
Hyderabad हैदराबाद : हैदराबाद में इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस (इस्कॉन) द्वारा एबिड्स स्थित राधा मदनमोहन मंदिर की स्वर्ण जयंती को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। यह मंदिर इस वर्ष अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे कर रहा है और इस अवसर पर 15 से 18 अगस्त तक चार दिवसीय भव्य समारोह आयोजित किए जाएंगे।
जानकारी के अनुसार, राधा मदनमोहन मंदिर की स्थापना वर्ष 1976 में नामपल्ली रेलवे स्टेशन रोड के पास एबिड्स क्षेत्र में की गई थी। इस मंदिर का उद्घाटन इस्कॉन के संस्थापक श्रील प्रभुपाद और उस समय के संयुक्त आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जलागम वेंगाला राव द्वारा किया गया था। यह ऐतिहासिक अवसर मंदिर के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है।
इस्कॉन प्रबंधन के सदस्य राघवेंद्र यादव ने बताया कि इस वर्ष मंदिर अपनी 50वीं वर्षगांठ मना रहा है, जिसके तहत विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।
मंदिर में स्थापित प्रमुख देवताओं में गौरा-नितई, जगन्नाथ, बलदेव, सुभद्रा और राधा मदनमोहन शामिल हैं। यहां प्रतिदिन नियमित पूजा-अर्चना, आरती और विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं, जिनमें सैकड़ों भक्त भाग लेते हैं।
इस्कॉन प्रबंधन के अनुसार, मंदिर में होने वाले दैनिक धार्मिक कार्यक्रमों को अत्यंत विधिवत और पारंपरिक तरीके से आयोजित किया जाता है। भक्तों के लिए भजन, कीर्तन और प्रसाद वितरण जैसी गतिविधियां भी नियमित रूप से की जाती हैं।
पिछले कुछ वर्षों में यह मंदिर हैदराबाद का एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बनकर उभरा है। न केवल स्थानीय श्रद्धालु बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक भी यहां दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर की आध्यात्मिक गतिविधियां और शांत वातावरण इसे एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल बनाते हैं।
स्वर्ण जयंती समारोह के दौरान विशेष पूजा, कीर्तन संध्या, प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर इस्कॉन के वरिष्ठ संतों और अन्य प्रमुख आध्यात्मिक हस्तियों के भी शामिल होने की संभावना है।
प्रबंधन ने बताया कि समारोह की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। सुरक्षा, प्रसाद वितरण और भीड़ प्रबंधन के लिए भी अलग-अलग टीमों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस्कॉन का यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि समाज में आध्यात्मिक मूल्यों और संस्कारों के प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। स्वर्ण जयंती समारोह के माध्यम से इस विरासत को और व्यापक स्तर पर मनाने की तैयारी की जा रही है।





