उत्तर प्रदेश

पुराने साथियों के साथ चुनाव लड़ने के संकेत अखिलेश यादव ने बताया SP का प्लान

Ratna Netam
30 Sept 2026 6:48 PM IST
पुराने साथियों के साथ चुनाव लड़ने के संकेत अखिलेश यादव ने बताया SP का प्लान
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपनी रणनीति के संकेत देने शुरू कर दिए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को कहा कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी उन्हीं सहयोगियों के साथ मिलकर आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है, जिनके साथ उसने हाल के चुनाव लड़े हैं। उन्होंने कहा कि गठबंधन को लेकर बातचीत और तैयारी चल रही है तथा इसकी घोषणा भी उचित समय पर की जाएगी।
लखनऊ में मीडिया से बातचीत के दौरान जब अखिलेश यादव से आगामी विधानसभा चुनाव में गठबंधन को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि जो गठबंधन पहले था, वही आगे भी रहने की संभावना है। उनके इस बयान को समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच चुनावी तालमेल जारी रहने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि सीटों के बंटवारे या अन्य विस्तृत चुनावी समझौते की औपचारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
अखिलेश यादव ने गठबंधन की घोषणा के समय को लेकर कहा कि इसके लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। इससे साफ है कि समाजवादी पार्टी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के साथ-साथ अपने सहयोगी दलों से तालमेल के मुद्दे पर भी काम कर रही है। उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के लिए विभिन्न दलों ने संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं और गठबंधन में सीट बंटवारा आने वाले महीनों में महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा रहने वाला है।
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में मिलकर चुनाव लड़ा था। इसके बाद दोनों दल विपक्षी INDIA गठबंधन का हिस्सा बने हुए हैं। हाल के दिनों में भी अखिलेश यादव कांग्रेस के साथ गठबंधन जारी रहने के संकेत देते रहे हैं। हालांकि विधानसभा चुनाव के लिए किस दल को कितनी सीटें मिलेंगी, इस पर अभी अंतिम समझौते की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
इस बीच अखिलेश यादव ने सत्तारूढ़ खेमे को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन के कई विधायक समाजवादी पार्टी के संपर्क में हैं। हालांकि उन्होंने ऐसे विधायकों की संख्या या उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए। अखिलेश ने यह भी कहा कि ऐसे नेताओं को पार्टी में शामिल करने में कुछ व्यावहारिक दिक्कतें हैं और समाजवादी पार्टी ऐसा कोई वादा नहीं करना चाहती जिसे बाद में पूरा न किया जा सके।
अखिलेश यादव का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। विधायकों के समर्थन और संभावित क्रॉस वोटिंग को लेकर राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर रणनीति बना रहे हैं। ऐसे माहौल में सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायकों के संपर्क में होने का अखिलेश यादव का दावा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
हालांकि भाजपा की ओर से भी समाजवादी पार्टी के विधायकों को लेकर जवाबी दावे किए गए हैं। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दावा किया है कि समाजवादी पार्टी के कई विधायक भाजपा के संपर्क में हैं। दोनों तरफ से किए जा रहे ये दावे संबंधित नेताओं के राजनीतिक बयान हैं और फिलहाल किसी बड़े पैमाने पर दल-बदल की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अखिलेश यादव ने यह भी संकेत दिया कि पार्टी चुनावी फैसले उम्मीदवार की जीत की संभावना और गठबंधन के राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर करेगी। सपा के लिए 2027 का विधानसभा चुनाव महत्वपूर्ण है और पार्टी पिछले कुछ समय से राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने तथा चुनावी अभियान को गति देने में जुटी है।
पार्टी ने अपने पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक राजनीतिक फार्मूले को भी चुनावी रणनीति के केंद्र में रखा है। हाल में अखिलेश यादव ने रायबरेली से पीडीए रथयात्रा शुरू की थी। पार्टी विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में अपनी पहुंच बढ़ाने और सामाजिक समूहों के बीच समर्थन मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए समाजवादी पार्टी किसानों, सरकारी कर्मचारियों, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक कल्याण से जुड़े मुद्दों पर भी लगातार घोषणाएं कर रही है। अखिलेश यादव ने बुधवार को ही किसानों के लिए मुफ्त सिंचाई और सरकार बनने पर गन्ना किसानों का भुगतान 24 से 48 घंटे में कराने का वादा किया। इससे पहले वह पुरानी पेंशन योजना बहाल करने समेत अन्य चुनावी वादे भी कर चुके हैं।
गठबंधन के स्तर पर समाजवादी पार्टी के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल सीट बंटवारे का होगा। कांग्रेस भी उत्तर प्रदेश में अपना संगठन और राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में दोनों दलों के बीच कितनी सीटों पर सहमति बनती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल अखिलेश यादव ने पुराने सहयोगियों के साथ ही चुनावी मैदान में उतरने का संकेत देकर गठबंधन को लेकर चल रही अटकलों के बीच अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है।
समाजवादी पार्टी की रणनीति में एक तरफ मौजूदा सहयोगियों को साथ बनाए रखने पर जोर है, वहीं दूसरी तरफ दूसरे दलों के नेताओं के लिए भी रास्ते पूरी तरह बंद नहीं किए गए हैं। अखिलेश यादव ने हाल में यह भी कहा था कि जो नेता समाजवादी पार्टी में आना चाहते हैं, उनके बारे में पार्टी विचार कर सकती है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि समाजवादी पार्टी अपने सहयोगियों के साथ सीट बंटवारे की औपचारिक घोषणा कब करती है। अखिलेश यादव के बुधवार के बयान से इतना जरूर स्पष्ट हुआ है कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन की राजनीति को जारी रखने की तैयारी कर रही है। वहीं भाजपा विधायकों के संपर्क में होने का उनका दावा भी चुनाव और राज्यसभा की मौजूदा राजनीतिक गतिविधियों के बीच नई चर्चा को जन्म दे रहा है।
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