उत्तर प्रदेश

अतीक अहमद के काले धन से जमीन खरीदने और फर्जी बैनामे का आरोप

Kavita2
2 Oct 2026 11:17 AM IST
अतीक अहमद के काले धन से जमीन खरीदने और फर्जी बैनामे का आरोप
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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद से जुड़े कथित काले धन, जमीन खरीद और फर्जी बैनामे का मामला सामने आया है। धूमनगंज और पूरामुफ्ती क्षेत्र में जमीनों की खरीद-फरोख्त, खरीदे गए हिस्से से अधिक भूमि का कथित तौर पर बैनामा कराने और सरकारी जमीनों पर कब्जा करने के आरोप में पूरामुफ्ती थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले में 10 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि कुछ अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।

रसूलपुर मरियाडीह निवासी शाह फैसल ने इस संबंध में पुलिस उपायुक्त नगर से शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि अतीक अहमद के कथित काले धन का इस्तेमाल कर अलग-अलग इलाकों में जमीनें खरीदी गईं और बाद में दस्तावेजों में हेरफेर कर वास्तविक खरीद से ज्यादा जमीन अपने नाम कराने की कोशिश की गई। इसके अलावा सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस उपायुक्त नगर ने मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद पूरामुफ्ती थाने में मोहम्मद जैद खालिद, जसीम अहमद, जाफर अहमद, मोहम्मद राशिद उर्फ नीलू, मुमताज अहमद, राहिल सिद्दीकी, महमूद अख्तर, अबु जैद, धीरेंद्र प्रताप सिंह और मोहम्मद दानिश के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। कुछ अन्य अज्ञात व्यक्तियों को भी एफआईआर में शामिल किया गया है।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ लागू धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर अब जमीनों के दस्तावेज, रजिस्ट्री, बैनामे, राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित खातों की जांच की जा सकती है। यह भी पता लगाया जाएगा कि संबंधित जमीनें किसके नाम पर खरीदी गईं, भुगतान किस माध्यम से किया गया और रजिस्ट्री के दौरान किन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ।

मामले का एक प्रमुख आरोप यह है कि जितनी जमीन वास्तव में खरीदी गई थी, उससे अधिक क्षेत्रफल का फर्जी बैनामा कराया गया। अगर जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो संबंधित दस्तावेजों, गवाहों और रजिस्ट्री प्रक्रिया की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। पुलिस और राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के मिलान से वास्तविक स्वामित्व और कब्जे की स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

शिकायतकर्ता ने सरकारी जमीनों पर कब्जे का भी आरोप लगाया है। ऐसे मामलों में राजस्व अभिलेख, नक्शा, खतौनी और भूमि की वर्तमान स्थिति की जांच महत्वपूर्ण होती है। पुलिस जांच के साथ राजस्व विभाग से भी जमीनों का रिकॉर्ड मांगा जा सकता है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जिन भूखंडों पर कब्जे की बात कही गई है, वे निजी स्वामित्व में थे या सरकारी खाते में दर्ज थे।

अतीक अहमद से जुड़े जमीन मामलों को लेकर प्रयागराज में पहले भी कई शिकायतें और कार्रवाई सामने आती रही हैं। ऐसे में नए मुकदमे के बाद पुलिस अब इस बात की भी जांच करेगी कि आरोपियों का अतीक अहमद या उसके नेटवर्क से किस तरह का संबंध था और कथित काले धन के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों के समर्थन में क्या वित्तीय या दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध हैं।

पुलिस के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू धन के स्रोत का पता लगाना होगा। शिकायत में अतीक अहमद के काले धन का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया गया है। इस आरोप की पुष्टि के लिए बैंक लेन-देन, संपत्ति खरीद के भुगतान, नकद लेन-देन और संबंधित व्यक्तियों की आर्थिक गतिविधियों की जांच की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर अन्य एजेंसियों से भी जानकारी मांगी जा सकती है।

जमीन खरीद के मामलों में पावर ऑफ अटॉर्नी, बिक्री विलेख, स्टांप शुल्क, गवाहों के बयान और रजिस्ट्रार कार्यालय के रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कहीं दस्तावेजों में जानबूझकर गलत जानकारी दर्ज कराकर जमीन का स्वामित्व बदलने या अतिरिक्त हिस्से पर दावा करने की कोशिश तो नहीं की गई।

शाह फैसल की शिकायत के बाद दर्ज हुए इस मुकदमे में कई व्यक्तियों के नाम सामने आने से मामला व्यापक हो गया है। जांच एजेंसियां अब प्रत्येक नामजद आरोपी की भूमिका अलग-अलग निर्धारित करेंगी। यह भी देखा जाएगा कि कथित जमीन सौदों में किस व्यक्ति ने खरीदारी की, किसने दस्तावेज तैयार कराए और किसने कब्जे या रजिस्ट्री की प्रक्रिया में सहयोग किया।

फिलहाल मुकदमा दर्ज होने के बाद जांच प्रारंभिक चरण में है। आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी। नामजद आरोपियों का पक्ष भी जांच प्रक्रिया के दौरान दर्ज किया जा सकता है। पुलिस दस्तावेजों और शिकायत में दिए गए तथ्यों की पड़ताल कर आगे की कार्रवाई करेगी।

प्रयागराज में अतीक अहमद से जुड़े संपत्ति मामलों पर लंबे समय से प्रशासन और पुलिस की नजर रही है। नए मामले में अब धूमनगंज और पूरामुफ्ती क्षेत्र की संबंधित जमीनों का पूरा रिकॉर्ड खंगाला जाएगा। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि कथित काले धन से जमीन खरीद, फर्जी बैनामा और सरकारी भूमि पर कब्जे के आरोपों में कितनी सच्चाई है और किन लोगों की क्या भूमिका रही।

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