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विश्व नदी दिवस पर लौवा नदी के पुनरोद्धार की कार्ययोजना पेश, जल संरक्षण और जनभागीदारी पर जोर

सोनभद्र: विश्व नदी दिवस के अवसर पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी-बीएचयू) में आयोजित कार्यक्रम में सोनभद्र की छोटी नदी लौवा के पुनरोद्धार की कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम में नदी संरक्षण, जल प्रवाह बनाए रखने और जलग्रहण क्षेत्र के विकास को लेकर विशेषज्ञों और अधिकारियों ने चर्चा की।
राज्य स्वच्छ गंगा मिशन लखनऊ की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के चयनित 15 जिला परियोजना अधिकारियों (डीपीओ) को ‘एक नदी एक पहल’ अभियान के तहत अपनी-अपनी नदियों के पुनरोद्धार की कार्ययोजना प्रस्तुत करने के लिए नामित किया गया था।
सोनभद्र की लौवा नदी को पुनर्जीवित करने की पहल
इसी क्रम में जिला गंगा समिति सोनभद्र के डीपीओ और वन विभाग के अधिकारी महेंद्र कुमार गौतम ने लौवा नदी की वर्तमान स्थिति और उसके पुनरोद्धार की योजना का प्रस्तुतीकरण किया।
उन्होंने कार्यक्रम में बताया कि नदी के संरक्षण के लिए मौजूदा चुनौतियों को समझना और उनके समाधान के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करना जरूरी है।
प्रस्तुति के दौरान लौवा नदी के वर्तमान हालात, जल प्रवाह की स्थिति, जलग्रहण क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं और नदी को पुनर्जीवित करने के लिए प्रस्तावित उपायों की जानकारी दी गई।
जल प्रवाह बनाए रखने पर दिया गया जोर
कार्ययोजना में नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखने और बेहतर करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि किसी भी नदी के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए केवल नदी क्षेत्र ही नहीं, बल्कि उसके पूरे जलग्रहण क्षेत्र का विकास जरूरी होता है।
इसी उद्देश्य से लौवा नदी के आसपास के क्षेत्रों में जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से जुड़े उपायों को योजना में शामिल किया गया है।
जलग्रहण क्षेत्र के विकास की योजना
प्रस्तावित कार्ययोजना में जलग्रहण क्षेत्र के विकास को महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
इसमें बारिश के पानी को संरक्षित करने, जल स्रोतों को मजबूत करने और नदी में पानी की उपलब्धता बनाए रखने के उपायों पर चर्चा की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलग्रहण क्षेत्र मजबूत होने से नदी का प्रवाह लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलती है।
सामुदायिक भागीदारी पर भी फोकस
लौवा नदी के पुनरोद्धार की योजना में स्थानीय लोगों की भागीदारी को भी अहम माना गया है।
कार्ययोजना में कहा गया कि नदी संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि स्थानीय समुदायों को भी इससे जोड़ना जरूरी है।
लोगों की सहभागिता बढ़ने से नदी की निगरानी, संरक्षण और स्वच्छता के प्रयास अधिक प्रभावी हो सकते हैं।
संरचनात्मक उपायों पर चर्चा
कार्ययोजना में नदी के पुनर्जीवन के लिए संरचनात्मक उपायों को भी शामिल किया गया है।
इसके तहत नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बेहतर बनाने, जल संरक्षण से जुड़े कार्यों और आवश्यक व्यवस्थाओं को विकसित करने पर जोर दिया गया।
इन उपायों का उद्देश्य नदी के दीर्घकालिक संरक्षण और जल उपलब्धता को बढ़ाना है।
‘एक नदी एक पहल’ के तहत हुआ आयोजन
राज्य स्वच्छ गंगा मिशन की ओर से चलाए जा रहे ‘एक नदी एक पहल’ अभियान का उद्देश्य प्रदेश की छोटी-बड़ी नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए स्थानीय स्तर पर योजनाएं तैयार करना है।
इसके तहत जिलों से जुड़ी नदियों की स्थिति का अध्ययन कर उनके लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
विशेषज्ञों के सामने रखी गई योजना
आइआइटी-बीएचयू में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न जिलों के अधिकारियों ने अपनी-अपनी नदियों के पुनरोद्धार से जुड़ी योजनाएं प्रस्तुत कीं।
सोनभद्र की ओर से लौवा नदी की योजना प्रस्तुत करते हुए नदी संरक्षण के लिए आवश्यक कदमों की जानकारी दी गई।
नदी संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
लौवा नदी के पुनरोद्धार की यह पहल सोनभद्र में जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
नदी का पुनर्जीवन होने से स्थानीय जल स्रोतों को मजबूती मिलेगी और आसपास के क्षेत्रों में जल उपलब्धता बेहतर हो सकती है।
विश्व नदी दिवस के अवसर पर प्रस्तुत इस कार्ययोजना ने छोटी नदियों के संरक्षण की जरूरत को भी सामने रखा। अब योजना के अनुसार कार्यों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा, ताकि लौवा नदी को लंबे समय तक संरक्षित और जीवंत रखा जा सके।





