उत्तर प्रदेश

UP में पेट दर्द के 200 मरीज मेडिकल कॉलेज पहुंचे, एक महिला की मौत

Ashish verma
30 May 2025 12:14 AM IST
UP में पेट दर्द के 200 मरीज मेडिकल कॉलेज पहुंचे, एक महिला की मौत
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पेट दर्द के 200 मरीज मेडिकल कॉलेज पहुंचे

Etah.एटा। थाना जैथरा क्षेत्र के कसैला में एक महिला की पेट दर्द से हालत गंभीर हो गई। परिजन उसे निजी अस्पताल के बाद मेडिकल कॉलेज लेकर आए जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उधर, गुरुवार को ओपीडी में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। मेडिसिन विभाग की ओपीडी में दो सैकड़ा लोग पेट दर्द का इलाज कराने पहुंचे। पेट दर्द की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। थाना जैथरा क्षेत्र के गांव कसैला निवासी ममता (40) को बुधवार को पेट दर्द हुआ। इसको लेकर परिजनों ने महिला को निजी क्लीनिक में भर्ती कराया। जहां उपचार के बाद महिला को कोई आराम नहीं मिला। इसको लेकर परिजन महिला को लेकर मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया। उधर, मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में मरीजों की भीड़ कम नहीं हो रही है। जिसके चलते पर्चा काउंटर से लेकर दवा वितरण कक्ष के बाहर तक लोगों की लंबी कतार लग जाती है।

गुरुवार को भी ओपीडी परिसर में लोगों की भीड़ देखने को मिली। जिसके चलते मेडिसिन विभाग की ओपीडी में साढ़े पांच सौ लोग पहुंचे। जिसमें से दो सौ लोग पेट दर्द के मरीज थे। इसके अलावा ओपीडी में डेढ़ सौ से अधिक बुखार के मरीज इलाज के लिए पहुंचे। वहीं, डॉक्टर मुहम्मद काशिफ ने बताया कि इन दिनों ओपीडी में पेट दर्द और बुखार के मरीजों की काफी भीड़ है। बदलते मौसम में लोगों को सावधानी बरतना जरूरी है। हार्ट अटैक से बुजुर्ग की मौत कोतवाली नगर क्षेत्र के आगरा रोड निवासी सुनील कुमार (60) को गुरुवार सुबह 10 बजे सांस लेने में दिक्कत हुई। जिससे उनकी हालत बिगड़ गई। वहीं, परिजन आनन-फानन में बुजुर्ग को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में ले गए। जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

परिजन बुजुर्ग की मौत हार्ट अटैक से होने की बात कह रहे हैं। बढ़ रहा है मौतों का आंकड़ा पेट दर्द की बीमारी बढ़ने से मौतों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। एक माह में डेढ़ दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है। निजी क्लीनिक मरीजों से पट गए हैं। डॉक्टर इसका कारण खानपान बता रहे हैं। सीएमएस डॉ. एस चंद्रा ने बताया कि इन दिनों संतुलित आहार लाभदायक है। अधिक तला-भुना या जंक फूड का सेवन न करें। शरीर में पानी की कमी न होने दें। दिन में कम से कम चार लीटर पानी पिएं। उन्होंने बताया कि मरने वाले लोगों को हालत बिगड़ने पर ग्रामीण क्षेत्रों के निजी क्लीनिकों से मेडिकल कॉलेज लाया गया था। अगर मरीज को समय पर सही उपचार मिल जाए तो उसकी जान बच सकती है।


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