उत्तर प्रदेश

चाय में जहर देकर 3 बच्चों की हत्या, मां को आजीवन कारावास

Rajeshwari Nishad
5 Nov 2026 11:56 PM IST
चाय में जहर देकर 3 बच्चों की हत्या, मां को आजीवन कारावास
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गाजीपुर। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में चार साल पहले अपने ही तीन मासूम बच्चों को चाय में जहर देकर मौत के घाट उतारने के सनसनीखेज मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम शक्ति सिंह की अदालत ने दोषी मां सुनीता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वर्ष 2022 में हुई इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था। पारिवारिक विवाद के बाद तीन बच्चों की हत्या के इस मामले में लंबे समय से अदालत में सुनवाई चल रही थी।
जानकारी के अनुसार, यह मामला गाजीपुर जिले के सुहवल थाना क्षेत्र के ढढ़नी भानमल राय गांव का है। यहां 15 अगस्त 2022 को एक महिला ने अपने तीन बच्चों को जहरीली चाय पिला दी थी। बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और बच्चों की मां सुनीता के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया।अभियोजन पक्ष के मुताबिक, सुनीता का अपने पति बालेश्वर के साथ पारिवारिक विवाद चल रहा था। बालेश्वर दिल्ली में नौकरी करता था। पति से विवाद के बाद सुनीता अपने मायके में रह रही थी। इसी दौरान उसने अपने तीन बच्चों हिमांशु, प्रियांशु और सुप्रिया को जहर दे दिया। बच्चों की मौत के बाद यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया था।
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया था कि घटना से पहले महिला का अपने पति से फोन पर विवाद हुआ था। इसके बाद बच्चों को चाय में जहरीला पदार्थ मिलाकर देने की बात सामने आई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने साक्ष्य जुटाए और आरोपी महिला को गिरफ्तार किया। बाद में विवेचना पूरी कर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया। घटना के समय तीनों बच्चे अपनी मां के साथ मायके में रह रहे थे। सामान्य पारिवारिक माहौल के बीच हुई इस वारदात से आसपास के लोग स्तब्ध रह गए थे। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि बच्चों की मौत के पीछे उनकी अपनी मां की भूमिका सामने आएगी। जांच में जुटी पुलिस ने घटनाक्रम और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले को आगे बढ़ाया।
अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने यह साबित करने का प्रयास किया कि तीनों बच्चों की मौत आकस्मिक नहीं थी, बल्कि उन्हें जानबूझकर जहरीला पदार्थ दिया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहियों का परीक्षण किया गया। अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर सुनीता को हत्या का दोषी पाया।जानकारी के मुताबिक, अदालत ने तीन अक्टूबर 2026 को ही सुनीता को दोषी करार दे दिया था। इसके बाद सजा के सवाल पर सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी। गुरुवार, पांच नवंबर को अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए दोषी महिला को आजीवन कारावास की सजा दी। साथ ही 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
इस फैसले के साथ चार साल से चल रही न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण पड़ाव आया है। घटना के बाद से ही तीनों बच्चों की मौत को लेकर परिवार और स्थानीय लोगों में गहरा दुख था। मामले में अदालत के निर्णय का इंतजार किया जा रहा था। अब न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोषी महिला के लिए सजा निर्धारित कर दी है।यह मामला इसलिए भी बेहद संवेदनशील रहा क्योंकि इसमें तीनों मृतक नाबालिग बच्चे थे और हत्या का दोष उनकी मां पर सिद्ध हुआ। बच्चों की सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी सामान्यतः परिवार के वयस्क सदस्यों पर होती है। ऐसे में इस घटना ने पारिवारिक तनाव के गंभीर परिणामों को भी सामने रखा।
अदालत का निर्णय इस बात को रेखांकित करता है कि किसी भी व्यक्तिगत या पारिवारिक विवाद में बच्चों के खिलाफ हिंसा को उचित नहीं ठहराया जा सकता। पति-पत्नी के बीच मतभेद या घरेलू तनाव चाहे कितना भी गंभीर क्यों न हो, बच्चों की जान को नुकसान पहुंचाना एक गंभीर आपराधिक कृत्य है।इस मामले में पुलिस की विवेचना और अभियोजन की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। घटना वर्ष 2022 की थी और उसके बाद कानूनी प्रक्रिया विभिन्न चरणों से गुजरी। आरोप तय होने, साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने और अदालत में सुनवाई के बाद दोषसिद्धि हुई। अंततः अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
यह भी महत्वपूर्ण है कि इस मामले में महिला को दोषी ठहराए जाने और सजा सुनाए जाने के बीच अलग-अलग तारीखें रही हैं। अदालत ने पहले दोषसिद्धि का निर्णय दिया और बाद में सजा निर्धारित की। इसी वजह से पांच नवंबर का फैसला मामले में सजा सुनाए जाने से जुड़ा है।चार साल पुराने इस मामले ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा, पारिवारिक विवादों के समाधान और मानसिक तनाव की स्थिति में समय रहते सहायता प्राप्त करने की आवश्यकता पर ध्यान दिलाया है। पारिवारिक मतभेदों को बातचीत, परामर्श और कानूनी सहायता के जरिए सुलझाना जरूरी है, ताकि किसी भी बच्चे को हिंसा या प्रताड़ना का शिकार न होना पड़े।
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