तेलंगाना

तेलंगाना HC ने दानम नागेंद्र और बंदला कृष्ण मोहन रेड्डी से जवाब मांगा

Kavita2
26 Jun 2026 5:39 PM IST
तेलंगाना HC ने दानम नागेंद्र और बंदला कृष्ण मोहन रेड्डी से जवाब मांगा
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Telangana तेलंगाना: हाईकोर्ट ने गुरुवार को दानम नागेंद्र और बंदला कृष्ण मोहन रेड्डी को उन याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिनमें विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें BRS से कांग्रेस में शामिल हुए विधायकों के खिलाफ दलबदल (डिसक्वालिफिकेशन) की कार्यवाही को खारिज कर दिया गया था।

यह आदेश चीफ जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहिउद्दीन की डिवीजन बेंच ने उस याचिका समूह की सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट में यह मामला BRS के विधायकों द्वारा दायर रिट याचिकाओं के आधार पर चल रहा है, जिसमें विधानसभा स्पीकर गद्दाम प्रसाद कुमार के निर्णय पर सवाल उठाया गया है।

याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि स्पीकर ने यह कहते हुए दलबदल की अयोग्यता की कार्यवाही को खारिज कर दिया कि उपलब्ध सामग्री पर्याप्त नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि संबंधित दस विधायकों ने संविधान की दसवीं अनुसूची (Tenth Schedule) के तहत दलबदल किया है।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह मुद्दा प्रमुख रूप से उठा कि क्या विधानसभा अध्यक्ष का निर्णय कानूनी रूप से उचित था या फिर इसे न्यायिक समीक्षा के दायरे में लाया जा सकता है। इसी संदर्भ में अदालत ने संबंधित विधायकों से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है।

यह पूरा मामला तेलंगाना की राजनीतिक स्थिति से जुड़ा हुआ है, जहां BRS के कई विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के बाद से दलबदल को लेकर विवाद लगातार जारी है। विपक्षी दल का आरोप है कि यह स्पष्ट दलबदल का मामला है और संविधान के तहत कार्रवाई होनी चाहिए, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि यह निर्णय स्पीकर के अधिकार क्षेत्र में आता है।

हाईकोर्ट में चल रही इस सुनवाई को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसका असर राज्य की राजनीतिक स्थिति और विधायकों की सदस्यता पर भी पड़ सकता है। यदि अदालत स्पीकर के फैसले पर सवाल उठाती है, तो इससे आगे की कानूनी और राजनीतिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

BRS पक्ष का कहना है कि स्पीकर ने दलबदल के मामलों में उचित कार्रवाई नहीं की और तथ्यों की सही तरीके से जांच नहीं की गई। वहीं, जिन विधायकों पर आरोप है, उनका तर्क है कि उन्होंने किसी तरह का दलबदल नहीं किया है और उनके खिलाफ की गई कार्यवाही राजनीतिक रूप से प्रेरित है।

कोर्ट ने फिलहाल सभी संबंधित पक्षों को अपना पक्ष स्पष्ट करने का अवसर दिया है और अगली सुनवाई में विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

इस मामले पर अब सभी की नजरें हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय हो सकता है कि स्पीकर का फैसला बरकरार रहेगा या उसमें न्यायिक हस्तक्षेप किया जाएगा।

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