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अखिलेश यादव का यूपी सरकार पर हमला, राम मंदिर दान जांच के लिए SIT गठन पर उठाए सवाल

Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अयोध्या राम मंदिर को मिले दान से जुड़े आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार को रोजगार और विकास पर ध्यान देने के बजाय जांच समितियों के गठन में अधिक रुचि है।
लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि जिस राज्य में युवाओं के लिए रोजगार और नौकरी के अवसर पैदा करने के लिए प्रयास होने चाहिए, वहां SIT बनाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकताएं गलत दिशा में जा रही हैं और इससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
यादव ने कहा कि सरकार की नीतियों में गंभीरता की कमी है और भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि “डबल इंजन” सरकार वास्तव में “डबल इंजन भ्रष्टाचार” बन गई है। उनके अनुसार, जनता को रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं की आवश्यकता है, लेकिन सरकार जांच और विवादों में उलझी हुई है।
उन्होंने प्रस्तावित SIT की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। अखिलेश यादव का कहना था कि इस जांच प्रक्रिया में सरकार से जुड़े अधिकारियों को जांच के दायरे से बाहर रखा जा सकता है, जबकि मंदिर के कर्मचारियों को जांच के दायरे में लाया जाएगा, जिससे निष्पक्षता पर प्रश्न खड़े होते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार वास्तव में पारदर्शिता चाहती है, तो जांच सभी संबंधित पक्षों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए। अन्यथा यह जांच प्रक्रिया राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित प्रतीत होगी।
अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में रोजगार सृजन की स्थिति कमजोर है और युवा अवसरों की तलाश में परेशान हैं। ऐसे में सरकार को प्राथमिकता के आधार पर निवेश, उद्योग और नौकरी सृजन पर ध्यान देना चाहिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों में असंतुलन है और विकास योजनाओं की गति अपेक्षित नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता को वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए जांच और विवादों को बढ़ाया जा रहा है।
इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और अधिक गरम हो गया है। सत्ता पक्ष की ओर से अभी इस टिप्पणी पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन मामले को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।
फिलहाल यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जहां एक तरफ जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार अपने फैसले को उचित ठहरा रही है।





