तेलंगाना
हैदराबाद में एग डोनेशन रैकेट का खुलासा, 43 महिलाएं रेस्क्यू, 8 आरोपी गिरफ्तार
Rajeshwari Nishad
1 Nov 2026 5:54 PM IST

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हैदराबाद: तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एग डोनेशन के नाम पर कथित तौर पर चलाए जा रहे अंतरराज्यीय रैकेट का पुलिस ने खुलासा किया है। इस मामले में पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर 43 महिलाओं को रेस्क्यू किया है, जबकि 8 संदिग्ध आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। शुरुआती जांच में महिलाओं को आर्थिक लालच देकर एग डोनेशन के लिए तैयार करने, उन्हें हार्मोनल इंजेक्शन देने और कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने जैसी गंभीर बातें सामने आई हैं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के पीछे सक्रिय लोगों और इसके संभावित मेडिकल कनेक्शन की जांच कर रही है।
जानकारी के मुताबिक, पुलिस को एग डोनेशन की आड़ में महिलाओं के कथित शोषण और अवैध गतिविधियों की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान 43 महिलाओं को रेस्क्यू किया गया। वहीं, कथित रैकेट से जुड़े 8 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क का संचालन कौन कर रहा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी।
20 से 30 हजार रुपये देने का दिया जाता था लालच
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि महिलाओं को एग डोनेशन के प्रत्येक साइकल के बदले 20 हजार से 30 हजार रुपये तक देने का कथित लालच दिया जाता था। आर्थिक रूप से कमजोर या जरूरतमंद महिलाओं को निशाना बनाकर उन्हें इस प्रक्रिया के लिए तैयार किए जाने की आशंका है। पुलिस यह पता लगा रही है कि महिलाओं को किस माध्यम से संपर्क किया जाता था और उन्हें इस प्रक्रिया के संभावित जोखिमों की जानकारी दी जाती थी या नहीं।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि महिलाओं को दिए जाने वाले पैसों का भुगतान किस तरह किया जाता था। क्या इसके लिए बिचौलियों का इस्तेमाल होता था या फिर किसी संगठित नेटवर्क के माध्यम से महिलाओं को अलग-अलग स्थानों पर ले जाया जाता था। पुलिस हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ कर इस पूरे आर्थिक लेनदेन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
हार्मोनल इंजेक्शन देने के आरोपों की जांच
इस मामले में सबसे गंभीर पहलू महिलाओं को कथित तौर पर हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाने का है। एग डोनेशन की चिकित्सकीय प्रक्रिया में महिलाओं को अंडाणुओं के विकास के लिए विशेष दवाएं और हार्मोनल इंजेक्शन दिए जा सकते हैं। हालांकि, यह प्रक्रिया विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी और निर्धारित चिकित्सा मानकों के तहत की जानी चाहिए।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि रेस्क्यू की गई महिलाओं को किस तरह के इंजेक्शन दिए गए थे। उन्हें ये दवाएं किसने उपलब्ध कराईं और क्या किसी योग्य चिकित्सक की निगरानी में यह प्रक्रिया कराई जा रही थी। महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति और उन्हें दिए गए संभावित उपचार की भी जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, एग डोनेशन की प्रक्रिया में हार्मोनल दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में बिना उचित चिकित्सकीय जांच, निगरानी और सहमति के दवाओं का इस्तेमाल महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। हालांकि, इस मामले में किसी महिला को नुकसान पहुंचने की पुष्टि जांच और मेडिकल रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।
फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का भी संदेह
पुलिस को इस कथित रैकेट में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की आशंका भी है। जांच की जा रही है कि महिलाओं की पहचान, उम्र, मेडिकल हिस्ट्री और सहमति से संबंधित दस्तावेज वास्तविक थे या उनमें किसी तरह की हेराफेरी की गई थी। एग डोनेशन जैसी संवेदनशील चिकित्सकीय प्रक्रिया में डोनर की पहचान और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का सही होना बेहद जरूरी है।
यदि दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया गया है तो इसके पीछे शामिल लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी कागजात तैयार करने में कोई अलग गिरोह शामिल था या फिर कथित रैकेट के संचालक ही इस काम को अंजाम दे रहे थे।
IVF सेंटरों और ART बैंकों से कनेक्शन की पड़ताल
इस पूरे मामले में पुलिस की जांच का एक अहम हिस्सा आईवीएफ सेंटरों और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) बैंकों से संभावित कनेक्शन का पता लगाना है। जांच एजेंसियां यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि रेस्क्यू की गई महिलाओं को किन संस्थानों में भेजा जाता था और क्या इस कथित नेटवर्क का किसी आईवीएफ सेंटर या एआरटी बैंक से संपर्क था।
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि एग डोनेशन के लिए महिलाओं की व्यवस्था करने वाले बिचौलियों और चिकित्सा संस्थानों के बीच किसी तरह का आर्थिक लेनदेन हुआ था या नहीं। यदि किसी संस्थान की भूमिका सामने आती है तो उसके दस्तावेजों, मेडिकल रिकॉर्ड और संबंधित लोगों की गतिविधियों की जांच की जा सकती है।
हालांकि, अभी किसी आईवीएफ सेंटर या एआरटी बैंक की संलिप्तता आधिकारिक रूप से साबित नहीं हुई है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले किसी संस्थान को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
तीन मामले दर्ज, नेटवर्क की तलाश जारी
पुलिस ने इस पूरे प्रकरण में तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। हिरासत में लिए गए 8 लोगों से पूछताछ के जरिए कथित नेटवर्क के संचालन, महिलाओं की भर्ती, पैसों के लेनदेन और मेडिकल संस्थानों से संभावित संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस के सामने यह भी पता लगाने की चुनौती है कि क्या यह गतिविधि केवल हैदराबाद तक सीमित थी या दूसरे राज्यों में भी इसी तरह महिलाओं को एग डोनेशन के नाम पर जोड़ने का काम किया जा रहा था। अंतरराज्यीय कनेक्शन की आशंका को देखते हुए अन्य स्थानों पर भी संभावित संपर्कों की पड़ताल की जा रही है।
फिलहाल 43 महिलाओं को रेस्क्यू किए जाने और 8 आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद यह मामला महिला सुरक्षा और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस की विस्तृत जांच और मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही इस कथित रैकेट के पूरे नेटवर्क, उसकी कार्यप्रणाली और इसमें शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
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