तेलंगाना

Telangana: विजया रेड्डी की चुनावी याचिका से कांग्रेस को मदद मिलने की संभावना है

Tulsi Rao
2 Oct 2026 3:36 PM IST
Telangana: विजया रेड्डी की चुनावी याचिका से कांग्रेस को मदद मिलने की संभावना है
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हैदराबाद: अगर तेलंगाना हाई कोर्ट में कांग्रेस नेता पी. विजया रेड्डी की बात मानी जाती है, तो वह खैरताबाद विधानसभा क्षेत्र की विधायक बन सकती हैं। मौजूदा विधायक दानम नागेंद्र के अयोग्य घोषित होने के बाद यह सीट खाली हो गई थी।

खैरताबाद विधानसभा सीट को लेकर उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। हाई कोर्ट ने गुरुवार को विजया रेड्डी द्वारा दायर लगभग तीन साल पुराने मामले पर सुनवाई शुरू की। रेड्डी ने आरोप लगाया था कि नागेंद्र ने चुनावी हलफनामे में अपनी पारिवारिक संपत्ति के बारे में अहम जानकारी छिपाई थी।

ऐसे कई उदाहरण हैं, जिनमें तेलंगाना का मामला भी शामिल है, जहां अदालतों ने चुने हुए विधायक द्वारा जानकारी छिपाने पर उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी को विधायक घोषित कर दिया था। विजया रेड्डी के विधायक बनने की संभावनाओं पर बात करते हुए कांग्रेस के एक मंत्री ने कहा, "यह हमारे लिए बिना किसी खून-खराबे के जीती जाने वाली लड़ाई होगी।"

मंत्री ने कहा कि यह सभी के लिए फायदे की स्थिति होगी क्योंकि वे उस चुनाव पर करोड़ों रुपये खर्च करने से बच सकते हैं जिसे जीतने का उन्हें भरोसा नहीं है, और अगर वे जीत भी जाते हैं तो उन्हें केवल दो साल का कार्यकाल ही मिलेगा। हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि चुनाव होने की स्थिति में भी सत्ताधारी पार्टी ही जीतेगी।

हाई कोर्ट ने 25 जुलाई, 2023 को हलफनामे में जानकारी छिपाने के ऐसे ही आरोपों के कारण कोठागुडेम के तत्कालीन विधायक वनमा वेंकटेश्वर राव का चुनाव अमान्य घोषित कर दिया था। अदालत ने उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी और याचिकाकर्ता जलगाम वेंकट राव को विधायक घोषित किया था। हालांकि, जलगाम की किस्मत खराब रही क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी और कुछ ही महीनों के भीतर विधानसभा चुनाव की घोषणा हो गई।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, "इसमें कई 'अगर-मगर' हैं, लेकिन विजया रेड्डी के विधायक बनने की संभावना है।" दिलचस्प बात यह है कि ECI ने हाई कोर्ट को मौखिक रूप से आश्वासन दिया था कि जब तक हाई कोर्ट विजया रेड्डी की याचिका का निपटारा नहीं कर देता, तब तक वह चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं करेगा। हाई कोर्ट ने ECI से कहा कि वह यह आश्वासन हलफनामे के जरिए दे।

विजया रेड्डी के लिए पहली चुनौती हाई कोर्ट में अपने आरोपों को साबित करना होगा, और वह भी जल्द से जल्द। एक सीनियर वकील ने बताया, “पुराने मामलों से पता चलता है कि उन्हें अंतिम नतीजे तक पहुँचने में कई साल लग गए। हाई कोर्ट को जलगाम की याचिका पर फ़ैसला करने में पाँच साल लगे। इस मामले में भी, विजया रेड्डी ने लगभग तीन साल पहले याचिका दायर की थी।”

कानूनी जानकारों के मुताबिक, अगर हाई कोर्ट का फ़ैसला विजया रेड्डी के पक्ष में आता है, तो नागेंद्र के उस फ़ैसले को चुनौती देने की संभावना बहुत कम है, क्योंकि हाई कोर्ट ने उन्हें पहले ही अयोग्य ठहरा दिया था और सुप्रीम कोर्ट ने भी उस अयोग्यता को सही ठहराया था।

वकील ने कहा, “भले ही कोई ECI द्वारा चुनाव की अधिसूचना (नोटिफिकेशन) रोकने को चुनौती दे, लेकिन हाई कोर्ट में मामला लंबित रहने के दौरान ECI को चुनाव की अधिसूचना जारी करने का निर्देश देने के बजाय, विजया रेड्डी की चुनाव अधिसूचना पर फ़ैसला करने के लिए समय-सीमा तय करने की संभावना ज़्यादा है।”

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