उत्तर प्रदेश

Love संबंध का दर्दनाक अंत, नोएडा कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद

Ratna Netam
9 July 2026 6:23 PM IST
Love  संबंध का दर्दनाक अंत, नोएडा कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद
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Noida नोएडा : गौतमबुद्धनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 19 वर्षीय युवती की गला दबाकर हत्या करने के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी धनंजय को दोषी करार दिया है। अपर सत्र न्यायाधीश एवं फास्ट ट्रैक कोर्ट-द्वितीय के न्यायाधीश सत्येंद्र सिंह ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जुर्माने की राशि में से 40 हजार रुपये मृतका के माता-पिता को प्रतिकर के रूप में दिए जाएंगे। यदि आरोपी जुर्माने की रकम जमा नहीं करता है तो उसे एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

मामले की जानकारी देते हुए पैरोकार अंकित कुमार ने बताया कि मृतका निशा कुमारी (19) के पिता ओमप्रकाश ने 28 मार्च 2024 को थाना सेक्टर-63 में आरोपी धनंजय के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायत में बताया गया था कि 27 मार्च 2024 को आरोपी उनकी बेटी को अपने साथ ले गया था। इसके बाद सेक्टर-63 क्षेत्र में स्थित आरोपी के किराए के कमरे से युवती का शव बरामद हुआ था।

घटना के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपहरण और हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। विवेचना के दौरान पुलिस ने कई अहम साक्ष्य जुटाए और मामले को अदालत में पेश किया।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी क्राइम शिल्पी भदौरिया ने अदालत के सामने कई महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत किए। अभियोजन ने घटनाक्रम की पूरी कड़ी को अदालत के सामने रखा। अदालत ने पाया कि मृतका को आखिरी बार आरोपी धनंजय के साथ देखा गया था। इसके बाद वह किसी अन्य व्यक्ति के साथ नहीं दिखी।

अदालत ने यह भी माना कि युवती का शव आरोपी के कमरे से बरामद हुआ था और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसकी मौत गला दबाने से होने की पुष्टि हुई थी। इसके अलावा हत्या में इस्तेमाल की गई कपड़े की पट्टी की बरामदगी और घटना के बाद आरोपी का फरार होना भी उसके खिलाफ अहम परिस्थितिजन्य साक्ष्य साबित हुए।

न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी पहले से शादीशुदा था, लेकिन उसके मृतका के साथ प्रेम संबंध थे। दोनों के बीच संबंधों के चलते युवती आरोपी पर शादी का दबाव बना रही थी। अदालत ने माना कि इसी दबाव से बचने के लिए आरोपी ने युवती की हत्या कर दी। इसे अदालत ने हत्या का स्पष्ट उद्देश्य माना।

अदालत ने कहा कि जब किसी व्यक्ति के कमरे से उसका साथ रहने वाली युवती का शव बरामद होता है तो उस व्यक्ति की जिम्मेदारी होती है कि वह घटना की परिस्थितियों के बारे में संतोषजनक जवाब दे। आरोपी ऐसा करने में पूरी तरह विफल रहा।

फैसले में अदालत ने कहा कि आरोपी ने विश्वास का दुरुपयोग करते हुए युवती को अपने साथ ले जाकर उसकी निर्मम हत्या की। उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों की पूरी श्रृंखला से यह साबित होता है कि हत्या धनंजय ने ही की थी। अपराध की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने आरोपी को किसी भी तरह की राहत देने से इनकार करते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

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