
Tripura त्रिपुरा: त्रिपुरा के खोवाई जिले में इंसान और हाथियों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग ने कई प्रभावी कदम उठाए हैं। अधिकारियों ने गुरुवार को जानकारी दी कि जिले के संवेदनशील इलाकों में हाथी-प्रूफ ट्रेंच (EPT) और सोलर फेंसिंग जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं स्थापित की गई हैं, जिनसे सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।
जिला वन अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि कमजोर और संवेदनशील बस्तियों के आसपास बनाए गए हाथी-प्रूफ ट्रेंच ने जंगली हाथियों के आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश को रोकने में काफी मदद की है। उन्होंने कहा कि इन उपायों के लागू होने के बाद हाथियों के गांवों में घुसने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है।
उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “हाथियों के आने-जाने के मार्गों के आसपास ट्रेंच बनाए जाने के बाद आसपास के गांवों में हाथियों के प्रवेश की घटनाएं काफी कम हो गई हैं।”
वन विभाग के अनुसार, इन उपायों का सबसे ज्यादा असर भूमिहीन कॉलोनी और चकमाघाट जैसे इलाकों में देखा गया है, जहां पहले हाथियों के नियमित रूप से आने से स्थानीय लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल बना रहता था।
अधिकारियों का कहना है कि हाथी-प्रूफ ट्रेंच और सोलर फेंसिंग न केवल मानव बस्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं, बल्कि वन्यजीवों को भी उनके प्राकृतिक आवास में बनाए रखने में मदद कर रहे हैं। इससे मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव की घटनाओं को नियंत्रित करने में सहायता मिल रही है।
वन विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले समय में और अधिक संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां भी इसी तरह के सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे, ताकि संघर्ष की स्थिति को पूरी तरह से कम किया जा सके।
स्थानीय लोगों ने भी इन प्रयासों का स्वागत किया है और कहा है कि इन उपायों के लागू होने के बाद अब रात के समय हाथियों के गांव में आने की घटनाएं काफी हद तक कम हो गई हैं।
कुल मिलाकर, खोवाई जिले में अपनाई गई यह पहल मानव-हाथी संघर्ष को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।





