुष डबल स्कल्स स्पर्धा में चीन के यी शुदी और नी यिदे की जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। चीनी जोड़ी ने 6 मिनट 09.77 सेकेंड में रेस पूरी की। वहीं उज्बेकिस्तान के पावेल सोरिन और मेखरोजबेक मामातकुलोव की जोड़ी ने 6 मिनट 10.49 सेकेंड के समय के साथ दूसरा स्थान हासिल करते हुए रजत पदक जीता।

भारत की सलमान-सतनाम जोड़ी स्वर्ण पदक जीतने वाली चीनी टीम से करीब साढ़े तीन सेकेंड पीछे रही। कड़े मुकाबले के बावजूद दोनों भारतीय खिलाड़ियों ने अंतिम समय तक अपना स्थान बनाए रखा और कांस्य पदक सुनिश्चित किया। एशियाई स्तर की इस बड़ी प्रतियोगिता में पदक हासिल करना दोनों खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

सलमान खान का अमेठी से खास जुड़ाव होने के कारण उनकी जीत की खबर सामने आते ही स्थानीय खेल प्रेमियों में उत्साह देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए पदक जीतने वाले सलमान की सफलता को क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है।

सलमान के खेल करियर में भारतीय सेना की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। सेना में भर्ती होने के बाद उन्हें अपनी खेल प्रतिभा को आगे बढ़ाने और रोइंग में बेहतर प्रशिक्षण हासिल करने का अवसर मिला। सेना के खेल ढांचे ने देश को रोइंग सहित कई खेलों में अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी दिए हैं। सलमान ने भी उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाते हुए अपनी प्रतिभा को निखारा और अब एशियाई खेलों के मंच पर पदक हासिल किया है।

रोइंग बेहद कठिन और तकनीकी खेल माना जाता है। डबल स्कल्स में दो खिलाड़ी एक नाव में होते हैं और प्रत्येक खिलाड़ी दो-दो चप्पुओं का इस्तेमाल करता है। इसमें ताकत के साथ दोनों खिलाड़ियों के बीच बेहतरीन तालमेल और गति बनाए रखना बेहद जरूरी होता है। जरा सा तालमेल बिगड़ने पर नाव की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। सलमान और सतनाम ने फाइनल में अपने तालमेल का प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक तक का सफर पूरा किया।

फाइनल मुकाबले में चीन और उज्बेकिस्तान की टीमों से भारतीय जोड़ी को कड़ी चुनौती मिली। शुरुआत से ही तीनों टीमें पदक के लिए संघर्ष करती नजर आईं। चीन की जोड़ी ने अपनी बढ़त कायम रखते हुए सबसे पहले फिनिश लाइन पार की। उज्बेकिस्तान दूसरे स्थान पर रहा, जबकि सलमान और सतनाम ने तीसरे स्थान पर रहते हुए भारत के लिए पदक सुनिश्चित किया।

अमेठी जैसे क्षेत्र से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक हासिल करना सलमान की लंबी मेहनत और प्रशिक्षण का परिणाम माना जा रहा है। उनकी उपलब्धि यह भी दिखाती है कि सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से आने वाले खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए सफलता हासिल कर सकते हैं।

भारतीय सेना में भर्ती होना सलमान के खेल सफर में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। सेना में खिलाड़ियों को अनुशासन, नियमित अभ्यास और बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं मिलती हैं। रोइंग में फिटनेस, शारीरिक ताकत और मानसिक मजबूती बेहद अहम होती है। लगातार प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के अनुभव ने सलमान को बड़े मंच पर बेहतर प्रदर्शन करने में मदद की।

सतनाम सिंह के साथ उनकी जोड़ी ने भी शानदार तालमेल दिखाया। डबल स्कल्स जैसी प्रतियोगिता में व्यक्तिगत प्रदर्शन के साथ साथी खिलाड़ी की गति और तकनीक के अनुरूप चलना जरूरी होता है। दोनों खिलाड़ियों ने फाइनल में इसी तालमेल के दम पर मजबूत प्रतिद्वंद्वियों के बीच तीसरा स्थान हासिल किया।

कांस्य पदक की यह उपलब्धि सलमान के व्यक्तिगत करियर के साथ भारतीय रोइंग के लिए भी महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों के बेहतर प्रदर्शन से देश में इस खेल को लेकर रुचि बढ़ने की उम्मीद है। क्रिकेट और कुछ अन्य लोकप्रिय खेलों की तुलना में रोइंग को देश में सीमित पहचान मिली है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिलने वाले पदक इस खेल को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

सलमान की सफलता से अमेठी के युवा खिलाड़ियों को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। खेलों में करियर बनाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए उनका सफर प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है। स्थानीय स्तर से शुरुआत कर सेना तक पहुंचना और फिर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत के लिए पदक जीतना उनकी मेहनत को दर्शाता है।

एशियाई खेलों में कांस्य जीतने के बाद अब सलमान और सतनाम से आने वाली प्रतियोगिताओं में भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी। बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर हासिल अनुभव दोनों खिलाड़ियों के भविष्य के अभियान में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

फिलहाल अमेठी के सलमान खान ने पंजाब के सतनाम सिंह के साथ मिलकर पुरुष डबल स्कल्स में कांस्य पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। 6 मिनट 13.25 सेकेंड में फाइनल पूरा करने वाली भारतीय जोड़ी ने एशियाई मंच पर तिरंगे की मौजूदगी दर्ज कराई और अमेठी को भी अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर नई पहचान दिलाई।

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