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लखनऊ में अमेरिकी नागरिकों से ढाई अरब की ठगी, 119 गिरफ्तार, मास्टरमाइंड फरार

लखनऊ: कॉल सेंटर के जरिए विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर करोड़ों की ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का खुलासा हुआ है। यह नेटवर्क लंबे समय से समिट बिल्डिंग से संचालित हो रहा था, जहां से अमेरिकी नागरिकों को फोन कर खुद को तकनीकी सहायता या सरकारी एजेंसी का कर्मचारी बताकर धोखाधड़ी की जाती थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरे गिरोह ने करीब ढाई अरब रुपये की ठगी को अंजाम दिया है।
पुलिस के अनुसार यह पूरा खेल एक संगठित तरीके से चलाया जा रहा था। कॉल सेंटर में काम करने वाले लोग पहले विदेशी नागरिकों का भरोसा जीतते थे। इसके बाद उनसे अलग-अलग बहाने बनाकर पैसे ट्रांसफर करवाए जाते थे। कभी टैक्स बकाया बताया जाता था, तो कभी अकाउंट सुरक्षित करने के नाम पर रकम मंगाई जाती थी। कई मामलों में पीड़ितों को डराकर तुरंत भुगतान करने के लिए मजबूर किया जाता था।
इस पूरे नेटवर्क का संचालन मुख्य आरोपी विनीत के इशारे पर हो रहा था, जो फिलहाल फरार है। पुलिस का कहना है कि वह या तो देश छोड़ने की कोशिश में है या किसी अज्ञात स्थान पर छिपा हुआ है। उसकी गिरफ्तारी के लिए कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं और उसके संपर्कों की जांच की जा रही है। अब तक की कार्रवाई में पुलिस ने इस गिरोह से जुड़े 119 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें कॉल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारी, तकनीकी सहायता देने वाले लोग और पैसे ट्रांसफर कराने में मदद करने वाले एजेंट शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि इस नेटवर्क में कई और लोग भी जुड़े हो सकते हैं, जिनकी तलाश जारी है।
जांच में यह भी सामने आया है कि समिट बिल्डिंग में चल रहे इस कॉल सेंटर से विदेशों में बैठे लोगों को लगातार फोन किए जाते थे। ये कॉल सामान्य तकनीकी सहायता या सरकारी कामकाज के नाम पर किए जाते थे, ताकि सामने वाले को शक न हो। धीरे-धीरे उन्हें जाल में फंसाकर बड़ी रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाई जाती थी। पुलिस ने बताया कि गिरोह कई स्तरों पर काम करता था। एक टीम कॉल करती थी, दूसरी बैंकिंग और ट्रांजैक्शन संभालती थी, जबकि तीसरी टीम फर्जी दस्तावेज और तकनीकी सपोर्ट का काम देखती थी। इस तरह यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से चल रहा था।
फिलहाल पुलिस ने कई बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शनों की जांच शुरू कर दी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि ठगी की रकम किन-किन माध्यमों से आगे भेजी गई। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं, क्योंकि शुरुआती जांच में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले नेटवर्क के संकेत मिले हैं। पुलिस का दावा है कि यह मामला सिर्फ एक कॉल सेंटर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा साइबर ठगी नेटवर्क काम कर रहा था। अब जांच का पूरा फोकस मास्टरमाइंड विनीत की गिरफ्तारी और पूरे गिरोह की जड़ तक पहुंचने पर है।





