- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- राम मंदिर के सभी...
राम मंदिर के सभी कर्मचारियों का होगा 100% वेरिफिकेशन, पुलिस जांच और चरित्र प्रमाणपत्र अनिवार्य

अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में कार्यरत सभी कर्मचारियों का शत-प्रतिशत सत्यापन कराने का फैसला किया है। नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन कराया जाएगा और पुलिस द्वारा जारी चरित्र प्रमाणपत्र भी अनिवार्य होगा। इसके अलावा कर्मचारियों को अपने परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों से जुड़ी विस्तृत जानकारी भी ट्रस्ट को उपलब्ध करानी होगी। ट्रस्ट का यह फैसला मंदिर की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है।
ट्रस्ट ने मंदिर में काम करने वाले कर्मचारियों से उनकी व्यक्तिगत जानकारी के साथ-साथ परिवार और करीबी रिश्तेदारों का विवरण भी मांगा है। कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन पूरा होने के बाद उनके चरित्र संबंधी प्रमाणपत्र भी रिकॉर्ड में रखे जाएंगे। इसके जरिए मंदिर प्रशासन प्रत्येक कर्मचारी की पृष्ठभूमि की जांच कर सकेगा और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी किसी भी संभावित कमी को दूर करने की कोशिश करेगा।
राम मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर परिसर की सुरक्षा पहले से ही कई स्तरों पर की जाती है। ऐसे में अब कर्मचारियों के सत्यापन को भी सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट ने तय किया है कि मंदिर परिसर में काम करने वाले प्रत्येक कर्मचारी का रिकॉर्ड पूरी तरह अपडेट किया जाएगा और सत्यापन की प्रक्रिया में किसी को भी बाहर नहीं रखा जाएगा।
यह निर्णय मंदिर प्रशासन की ओर से सुरक्षा और कामकाज की समीक्षा के बीच लिया गया है। जून 2026 में मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद सुरक्षा और प्रशासनिक स्तर पर कई कदम उठाए गए हैं। इस मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हुई थी और हाल में करीब 70 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। इसी घटनाक्रम के बाद मंदिर प्रशासन ने कर्मचारियों की निगरानी और सत्यापन व्यवस्था को और मजबूत करने की प्रक्रिया तेज की है।
ट्रस्ट की नई व्यवस्था के तहत केवल आधारभूत पहचान दस्तावेज लेना पर्याप्त नहीं होगा। कर्मचारियों का स्थानीय पुलिस के स्तर पर सत्यापन कराया जाएगा। इसके साथ ही पुलिस द्वारा जारी किया गया चरित्र प्रमाणपत्र भी देना होगा। परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों से जुड़ी जानकारी मांगने का उद्देश्य कर्मचारियों की पृष्ठभूमि से जुड़ा विस्तृत रिकॉर्ड तैयार करना बताया जा रहा है।
मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब प्रशासनिक ढांचे में भी बदलाव किए गए हैं। मंदिर के नवनियुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी और सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की निगरानी में सत्यापन अभियान आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने पिछले महीने जिम्मेदारी संभाली थी। प्रशासन की ओर से कर्मचारियों की निगरानी बढ़ाने के साथ श्रद्धालुओं को मिलने वाली सुविधाओं में सुधार पर भी जोर दिया जा रहा है।
ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि मंदिर से संबंधित फैसलों को सभी कर्मचारियों और जिम्मेदार लोगों को मानना होगा। ट्रस्ट सदस्य दिनेंद्र दास ने कहा कि ट्रस्ट जो भी निर्णय लेगा, उसे मंदिर से जुड़े सभी लोग स्वीकार करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर में पूजा-अर्चना की व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है, श्रद्धालु नियमित रूप से दर्शन और आरती के लिए पहुंच रहे हैं तथा दान संबंधी व्यवस्था भी संचालित हो रही है।
राम मंदिर प्रशासन के लिए कर्मचारियों का पूरा सत्यापन महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मंदिर परिसर में सुरक्षा, श्रद्धालुओं की व्यवस्था, दान प्रबंधन, पूजा-अर्चना, रखरखाव और अन्य कई प्रकार के कार्यों में बड़ी संख्या में कर्मचारी जुड़े हुए हैं। ऐसी स्थिति में ट्रस्ट कर्मचारियों की पहचान और उनके रिकॉर्ड को व्यवस्थित रूप से सुरक्षित रखना चाहता है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद जिन कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन पहले से पूरा नहीं है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना होगा। वहीं चरित्र प्रमाणपत्र सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज भी जमा कराने होंगे। कर्मचारियों से मांगी गई जानकारी की जांच संबंधित अधिकारियों के माध्यम से की जाएगी।
ट्रस्ट ने मंदिर कर्मचारियों की नियमित निगरानी बढ़ाने का भी फैसला किया है। इसके तहत कर्मचारियों की जिम्मेदारियों, कार्यस्थल पर उनकी गतिविधियों और प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा की जा सकती है। इसका उद्देश्य मंदिर की आंतरिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ सुरक्षा संबंधी मानकों को मजबूत करना है।
राम मंदिर प्रशासन में हाल के महीनों में कई बड़े बदलाव भी देखने को मिले हैं। प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत जिम्मेदारियों में परिवर्तन किया गया और मुख्य कार्यकारी अधिकारी की व्यवस्था को मजबूत किया गया है। इसी व्यापक बदलाव के तहत कर्मचारी सत्यापन और सुरक्षा जांच को प्राथमिकता दी जा रही है।
अयोध्या राम मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था से लेकर कर्मचारियों की जवाबदेही तक को लेकर ट्रस्ट लगातार व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहा है। कर्मचारियों के शत-प्रतिशत सत्यापन का फैसला इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
अब मंदिर में कार्यरत कर्मचारियों को पुलिस सत्यापन, चरित्र प्रमाणपत्र और पारिवारिक विवरण उपलब्ध कराना होगा। ट्रस्ट की ओर से साफ कर दिया गया है कि सत्यापन व्यवस्था सभी कर्मचारियों पर लागू होगी। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद मंदिर प्रशासन के पास कर्मचारियों और उनकी पृष्ठभूमि से जुड़ा एक विस्तृत और सत्यापित रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।





