तेलंगाना

NALSAR छात्र बार काउंसिल ने BCI आदेश की निंदा की, चेयरमैन से माफी की मांग

Kavita2
15 Aug 2026 3:35 PM IST
NALSAR छात्र बार काउंसिल ने BCI आदेश की निंदा की, चेयरमैन से माफी की मांग
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हैदराबाद। नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ की स्टूडेंट बार काउंसिल ने शनिवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के उस आदेश की कड़ी आलोचना की, जिसे बाद में वापस ले लिया गया था। इस आदेश में राज्य बार काउंसिलों को NALSAR के 2026 बैच के कानून स्नातकों को अधिवक्ता के रूप में नामांकन करने से रोकने का निर्देश दिया गया था।

NALSAR की चुनी हुई छात्र संस्था स्टूडेंट बार काउंसिल ने इस पूरे मामले को लेकर चिंता जताई और BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। छात्र संगठन ने कहा कि चेयरमैन की ओर से छात्रों और फैकल्टी को लेकर की गई कुछ टिप्पणियां आपत्तिजनक थीं और इससे विश्वविद्यालय समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं।

स्टूडेंट बार काउंसिल ने अपने बयान में कहा कि BCI का प्रारंभिक आदेश छात्रों के भविष्य को प्रभावित करने वाला था। कानून की पढ़ाई पूरी कर चुके छात्रों के लिए अधिवक्ता के रूप में नामांकन एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। ऐसे में नामांकन प्रक्रिया को रोकने वाला कोई भी फैसला छात्रों के करियर पर गंभीर असर डाल सकता है।

मामला तब सामने आया जब BCI की ओर से एक आदेश जारी किया गया, जिसमें राज्य बार काउंसिलों को NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने को कहा गया था। हालांकि, बाद में BCI ने इस आदेश को वापस ले लिया। आदेश वापस लिए जाने के बाद भी छात्रों ने इस मामले में अपनी आपत्ति दर्ज कराई और बयान जारी किया।

NALSAR स्टूडेंट बार काउंसिल ने कहा कि किसी भी संस्थान या उसके छात्रों के खिलाफ टिप्पणी करने से पहले तथ्यों की पूरी जांच की जानी चाहिए। छात्र संगठन ने आरोप लगाया कि BCI चेयरमैन की कुछ टिप्पणियां पूरे विश्वविद्यालय समुदाय की छवि को प्रभावित करने वाली थीं।

छात्रों ने विशेष रूप से उस टिप्पणी पर आपत्ति जताई जिसमें चेयरमैन ने कथित तौर पर कहा था कि "कुछ गिने-चुने टीचर..."। स्टूडेंट बार काउंसिल का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी शिक्षकों और छात्रों के प्रति अनुचित धारणा बनाने वाली है।

छात्र संगठन ने कहा कि NALSAR देश के प्रमुख कानून विश्वविद्यालयों में से एक है और यहां के छात्र व शिक्षक कानूनी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा और छात्रों के अधिकारों की रक्षा करना जरूरी है।

स्टूडेंट बार काउंसिल ने यह भी कहा कि किसी भी विवाद का समाधान संवाद और तथ्यों के आधार पर होना चाहिए। संस्थान, छात्रों और शिक्षकों की गरिमा को ध्यान में रखते हुए ही किसी भी प्रकार की कार्रवाई की जानी चाहिए।

इस पूरे मामले को लेकर कानून शिक्षा जगत में भी चर्चा शुरू हो गई है। कई लोगों का मानना है कि बार काउंसिल और कानून विश्वविद्यालयों के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए, ताकि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी तरह की अनिश्चितता पैदा न हो।

NALSAR के छात्रों ने कहा कि वे अपने अधिकारों और संस्थान की गरिमा की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखते रहेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में ऐसे मामलों से बचने के लिए संबंधित संस्थाएं अधिक सावधानी बरतेंगी।

वहीं, BCI की ओर से इस मामले में आगे कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल छात्रों की मांग है कि BCI चेयरमैन अपनी टिप्पणियों को लेकर स्पष्टीकरण दें और विश्वविद्यालय समुदाय से माफी मांगें।

कानून के छात्रों के लिए अधिवक्ता के रूप में नामांकन की प्रक्रिया उनके पेशेवर जीवन की शुरुआत का महत्वपूर्ण चरण होती है। इसलिए इस तरह के मामलों में संस्थानों के फैसलों का सीधा प्रभाव उनके भविष्य पर पड़ता है।

NALSAR स्टूडेंट बार काउंसिल के बयान के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि BCI इस विवाद को लेकर आगे क्या कदम उठाता है और क्या चेयरमैन की ओर से कोई प्रतिक्रिया या माफी जारी की जाती है।

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