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120 किसान अंतरराज्यीय प्रशिक्षण के लिए पंतनगर रवाना, आधुनिक खेती की तकनीक सीखेंगे

लखीमपुर। कृषि विभाग की ओर से संचालित सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन यानी आत्मा योजना के तहत 120 किसानों का अंतरराज्यीय प्रशिक्षण एवं भ्रमण दल शुक्रवार को पंतनगर के लिए रवाना हुआ। उप कृषि निदेशक गिरीश चंद्र ने किसानों के दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह दल उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले में स्थित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर में आयोजित होने वाले अखिल भारतीय किसान मेले और कृषि उद्योग प्रदर्शनी में हिस्सा लेगा।
किसानों का यह प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम 2 से 6 अक्टूबर तक प्रस्तावित है। मेले को कृषि कुंभ के नाम से भी जाना जाता है। इसमें देशभर से किसान, कृषि विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, कृषि उपकरण निर्माता और कृषि क्षेत्र से जुड़े संस्थान हिस्सा लेते हैं। किसानों के लिए यह कार्यक्रम नई तकनीकों को समझने और खेती में आधुनिक तरीकों को अपनाने की जानकारी हासिल करने का अवसर उपलब्ध कराएगा।
कृषि विभाग के अनुसार, अंतरराज्यीय प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को उनके क्षेत्र से बाहर जाकर कृषि की उन्नत तकनीकों और नवाचारों से परिचित कराना है। पंतनगर में आयोजित मेले के दौरान किसान विभिन्न कृषि यंत्रों, उन्नत बीजों, फसल उत्पादन तकनीकों और खेती की नई पद्धतियों का प्रत्यक्ष अवलोकन कर सकेंगे। इसके साथ ही विशेषज्ञों से बातचीत कर खेती से जुड़े सवालों के जवाब भी हासिल कर सकेंगे।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को गेहूं की खेती से जुड़ी आधुनिक तकनीक के बारे में जानकारी दी जाएगी। खासतौर पर सीड ड्रिल के माध्यम से कतारों में गेहूं की बुवाई की तकनीक समझाई जाएगी। इस विधि से बीज की दूरी और मात्रा को व्यवस्थित तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। किसानों को बताया जाएगा कि कतारबद्ध बुवाई से फसल प्रबंधन में किस प्रकार सुविधा मिल सकती है।
दलहन फसलों के उत्पादन में जैव उर्वरकों के इस्तेमाल की तकनीक भी प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। किसानों को जैव उर्वरकों के उपयोग, फसलों में उनके महत्व और खेती में इनके इस्तेमाल से संबंधित जरूरी जानकारी दी जाएगी। उद्देश्य यह है कि किसान उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए उत्पादन की लागत और मिट्टी की गुणवत्ता से जुड़े पहलुओं को समझ सकें।
इसी तरह तिलहन फसलों में सल्फर के प्रयोग की तकनीक के बारे में भी किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा। तिलहन फसलों में पोषक तत्वों की भूमिका और फसल की जरूरत के अनुसार उर्वरकों के इस्तेमाल की जानकारी विशेषज्ञों के माध्यम से दी जाएगी। किसान इन तकनीकों को अपने खेतों में अपनाने की संभावनाओं को भी समझ सकेंगे।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में अंतःफसली खेती पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। अंतःफसली खेती में एक ही खेत में निर्धारित तरीके से एक से अधिक फसलों का उत्पादन किया जाता है। किसानों को बताया जाएगा कि अलग-अलग फसलों के चयन और खेत में उनके संयोजन के आधार पर उत्पादन क्षमता को कैसे बेहतर किया जा सकता है। यह पद्धति खेती के जोखिम को कम करने और उपलब्ध भूमि के बेहतर उपयोग में सहायक हो सकती है।
किसानों को श्री अन्न यानी मोटे अनाज आधारित खेती के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। बदलते कृषि परिदृश्य में मोटे अनाज की खेती को लेकर किसानों की रुचि बढ़ी है। प्रशिक्षण में श्री अन्न की उन्नत खेती, फसल प्रबंधन और इससे जुड़े संभावित कृषि अवसरों के बारे में जानकारी साझा की जाएगी।
इसके अलावा दल को प्राकृतिक खेती से संबंधित विभिन्न पहलुओं से भी परिचित कराया जाएगा। किसानों को प्राकृतिक खेती की अवधारणा, इसमें अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं और खेत स्तर पर संभावित प्रयोगों की जानकारी दी जाएगी। इस दौरान किसानों को पारंपरिक अनुभव और आधुनिक कृषि अनुसंधान के बीच समन्वय की संभावनाओं से भी अवगत कराया जा सकता है।
पंतनगर स्थित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कृषि शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार गतिविधियों के लिए जाना जाता है। यहां आयोजित किसान मेले में किसानों को कृषि क्षेत्र में विकसित तकनीकों और बाजार से जुड़ी नई जानकारियां एक ही मंच पर देखने का अवसर मिलता है। इस कारण अंतरराज्यीय प्रशिक्षण के लिए पंतनगर का चयन किसानों के लिए उपयोगी माना जा रहा है।
मेले में कृषि उद्योग प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। इसमें विभिन्न प्रकार के कृषि यंत्र और उपकरण प्रदर्शित किए जाएंगे। किसान खेती के काम आने वाली मशीनों के संचालन, उपयोग और उपलब्ध विकल्पों के बारे में जानकारी हासिल कर सकेंगे। इससे उन्हें अपने खेत की जरूरत के अनुसार तकनीक चुनने में मदद मिल सकती है।
अंतरराज्यीय भ्रमण किसानों को दूसरे क्षेत्रों में अपनाई जा रही खेती की पद्धतियों को करीब से देखने का अवसर भी देगा। स्थानीय स्तर पर किसान जिस तरह की समस्याओं का सामना करते हैं, उनके समाधान के लिए दूसरे क्षेत्रों में अपनाए जा रहे उपायों से वे परिचित हो सकते हैं। इस तरह का आदान-प्रदान कृषि विस्तार कार्यक्रमों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
उप कृषि निदेशक गिरीश चंद्र ने किसानों के दल को रवाना करते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम का लाभ उठाने और विशेषज्ञों से अधिक से अधिक जानकारी लेने की बात कही। विभाग की कोशिश है कि किसान प्रशिक्षण के दौरान मिली जानकारी को अपने खेतों में लागू करें और कृषि उत्पादन को अधिक व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में आगे बढ़ें।
किसान मेले में केवल फसल उत्पादन ही नहीं, बल्कि कृषि से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी भी उपलब्ध होगी। किसान खेती में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों, नई तकनीकों, उन्नत पद्धतियों और कृषि नवाचारों को समझ सकेंगे। साथ ही कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के साथ संवाद करने का मौका मिलेगा।
अंतरराज्यीय प्रशिक्षण एवं भ्रमण का यह कार्यक्रम किसानों को नई जानकारी के साथ व्यावहारिक अनुभव देने पर केंद्रित है। किसानों को उम्मीद है कि पंतनगर प्रवास के दौरान उन्हें खेती से जुड़े कई ऐसे उपाय सीखने को मिलेंगे, जिन्हें वे अपने क्षेत्र में लागू कर सकते हैं।
कृषि विभाग के मुताबिक, आत्मा योजना के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, भ्रमण और कृषि विस्तार से जोड़कर नई तकनीकों तक उनकी पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया जाता है। पंतनगर जाने वाला 120 किसानों का दल इसी पहल का हिस्सा है। कृषि क्षेत्र में लगातार हो रहे बदलावों के बीच किसानों को तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराना खेती को अधिक प्रभावी बनाने के लिए जरूरी माना जा रहा है।
2 से 6 अक्टूबर तक चलने वाले इस प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम में किसान विभिन्न सत्रों और प्रदर्शनी में हिस्सा लेंगे। वे उन्नत कृषि यंत्रों का प्रदर्शन देखेंगे और आधुनिक खेती से जुड़े प्रयोगों की जानकारी हासिल करेंगे। गेहूं में सीड ड्रिल से कतारबद्ध बुवाई, दलहन में जैव उर्वरक, तिलहन में सल्फर, अंतःफसली खेती, श्री अन्न और प्राकृतिक खेती जैसी तकनीकें कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं।
शुक्रवार को 120 किसानों का दल पंतनगर के लिए रवाना हो गया है। अब अगले चार दिनों में होने वाले प्रशिक्षण और भ्रमण के दौरान किसान कृषि विशेषज्ञों से नई तकनीकें सीखेंगे और अखिल भारतीय किसान मेले एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी के माध्यम से खेती के क्षेत्र में हो रहे नए प्रयोगों से रूबरू होंगे। उम्मीद है कि यह प्रशिक्षण किसानों के लिए व्यावहारिक ज्ञान और तकनीकी जानकारी का उपयोगी माध्यम बनेगा।





