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उत्तर प्रदेश: वाराणसी में गंगा नदी किनारे बड़ी संख्या में कफ सिरप की शीशियां मिलने से हड़कंप मच गया है। चौबेपुर थाना क्षेत्र के चंद्रावती गांव के पास बुधवार को नदी के किनारे 'फेयरडील' कफ सिरप की 345 प्लास्टिक की शीशियां बहकर पहुंच गईं। ग्रामीणों की नजर जब इन बोतलों पर पड़ी तो उन्होंने इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सभी शीशियों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ड्रग विभाग की टीम को भी मौके पर बुलाया गया। ड्रग इंस्पेक्टर चंद्रेश द्विवेदी और जुनाब अली ने पुलिस टीम के साथ पहुंचकर बरामद कफ सिरप की बोतलों की जांच की। अधिकारियों ने सभी दवाओं को सुरक्षित रखकर उनके निर्माण, गुणवत्ता और वैधता से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि किसी व्यक्ति ने कफ सिरप की बड़ी खेप को जानबूझकर कहीं फेंक दिया होगा, जो गंगा के बहाव के साथ बहते हुए चंद्रावती गांव के किनारे पहुंच गई। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये दवाइयां कहां से आईं और इन्हें नदी में क्यों फेंका गया।
चौबेपुर थाना प्रभारी अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि ग्रामीणों से सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और सभी 345 शीशियों को कब्जे में लिया गया। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कफ सिरप की यह खेप किसी मेडिकल स्टोर, गोदाम या अन्य स्थान से जुड़ी है या नहीं। इसके लिए दवा के बैच नंबर, निर्माण कंपनी और सप्लाई रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
जांच में ग्रामीणों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। जिन लोगों ने नदी से शीशियां निकालकर पुलिस को सूचना दी, उनसे घटना से जुड़ी जानकारी ली गई है। पुलिस और ड्रग विभाग की संयुक्त टीम पूरे मामले की हर पहलू से जांच कर रही है।
ड्रग विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश सरकार के निर्देश पर अवैध दवाओं और ड्रग माफिया के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। प्रारंभिक तौर पर यह भी आशंका जताई जा रही है कि कार्रवाई के डर से किसी ने कफ सिरप की खेप को ठिकाने लगाने के उद्देश्य से नदी में फेंका होगा।
अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि बरामद कफ सिरप असली है या नकली, इसकी बिक्री और वितरण की अनुमति थी या नहीं और यह खेप किसके नाम पर जारी की गई थी। यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता या अवैध कारोबार सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ औषधि अधिनियम समेत अन्य कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।
गंगा किनारे इतनी बड़ी मात्रा में दवाइयां मिलने के बाद स्थानीय लोगों में भी चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि नदी में दवाइयां फेंकना पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। प्रशासन ने मामले की जांच पूरी होने तक बरामद सभी शीशियों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।
फिलहाल पुलिस और ड्रग विभाग की संयुक्त जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि कफ सिरप की यह खेप किसकी थी और इसे गंगा में किस वजह से फेंका गया था। मामले में दोषी पाए जाने वाले लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।





