उत्तर प्रदेश

गठबंधन की राजनीति पर अखिलेश का तंज RLD को लेकर दिया बड़ा बयान

Ratna Netam
22 Aug 2026 5:01 PM IST
गठबंधन की राजनीति पर अखिलेश का तंज RLD को लेकर दिया बड़ा बयान
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उत्तर प्रदेश : राजनीति में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के बीच चल रहा बयानबाजी का दौर अब और तेज हो गया है। ‘चवन्नी’ वाले बयान को लेकर उठे विवाद के बीच अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए भाजपा और उसके सहयोगी दलों पर निशाना साधा है। उन्होंने आरएलडी को लेकर तंज कसते हुए कहा कि अगर भाजपा अपने सहयोगी दल को सम्मान देती है तो उसे सीटों में भी बड़ा हिस्सा देना चाहिए।
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर भाजपा आरएलडी को 120 सीटें देती है तो यह उसके सम्मान के हिसाब से होगा। उन्होंने यह भी तंज कसा कि अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो इसे चौधरी चरण सिंह, चौधरी अजित सिंह और जाट समाज के सम्मान से जोड़कर देखा जाएगा। उनके इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में नया विवाद खड़ा हो गया है।
क्या है ‘चवन्नी’ विवाद?
दरअसल, विवाद की शुरुआत अखिलेश यादव के एक बयान से हुई थी, जिसमें उन्होंने आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी पर निशाना साधते हुए ‘चवन्नी को रुपया बना दिया’ जैसी टिप्पणी की थी। इस बयान को जयंत चौधरी और उनके समर्थकों ने आपत्तिजनक बताया। आरएलडी नेताओं ने इसे राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए नाराजगी जाहिर की।
जयंत चौधरी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर अखिलेश यादव को किसी पर टिप्पणी करनी थी तो सीधे नाम लेकर बात करनी चाहिए थी। उन्होंने लोकतंत्र में जनता की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि जनता ही किसी को ऊपर उठाती है और किसी को नीचे ले जाती है।
जाट समाज से जोड़कर उठाया गया मुद्दा
इस विवाद को आरएलडी और कुछ नेताओं ने जाट समाज के सम्मान से जोड़ दिया है। आरएलडी का कहना है कि जयंत चौधरी केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक विरासत से जुड़े नेता हैं। वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने भी इस बयान को लेकर अखिलेश यादव से माफी मांगने की मांग की है।
मायावती ने कहा कि इस तरह की टिप्पणी को केवल एक नेता तक सीमित नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इससे जुड़े सामाजिक सम्मान का भी ध्यान रखना चाहिए। उनके बयान के बाद यह मामला और ज्यादा राजनीतिक रंग ले चुका है।
अखिलेश का भाजपा पर निशाना
अखिलेश यादव ने अपने पलटवार में भाजपा पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा को अपने सहयोगी दलों को उचित सम्मान देना चाहिए। आरएलडी और भाजपा के बीच गठबंधन को लेकर तंज कसते हुए उन्होंने सीट बंटवारे का मुद्दा उठाया।
सपा प्रमुख का कहना है कि राजनीतिक गठबंधन केवल नाम के लिए नहीं बल्कि सम्मान और बराबरी के आधार पर होने चाहिए। उन्होंने भाजपा पर सहयोगी दलों को सीमित भूमिका देने का आरोप लगाया।
यूपी की राजनीति में क्यों अहम है आरएलडी?
राष्ट्रीय लोकदल पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रभाव रखने वाली पार्टी मानी जाती है। खासकर जाट और किसान राजनीति में आरएलडी की भूमिका लंबे समय से रही है। चौधरी चरण सिंह की विरासत के कारण पश्चिमी यूपी में इस पार्टी का अपना आधार माना जाता है।
यही वजह है कि उत्तर प्रदेश चुनावों से पहले आरएलडी को लेकर हर राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुटा है। भाजपा, सपा और अन्य दल पश्चिमी यूपी के सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर अपनी राजनीति आगे बढ़ा रहे हैं।
गठबंधन की राजनीति पर असर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयान आने वाले चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। सपा और आरएलडी के बीच पहले भी गठबंधन रहा है, लेकिन अब दोनों दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी से दूरी बढ़ती नजर आ रही है।
वहीं भाजपा अपने सहयोगी दलों के साथ गठबंधन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में आरएलडी को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान आने वाले समय में और बढ़ सकती है।
चुनाव से पहले बढ़ेगी बयानबाजी
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी राजनीतिक दल अपने-अपने सामाजिक समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। किसान, जाट, पिछड़ा वर्ग और अन्य समुदायों को साधने के लिए राजनीतिक बयान लगातार सामने आ रहे हैं।
‘चवन्नी’ विवाद भी इसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। जहां एक ओर अखिलेश यादव भाजपा और आरएलडी पर निशाना साध रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आरएलडी इसे सम्मान और पहचान का मुद्दा बना रही है।
फिलहाल यह विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि आरएलडी, भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक समीकरण किस दिशा में जाते हैं।
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