उत्तर प्रदेश

गोरखपुर में रेप केस के नाम पर दबाव के आरोप जांच तेज

Ratna Netam
11 Aug 2026 2:50 PM IST
गोरखपुर में रेप केस के नाम पर दबाव के आरोप जांच तेज
x
गोरखपुर : किसी व्यक्ति को दुष्कर्म जैसे गंभीर मामले में फंसाने की धमकी देकर कथित तौर पर दबाव बनाने के आरोपों ने गोरखपुर में पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। कैंपियरगंज और गीडा क्षेत्र में ऐसे दो अलग-अलग मामले सामने आए हैं। कैंपियरगंज क्षेत्र में एक महिला के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि गीडा क्षेत्र में सामने आए एक अन्य मामले की जांच क्षेत्राधिकारी गीडा को सौंपी गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी व्यक्ति को झूठे मुकदमे में फंसाने की कोशिश की गई।
कैंपियरगंज क्षेत्र के मामले में शिकायतकर्ता ने पुलिस से शिकायत कर आरोप लगाया कि संबंधित महिला ने उसे दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी देकर दबाव बनाने की कोशिश की। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की प्रारंभिक जांच की। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर महिला के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। अब पुलिस मामले से जुड़े साक्ष्यों की विस्तृत पड़ताल कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, जांच में शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच हुई बातचीत, कथित लेन-देन और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को देखा जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि धमकी देने के आरोप के पीछे कोई वास्तविक विवाद था या किसी तरह का आर्थिक दबाव बनाने का प्रयास किया गया। मामले में उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है।
इसी तरह का एक मामला गीडा क्षेत्र में भी सामने आया है। यहां एक युवती पर दुष्कर्म के मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर लोगों पर दबाव बनाने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि युवती कुछ लोगों से इस तरह के मामलों को लेकर संपर्क करती थी और कथित तौर पर मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर दबाव बनाने की कोशिश की जाती थी। मामला पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद इसकी जांच सीओ गीडा को सौंप दी गई है।
गीडा पुलिस अब शिकायत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास करेगी कि शिकायत में लगाए गए आरोप किसी वास्तविक घटना पर आधारित हैं या किसी विवाद अथवा आर्थिक लेन-देन के कारण लगाए गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है। किसी व्यक्ति के खिलाफ केवल आरोप लगने के आधार पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित धाराओं में कार्रवाई की जाएगी। वहीं, यदि शिकायत या लगाए गए आरोप झूठे पाए जाते हैं तो कानून के अनुसार उस स्थिति में भी कार्रवाई की जा सकती है।
गोरखपुर में इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें दुष्कर्म के मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर कथित तौर पर दबाव बनाने या रुपये मांगने के आरोप लगाए गए थे। ऐसे मामलों ने पुलिस के सामने दोहरी चुनौती खड़ी की है। एक तरफ वास्तविक पीड़ितों की शिकायत पर तत्काल और निष्पक्ष कार्रवाई जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ कानून के दुरुपयोग के जरिए किसी निर्दोष व्यक्ति को झूठे मामले में फंसाने की कोशिश को भी रोकना जरूरी है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध से जुड़ी शिकायतों को बेहद संवेदनशीलता के साथ देखा जाता है। किसी महिला की वास्तविक शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। साथ ही, यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी व्यक्ति को झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर दबाव बनाया गया या कानून का गलत इस्तेमाल किया गया, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
एसपी नार्थ ज्ञानेंद्र ने कहा कि पीड़ितों को न्याय दिलाना पुलिस की प्राथमिकता है, लेकिन कानून का दुरुपयोग कर किसी निर्दोष व्यक्ति को फंसाने की कोशिश के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि कैंपियरगंज और गीडा दोनों मामलों में जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
फिलहाल कैंपियरगंज मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद जांच जारी है, जबकि गीडा मामले में सीओ स्तर से पड़ताल की जा रही है। पुलिस की जांच में सामने आने वाले साक्ष्य यह तय करेंगे कि दोनों मामलों में आरोप कितने सही हैं और आगे किस तरह की कानूनी कार्रवाई की जानी है।
Next Story