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उत्तर प्रदेश
Gonda जिला महिला अस्पताल में डिलीवरी के बाद महिला की मौत, परिजनों ने लगाया गंभीर आरोप, अस्पताल में हंगामा
Gulabi Jagat
10 Jan 2026 11:21 PM IST
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Gonda, गोंडा। जिला महिला अस्पताल फिर से विवादों के केंद्र में है। बुधवार को डिलीवरी के बाद 35 वर्षीय मंजू की मौत ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही और पैसे लेकर इलाज न करने का आरोप लगाया और जमकर हंगामा किया। अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ की घटना भी सामने आई।
मिली जानकारी के अनुसार ठकुरापुर गांव निवासी मुकेश अपनी पत्नी मंजू को प्रसव पीड़ा के चलते बुधवार शाम करीब 6:30 बजे जिला महिला अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत भर्ती कर सीजेरियन ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के दौरान लड़के का जन्म हुआ, लेकिन इसके बाद मंजू की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन थिएटर से बाहर निकालते समय उनका चेहरा पूरी तरह काला पड़ चुका था और महिला मृत अवस्था में थी। इसके बावजूद अस्पताल स्टाफ द्वारा गुब्बारे से ऑक्सीजन देने का दिखावा किया जा रहा था। परिजनों के बार-बार विरोध करने पर ही उन्हें बताया गया कि महिला की मौत हो चुकी है।
पैसे लेकर भी लापरवाही का आरोप
परिजन बताते हैं कि इलाज के लिए पैसे भी दिए गए थे, बावजूद इसके डॉक्टर और स्टाफ ने समुचित चिकित्सकीय कदम नहीं उठाए। परिजनों का कहना है कि अगर समय रहते सही इलाज और रेफर किया गया होता, तो मंजू की जान बच सकती थी। हंगामा और पुलिस हस्तक्षेप मौत की खबर मिलते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ और तोड़फोड़ की गई। मृतका के परिजनों ने महिला डॉक्टर सौम्या पर इलाज के दौरान पैसे मांगने का भी आरोप लगाया है। सूचना मिलने पर क्षेत्राधिकारी नगर आनंद राय पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे। हालात बेकाबू होते देख अस्पताल में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
तीन दिन में दूसरी मौत
तीन दिन पहले ही खरगूपुर थाना क्षेत्र के खरगूचांदपुर गांव निवासी 40 वर्षीय अनसूईया की भी इसी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हुई थी। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से साफ है कि जिला महिला अस्पताल की कार्यप्रणाली गंभीर रूप से सवालों के घेरे में है। डॉक्टर देवेंद्र सिंह, सीएमएस जिला महिला अस्पताल ने कहा कि मृतका का नवजात बच्चा पूरी तरह सुरक्षित है और चिकित्सकीय देखभाल में रखा गया है। उन्होंने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। पुलिस भी मामले की जांच कर रही है। सवाल जो सिस्टम से जवाब मांगते हैं। ऑपरेशन थिएटर में महिला की मौत के बावजूद ऑक्सीजन देने का नाटक क्यों किया गया? सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए पैसे लेने के बाद भी लापरवाही कैसे हुई? क्या लगातार हो रही मौतों की जिम्मेदारी कोई लेगा? गोंडा जिला महिला अस्पताल की यह दोहरी घटना सिर्फ मौत की कहानी नहीं है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही, पारदर्शिता और संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल है। अब जरूरत है निष्पक्ष और तेज़ जांच की, ताकि दोषियों को जिम्मेदारी तय करनी पड़े और भविष्य में किसी और परिवार को ऐसा दर्द न झेलना पड़े।
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