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आजमगढ़ : उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में ऑनलाइन ट्रेडिंग के जरिए कम समय में मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर 1.32 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित कतर में कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में काम करता है। फेसबुक पर ट्रेडिंग से मोटी कमाई का विज्ञापन देखने के बाद वह साइबर अपराधियों के संपर्क में आया था। मामले में साइबर हेल्प पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
फेसबुक पर विज्ञापन देखकर किया संपर्क
आजमगढ़ में ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर बड़ी साइबर ठगी का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर एक व्यक्ति को कम समय में अधिक मुनाफा कमाने का लालच देकर 1.32 करोड़ रुपये की ठगी की। पीड़ित की पहचान आलम फहीम के रूप में हुई है, जो शहर कोतवाली क्षेत्र का रहने वाला है और कतर में कंस्ट्रक्शन लाइन में काम करता है।
मिली जानकारी के मुताबिक, जुलाई 2026 में आलम फहीम कतर में ही था। इसी दौरान उसने फेसबुक पर ऑनलाइन ट्रेडिंग से कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाने का एक विज्ञापन देखा। विज्ञापन में किए गए दावों से प्रभावित होकर उसने उसमें दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया।
इसके बाद कथित साइबर ठगों ने उससे बातचीत शुरू की। धीरे-धीरे उसे ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश करने और बेहतर रिटर्न हासिल करने का भरोसा दिलाया गया। शुरुआती बातचीत के दौरान आरोपियों ने खुद को ट्रेडिंग से जुड़ी जानकारी देने वाला बताया और पीड़ित को अपने संपर्क में बनाए रखा।
व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए प्रशिक्षण देने का दावा
पीड़ित के संपर्क करने के बाद साइबर अपराधियों ने व्हाट्सएप के माध्यम से उससे बातचीत शुरू की। आरोपियों ने उसे एक ग्रुप के जरिए ऑनलाइन ट्रेडिंग का प्रशिक्षण देने की बात कही। इस तरह के मामलों में ठग लोगों को निवेश से जुड़ी जानकारी देने, बाजार के उतार-चढ़ाव को समझाने और कमाई के तरीके बताने का भरोसा दिलाते हैं।
पीड़ित को भी इसी तरह भरोसे में लेने की बात सामने आई है। ऑनलाइन ग्रुप के माध्यम से उसे ट्रेडिंग से संबंधित जानकारी देने का दावा किया गया। ऐसे ग्रुप कई बार निवेशकों के बीच विश्वास पैदा करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। इनमें कथित तौर पर मुनाफे के स्क्रीनशॉट, सफल निवेश की कहानियां या बड़े रिटर्न के दावे दिखाए जा सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्रुप पर वास्तव में क्या गतिविधियां हुईं, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
साइबर अपराधी अक्सर सोशल मीडिया विज्ञापनों और मैसेजिंग ऐप के जरिए ऐसे लोगों को निशाना बनाते हैं, जो अतिरिक्त कमाई के अवसर तलाश रहे होते हैं। विदेश में काम करने वाले लोगों को भी आकर्षक निवेश योजनाओं के जरिए फंसाया जा सकता है।
1.32 करोड़ रुपये की ठगी का आरोप
इस मामले में पीड़ित ने कुल 1.32 करोड़ रुपये की साइबर ठगी होने की शिकायत दर्ज कराई है। इतनी बड़ी रकम की धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि पीड़ित ने कितनी बार पैसे ट्रांसफर किए, रकम किन खातों में भेजी गई और ठगी की पूरी प्रक्रिया किस तरह अंजाम दी गई।
इन पहलुओं की जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कथित आरोपियों ने किन बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया। साथ ही, यह भी महत्वपूर्ण होगा कि रकम किन खातों में पहुंची और क्या उसे आगे दूसरे खातों में ट्रांसफर किया गया।
ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर होने वाली ठगी में कई बार पीड़ितों को निवेश के लिए लगातार प्रेरित किया जाता है। उन्हें अधिक मुनाफे का भरोसा दिलाया जाता है और कभी-कभी नकली प्लेटफॉर्म पर बढ़ता हुआ बैलेंस भी दिखाया जाता है। हालांकि, आलम फहीम के मामले में ऐसी किसी खास प्रक्रिया की पुष्टि अभी उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।
साइबर हेल्प पोर्टल पर दर्ज कराई शिकायत
पीड़ित ने साइबर हेल्प पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए मामले में कार्रवाई की मांग की है। अपर पुलिस अधीक्षक यातायात पंकज श्रीवास्तव ने मामले की जानकारी दी है। शिकायत के आधार पर पुलिस कथित साइबर ठगी से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।
जांच में आरोपियों की पहचान, इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों, व्हाट्सएप ग्रुप और पैसों के लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यदि रकम बैंक खातों के माध्यम से भेजी गई है, तो संबंधित लेनदेन की जानकारी जुटाकर धन के प्रवाह का पता लगाने की कोशिश की जा सकती है।
इस तरह के मामलों में अलग-अलग राज्यों या देशों से जुड़े बैंक खातों और डिजिटल संपर्कों की वजह से जांच जटिल हो सकती है। पुलिस के लिए यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि विज्ञापन किसने प्रकाशित किया था और पीड़ित से संपर्क करने वाले लोग वास्तव में कौन थे।
फिलहाल, मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी, रकम की बरामदगी या किसी खाते को फ्रीज किए जाने के संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। इन सभी बिंदुओं पर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश करते समय रहें सतर्क
यह मामला ऑनलाइन निवेश के नाम पर होने वाली साइबर ठगी के प्रति सतर्क रहने की जरूरत को रेखांकित करता है। सोशल मीडिया पर कम समय में बहुत अधिक मुनाफा देने वाले विज्ञापनों पर बिना जांच भरोसा करना नुकसानदायक हो सकता है। निवेश से पहले कंपनी, प्लेटफॉर्म और संबंधित वित्तीय संस्था की विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है।
निवेशकों को किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर पैसे ट्रांसफर नहीं करने चाहिए। व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप में दिखाई जाने वाली कमाई के तस्वीरों और मुनाफे के दावों को प्रमाण नहीं मानना चाहिए। किसी भी निवेश में निश्चित और असाधारण रिटर्न का वादा संदेह पैदा कर सकता है।
अगर किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी हो जाती है, तो उसे जल्द से जल्द राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करनी चाहिए और आधिकारिक साइबर अपराध पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज करानी चाहिए। तुरंत शिकायत करने से संबंधित लेनदेन को रोकने या रकम की पहचान करने की संभावना बढ़ सकती है, हालांकि पैसे वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।
कुल मिलाकर, आजमगढ़ में ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर 1.32 करोड़ रुपये की कथित ठगी का मामला गंभीर है। अब पुलिस जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि पीड़ित को किस तरह जाल में फंसाया गया, रकम कहां भेजी गई और इस मामले में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
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