तेलंगाना
कांग्रेस सरकार से जनता नाराज, BRS नेता दासोजू श्रवण का बड़ा दावा
Ratna Netam
1 Nov 2026 8:49 PM IST

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हैदराबाद। तेलंगाना की राजनीति में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भारत राष्ट्र समिति (BRS) के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। बीआरएस के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य दासोजू श्रवण कुमार ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया है कि राज्य की जनता सरकार की नीतियों और कामकाज से असंतुष्ट है। उन्होंने कहा कि इसी असंतोष के कारण विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता अब बीआरएस की ओर देख रहे हैं। श्रवण के मुताबिक, कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों के बीच नाराजगी बढ़ रही है और इसका असर राज्य की राजनीतिक गतिविधियों पर भी दिखाई देने लगा है।दासोजू श्रवण का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब तेलंगाना में राजनीतिक दलों के बीच संगठनात्मक गतिविधियां और आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं। बीआरएस लगातार कांग्रेस सरकार पर चुनावी वादों को पूरा नहीं करने, किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने और विकास परियोजनाओं की प्राथमिकताओं को लेकर सवाल उठा रही है। दूसरी ओर, कांग्रेस सरकार राज्य में विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने की बात करती रही है।
बीआरएस नेता ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के प्रति असंतोष केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न दलों से जुड़े राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं में भी दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार, कई नेता बीआरएस की राजनीतिक भूमिका और भविष्य की रणनीति में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। हालांकि, इस दावे के संबंध में श्रवण की ओर से किन-किन नेताओं के नाम सामने रखे गए हैं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।तेलंगाना में दिसंबर 2023 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस सत्ता में आई थी। इससे पहले राज्य में के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाली बीआरएस सरकार थी। सत्ता परिवर्तन के बाद से दोनों दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार बनी हुई है। बीआरएस कांग्रेस सरकार की नीतियों को लेकर विपक्ष की भूमिका निभा रही है, जबकि कांग्रेस अपने शासन के दौरान किए गए कार्यों और योजनाओं को जनता के सामने रख रही है।
बीआरएस नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से कई बड़े वादे किए थे, लेकिन उन्हें लागू करने की गति और तरीके को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पार्टी विशेष रूप से किसानों, महिलाओं, युवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से जुड़ी योजनाओं को लेकर सरकार की आलोचना करती रही है।दासोजू श्रवण ने हाल के दिनों में किसानों की समस्याओं और राज्य में सूखे की स्थिति को लेकर भी कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को कृषि संकट, सिंचाई और पेयजल जैसी जरूरतों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। बीआरएस ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत नीति, किसानों को आर्थिक सहायता और पेयजल प्रबंधन की स्पष्ट योजना बनाने की मांग की है।बीआरएस नेता ने मूसी नदी के विकास से जुड़ी परियोजना को लेकर भी सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब किसान सिंचाई और आर्थिक संकट जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तब सरकार को बड़ी विकास परियोजनाओं के साथ तत्काल जनसमस्याओं के समाधान पर भी ध्यान देना चाहिए।
मूसी रिवरफ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को लेकर बीआरएस ने परियोजना की प्रस्तावित लागत और वित्तीय व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। श्रवण ने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकताओं में असंतुलन है। हालांकि, परियोजना से संबंधित भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। इनकी पुष्टि के लिए आधिकारिक जांच और दस्तावेजी साक्ष्य आवश्यक हैं।इधर, तेलंगाना के आदिलाबाद जिले में भी बीआरएस की राजनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं। पूर्व मंत्री जोगू रामन्ना ने 31 अक्टूबर को कांग्रेस और भाजपा से जुड़े कुछ स्थानीय नेताओं का बीआरएस में स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार की नीतियों से असंतुष्ट होकर विभिन्न दलों के नेता बीआरएस में शामिल हो रहे हैं।रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस से जुड़े पूर्व वाइस एमपीपी बेनवार गंगारेड्डी और भाजपा से जुड़े कुछ स्थानीय नेताओं ने बीआरएस का दामन थामा। पार्टी ने इन घटनाक्रमों को संगठन के विस्तार से जोड़कर प्रस्तुत किया है। हालांकि, कुछ नेताओं के दल बदलने को पूरे राज्य में जनता की राजनीतिक पसंद में बदलाव का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
बीआरएस ने 1 नवंबर को आदिलाबाद में 'रैतु गर्जना' नाम से जनसभा आयोजित करने की भी तैयारी की। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना और राज्य सरकार की कृषि नीतियों पर सवाल खड़े करना बताया गया। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव सहित वरिष्ठ नेताओं के कार्यक्रम को संबोधित करने की घोषणा की गई थी।बीआरएस विधायक केपी विवेकानंद ने भी कांग्रेस सरकार के फैसलों की आलोचना करते हुए दावा किया कि जनता समस्याओं का सामना कर रही है और कांग्रेस के कुछ नेता तथा कार्यकर्ता बीआरएस से जुड़ रहे हैं। विपक्षी नेताओं के इन बयानों से स्पष्ट है कि पार्टी संगठनात्मक विस्तार के साथ किसानों और शासन से जुड़े मुद्दों को अपनी राजनीतिक गतिविधियों के केंद्र में रख रही है।दूसरी ओर, कांग्रेस सरकार के सामने अपनी योजनाओं के क्रियान्वयन, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के परिणाम जनता तक पहुंचाने की चुनौती है। किसी भी सरकार के प्रदर्शन का आकलन केवल राजनीतिक बयानों के आधार पर नहीं, बल्कि योजनाओं के वास्तविक लाभ, वित्तीय आंकड़ों, प्रशासनिक निर्णयों और जनता की प्रतिक्रिया के आधार पर किया जाना चाहिए।
तेलंगाना में राजनीतिक दलों के बीच जारी यह बयानबाजी आने वाले समय में और तेज हो सकती है। बीआरएस जहां कांग्रेस सरकार की नीतियों पर सवाल उठाकर अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस अपने शासन की उपलब्धियों और विकास योजनाओं को सामने रख रही है।फिलहाल दासोजू श्रवण का यह दावा कि कांग्रेस सरकार से असंतोष के कारण राजनीतिक नेता बीआरएस की ओर देख रहे हैं, राज्य की राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में नेताओं के दल बदलने, राजनीतिक कार्यक्रमों और सरकार की नीतियों पर होने वाली बहस से तेलंगाना की राजनीति में नए घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।
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