तेलंगाना

राहुल गांधी के खिलाफ तेलंगाना हाई कोर्ट में वकीलों का प्रदर्शन

Ratna Netam
13 Oct 2026 5:42 PM IST
राहुल गांधी के खिलाफ तेलंगाना हाई कोर्ट में वकीलों का प्रदर्शन
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हैदराबाद। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ तेलंगाना हाई कोर्ट के वकीलों ने विरोध प्रदर्शन किया। वकीलों ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च के दौरान न्यायपालिका के प्रति अपमानजनक रवैया अपनाया। प्रदर्शन में तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव भी शामिल हुए। उन्होंने कांग्रेस नेता पर न्यायिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित करने का आरोप लगाया।13 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना हाई कोर्ट के बार काउंसिल गेट पर अधिवक्ताओं ने राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान को बनाए रखने की मांग की। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राजनीतिक असहमति को न्यायपालिका पर दबाव बनाने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
राहुल गांधी के खिलाफ वकीलों ने जताई नाराजगी
प्रदर्शन में शामिल अधिवक्ताओं ने दिल्ली में राहुल गांधी के नेतृत्व में निकाले गए मार्च और उससे जुड़े घटनाक्रम पर आपत्ति जताई। उनका आरोप था कि विपक्षी नेताओं की गतिविधियों से न्यायपालिका के प्रति अनादर का संदेश गया है।वकीलों ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायपालिका का स्वतंत्र रहना आवश्यक है। राजनीतिक दलों को संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए।हालांकि राहुल गांधी द्वारा कथित तौर पर की गई अपमानजनक टिप्पणी के सटीक शब्दों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए प्रदर्शनकारियों के आरोपों को उनकी राजनीतिक और सार्वजनिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए।
तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष रामचंद्र राव ने साधा निशाना
तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस और राहुल गांधी की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट तक राजनीतिक रैली निकालना और न्यायपालिका के खिलाफ सार्वजनिक बयान देना न्यायिक प्रक्रियाओं में जनता के भरोसे को प्रभावित कर सकता है।रामचंद्र राव ने सवाल उठाया कि राजनीतिक मांगों को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपने का प्रयास कितना उचित है।उन्होंने कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल को कोई शिकायत है, तो उसका समाधान निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए।रामचंद्र राव ने यह भी कहा कि कोई राजनीतिक परिवार संविधान से ऊपर नहीं है और न्यायपालिका पर दबाव बनाने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।
12 अक्टूबर को दिल्ली में निकाला गया था मार्च
इस विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में सोमवार, 12 अक्टूबर को दिल्ली में इंडिया गठबंधन के नेताओं द्वारा निकाला गया मार्च है।राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेता और समर्थक बाराखंबा रोड क्षेत्र से सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़े थे। मार्च का उद्देश्य चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का विरोध करना था।दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था के कारण कई स्थानों पर पुलिस बैरिकेडिंग की गई थी। इस दौरान विपक्षी नेताओं और समर्थकों की आवाजाही पर प्रतिबंध भी लगाए गए।इसके बाद विपक्षी नेताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई।
11 विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की याचिका
राहुल गांधी समेत इंडिया गठबंधन के 11 नेताओं ने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया और उससे जुड़े निर्णयों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।याचिका में मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया की समीक्षा, चुनाव आयोग के रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और स्वतंत्र ऑडिट की व्यवस्था करने जैसी मांगें उठाई गई हैं।विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों पर चुनाव आयोग और भाजपा असहमति जता चुके हैं।सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में उठाए गए सवालों पर अंतिम न्यायिक निर्णय आना बाकी है।
न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर राजनीतिक विवाद
तेलंगाना में हुए प्रदर्शन के बाद न्यायपालिका की स्वतंत्रता और राजनीतिक विरोध के तरीकों को लेकर बहस सामने आई है।भाजपा नेताओं का आरोप है कि विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन से न्यायिक संस्थाओं पर दबाव डालने का संदेश जाता है। दूसरी ओर, विपक्षी नेता अपने मार्च और याचिका को मतदाता अधिकारों की सुरक्षा तथा चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का प्रयास बता रहे हैं।लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध करना और न्यायालय में याचिका दाखिल करना संवैधानिक अधिकारों के अंतर्गत आते हैं। वहीं, अदालत में प्रस्तुत आरोपों और मांगों की वैधानिकता का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होता है।फिलहाल राहुल गांधी के खिलाफ तेलंगाना में हुए प्रदर्शन और SIR को लेकर विपक्ष की याचिका के कारण राजनीतिक विवाद जारी है।
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