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मिड-डे मील में दूध वितरण की अनियमितता पर कार्रवाई, प्रधानाध्यापिका निलंबित

उत्तरप्रदेश : मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) योजना के तहत बच्चों को दिए जाने वाले दूध वितरण में अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) हरिओम सिंह ने एक प्रधानाध्यापिका को निलंबित कर दिया है, जबकि लापरवाही पाए जाने पर अन्य प्रधानाध्यापकों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की गई है।
विभाग की जांच में दूध वितरण व्यवस्था में खामियां पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई। बीएसए ने एक प्रधानाध्यापिका के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई करते हुए दो प्रधानाध्यापकों को प्रतिकूल प्रविष्टि देने के आदेश जारी किए हैं। इसके अलावा एक प्रधानाध्यापक की अस्थायी वेतन वृद्धि रोकने और एक अन्य को कठोर चेतावनी देने का निर्णय लिया गया है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मिड-डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है, ताकि उनकी सेहत बेहतर हो सके और स्कूलों में उनकी उपस्थिति बढ़े। योजना के तहत बच्चों को निर्धारित मात्रा और मानकों के अनुसार भोजन एवं दूध उपलब्ध कराया जाना जरूरी है। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीर माना जाता है।
बताया जा रहा है कि दूध वितरण में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद विभाग ने मामले की जांच कराई थी। जांच के दौरान कुछ स्कूलों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद बीएसए ने संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और शिक्षकों पर कार्रवाई की।
बीएसए हरिओम सिंह ने स्पष्ट किया कि बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही तरीके से बच्चों तक पहुंचना चाहिए और इसमें गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि स्कूलों में मिड-डे मील योजना की नियमित निगरानी की जा रही है। भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और वितरण व्यवस्था की जांच के लिए समय-समय पर निरीक्षण भी किए जाते हैं। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी यदि किसी स्कूल में अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मिड-डे मील योजना लंबे समय से सरकारी स्कूलों में बच्चों के पोषण और शिक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना के रूप में संचालित की जा रही है। इसके तहत बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ दूध और अन्य पोषण सामग्री भी दी जाती है। ऐसे में वितरण व्यवस्था में गड़बड़ी को गंभीर चूक माना जाता है।
स्थानीय स्तर पर अभिभावकों ने भी विभाग की कार्रवाई का स्वागत किया है। उनका कहना है कि बच्चों को मिलने वाले भोजन और दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करना जरूरी है, क्योंकि यह सीधे उनके स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है।
शिक्षा विभाग ने स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि मिड-डे मील से संबंधित सभी नियमों का पालन किया जाए। दूध वितरण सहित भोजन व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने और रिकॉर्ड सही तरीके से तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
विभाग का कहना है कि बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। स्कूलों में योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा की जाएगी, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता को समय रहते रोका जा सके।
मिड-डे मील में दूध वितरण को लेकर हुई यह कार्रवाई शिक्षा विभाग की सख्ती को दर्शाती है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी यदि सरकारी योजनाओं के संचालन में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।





