उत्तर प्रदेश

एटा में रहस्यमयी बीमारी से 16 लोगों की मौत, गांवों में दहशत

Rajeshwari Nishad
8 Oct 2026 8:54 PM IST
एटा में रहस्यमयी बीमारी से 16 लोगों की मौत, गांवों में दहशत
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एटा। उत्तर प्रदेश के एटा जिले में बुखार और संक्रामक बीमारियों के बढ़ते मामलों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। जिले के मिरहची क्षेत्र स्थित रसूलपुर गढ़ौली गांव में लगातार सामने आ रही मौतों से लोगों में डर का माहौल है। कई परिवारों में लोग बुखार से पीड़ित बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बीमारियों के कारण गांव में सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है। प्रभावित परिवार मौतों के वास्तविक कारणों की जांच चाहते हैं। हालांकि जिले में रहस्यमयी बीमारी से 16 लोगों की मौत होने के दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अक्टूबर के शुरुआती दिनों में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, रसूलपुर गढ़ौली में लगभग 15 दिनों के भीतर छह लोगों की मौत की जानकारी सामने आई थी। इन सभी मौतों का कारण एक ही बीमारी होना भी स्वास्थ्य विभाग ने पुष्ट नहीं किया है।
रसूलपुर गढ़ौली गांव में बीते कुछ दिनों से बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ने की जानकारी सामने आई है। गांव में कई परिवारों के सदस्य बीमार हैं और उनका उपचार सरकारी तथा निजी अस्पतालों में कराया जा रहा है। लगातार लोगों के बीमार होने से ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है। बीमारी के लक्षण और मौतों के कारणों का पता लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू की है।
ग्रामीणों के अनुसार, सितंबर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर की शुरुआत तक गांव में कई
मौतें
हुईं। इनमें खूबसिंह, चिरंजी लाल, धर्मजीत उर्फ पप्पू, शांति देवी, राधा और यतींद्र के नाम सामने आए थे। ग्रामीणों ने इन मौतों को गांव में फैल रहे बुखार से जोड़कर चिंता जताई थी। हालांकि चिकित्सकीय जांच के बिना सभी लोगों की मृत्यु का कारण संक्रामक बीमारी नहीं माना जा सकता।
अक्टूबर के पहले सप्ताह में स्थिति तब और चिंताजनक हो गई, जब गांव के दो युवकों और एक बुजुर्ग की मौत की सूचना सामने आई। जानकारी के अनुसार, 23 वर्षीय पवन की आगरा के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि उसे बुखार आया था और हालत बिगड़ने के बाद मेडिकल कॉलेज से आगरा रेफर किया गया था।
इसी गांव के 28 वर्षीय बबलू की अलीगढ़ के निजी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक, वह भी बुखार से पीड़ित था। इसके अलावा गांव के लगभग 100 वर्षीय कल्लू सिंह की भी मौत हो गई। परिवार ने बताया कि वह कई दिनों से बुखार से पीड़ित थे और उनकी हृदय गति रुकने से मृत्यु हुई। एक साथ तीन मौतों की खबर से गांव में मातम पसर गया।
गांव में लगातार सामने आ रही मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय हुईं। 5 अक्टूबर को स्वास्थ्य विभाग की तीन टीमों ने रसूलपुर गढ़ौली पहुंचकर 89 लोगों की जांच की। इनमें 45 लोगों की मलेरिया और 44 लोगों की डेंगू जांच की गई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इन जांचों में किसी भी व्यक्ति में डेंगू या मलेरिया की पुष्टि नहीं हुई।
इसके अलावा समीपवर्ती जारथल गांव में भी स्वास्थ्य शिविर लगाया गया। वहां 55 लोगों को उपचार उपलब्ध कराया गया। इनमें 31 लोगों की मलेरिया और 24 लोगों की डेंगू जांच हुई। इन जांचों में भी संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई थी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया था कि गांव में दो युवकों की डेंगू से मौत होने की सूचना मिली है, लेकिन संबंधित चिकित्सकीय रिपोर्ट की पुष्टि आवश्यक है। उन्होंने बताया कि पवन पहले से न्यूरोलॉजिकल समस्या से भी परेशान था। स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों को साफ-सफाई रखने और पानी उबालकर पीने की सलाह दी।
बीमारी के बढ़ते मामलों की सूचना मिलने पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी प्रभावित गांव का दौरा किया। मारहरा विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. रवि रंजन यादव और अन्य अधिकारी रसूलपुर गढ़ौली पहुंचे। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत की और प्रभावित परिवारों की समस्याओं की जानकारी ली।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से गांव में एंटी लार्वा दवा का छिड़काव और फॉगिंग कराई गई। बीमार लोगों की जांच के लिए शिविर लगाए गए तथा जरूरत के अनुसार दवाएं उपलब्ध कराई गईं। चिकित्सकीय टीमों ने मरीजों के रक्त के नमूने भी लिए, ताकि संक्रमण की स्थिति का पता लगाया जा सके।
गांव में बीमारी फैलने के पीछे वास्तविक कारणों का पता लगाना स्वास्थ्य विभाग के सामने महत्वपूर्ण चुनौती है। बुखार कई प्रकार के वायरल और बैक्टीरियल संक्रमणों के कारण हो सकता है। डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों में भी बुखार आता है, लेकिन बिना जांच किसी मरीज को इन बीमारियों से पीड़ित बताना उचित नहीं है।
ऐसे मामलों में मरीजों की जांच, बीमारी के लक्षणों का अध्ययन, प्रयोगशाला रिपोर्ट और मृत्यु से संबंधित चिकित्सकीय दस्तावेज महत्वपूर्ण होते हैं। यदि एक ही क्षेत्र में कम समय के भीतर कई लोगों की मौत होती है, तो उनके कारणों की अलग-अलग जांच भी जरूरी होती है।
ग्रामीणों की चिंता इस बात को लेकर है कि लगातार लोगों के बीमार होने और मौतों की सूचना सामने आने के बावजूद बीमारी की स्पष्ट वजह पता नहीं चल पा रही है। प्रभावित परिवार चाहते हैं कि स्वास्थ्य विभाग गंभीरता से जांच करके स्थिति स्पष्ट करे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
एटा जिले में बदलते मौसम के बीच बुखार के अन्य मामले भी सामने आए हैं। मेडिकल कॉलेज में बुखार से पीड़ित मरीजों के उपचार और मलेरिया संक्रमण की पुष्टि से जुड़े मामले दर्ज हुए हैं। इससे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं और बीमारी की निगरानी की आवश्यकता और महत्वपूर्ण हो गई है।
बीमारी से बचाव के लिए लोगों को घरों और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने, पानी जमा नहीं होने देने और मच्छरों से बचाव करने की सलाह दी जा रही है। तेज बुखार, लगातार उल्टी, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक कमजोरी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
फिलहाल रसूलपुर गढ़ौली और आसपास के क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई तथा जांच रिपोर्ट महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। ग्रामीण मौतों के वास्तविक कारणों का पता लगाने और प्रभावित परिवारों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि अलग-अलग मौतों का संबंध किसी एक बीमारी से है या इनके पीछे अलग-अलग चिकित्सकीय कारण रहे हैं।
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