तेलंगाना
दिल्ली में कांग्रेस के प्रदर्शन पर सियासी घमासान के. लक्ष्मण ने मांगा जवाब
Ratna Netam
13 Oct 2026 5:58 PM IST

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हैदराबाद। तेलंगाना की कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी पर भारतीय जनता पार्टी ने निशाना साधा है। भाजपा के राज्यसभा सांसद के. लक्ष्मण ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में आयोजित विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शन में तेलंगाना कांग्रेस नेताओं की भागीदारी पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में किसान परेशान हैं और बिजली-पानी जैसी बुनियादी समस्याएं बनी हुई हैं, लेकिन मुख्यमंत्री और उनके मंत्री इन मुद्दों को प्राथमिकता देने के बजाय दिल्ली में राजनीतिक प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे हैं।के. लक्ष्मण ने कहा कि तेलंगाना की जनता ने कांग्रेस को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए चुना था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने में विफल रही है। भाजपा सांसद ने कांग्रेस नेतृत्व पर नेहरू-गांधी परिवार को राज्य के नागरिकों से अधिक महत्व देने का आरोप लगाया।
तेलंगाना सरकार पर के. लक्ष्मण का हमला
भाजपा सांसद ने कहा कि मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के मंत्री तीन दिनों के लिए दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य के किसान समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तब सरकार का शीर्ष नेतृत्व दिल्ली में क्यों मौजूद हैलक्ष्मण ने आरोप लगाया कि तेलंगाना में बिजली और पानी से संबंधित समस्याएं बनी हुई हैं। इसके बावजूद सरकार इन विषयों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दे रही है।उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को पहले राज्य की जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए। हालांकि किसानों की स्थिति और बिजली-पानी संकट के बारे में उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
गांधी परिवार को प्राथमिकता देने का आरोप
के. लक्ष्मण ने कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री और मंत्री दिल्ली में नेहरू-गांधी परिवार के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार अपने राजनीतिक नेतृत्व को प्राथमिकता दे रही है, जबकि राज्य की जनता से जुड़े मुद्दे पीछे छूट रहे हैंलक्ष्मण ने भाजपा और कांग्रेस के काम करने के तरीके में अंतर होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का उद्देश्य देश के नागरिकों की सेवा करना है।ये बयान भाजपा सांसद की राजनीतिक आलोचना का हिस्सा हैं। कांग्रेस की ओर से प्रदर्शन में भाग लेने का कारण चुनावी प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाना बताया गया है।
12 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचे थे कांग्रेस नेता
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी, उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी. महेश कुमार गौड़ सहित कई नेता दिल्ली में आयोजित विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे।इस कार्यक्रम में राज्य सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक और विधान परिषद सदस्य भी शामिल हुए। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर तेलंगाना कांग्रेस नेताओं को दिल्ली में आयोजित प्रदर्शन में भाग लेने के लिए कहा गया था।
SIR के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन
दिल्ली में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के नेताओं ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विरोध-प्रदर्शन किया।विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं ने दिल्ली में मार्च निकाला।विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। वहीं, चुनाव आयोग और भाजपा इन आरोपों को खारिज कर चुके हैं।
चुनावी वादों को लेकर भी सरकार को घेरा
के. लक्ष्मण ने तेलंगाना की कांग्रेस सरकार पर विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया।उन्होंने किसानों की समस्याओं, बिजली आपूर्ति और जल उपलब्धता का मुद्दा उठाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा।भाजपा सांसद के अनुसार, जनता से किए गए वादों को पूरा करना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री और मंत्रियों से इन विषयों पर ध्यान देने की मांग की।
कांग्रेस ने मतदाता अधिकारों को बताया अहम मुद्दा
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार पर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के नाम पर पात्र नागरिकों के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।कांग्रेस नेताओं ने इसी मुद्दे को लेकर दिल्ली में आयोजित प्रदर्शन में हिस्सा लिया। पार्टी ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता बताई है।तेलंगाना में अब भाजपा और कांग्रेस के बीच राज्य की प्रशासनिक प्राथमिकताओं तथा राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित राजनीतिक प्रदर्शनों को लेकर विवाद सामने आया है।
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