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Hyderabad हैदराबाद : डॉ. के. संजय ने मक्का खरीद में हो रही देरी को लेकर अधिकारियों पर नाराज़गी जताई है। उन्होंने MARKFED के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों को लंबे समय से परेशानी झेलनी पड़ रही है, लेकिन समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कोरुटला क्षेत्र में मक्का खरीद केंद्र शुरू होने में लगातार देरी हो रही थी, जिससे किसान एक महीने से अधिक समय से इंतजार कर रहे थे। इस दौरान कई बार खरीद प्रक्रिया शुरू करने की तारीख तय की गई, लेकिन हर बार इसे टाल दिया गया। इससे किसानों में असंतोष बढ़ता गया और उन्होंने विरोध प्रदर्शन भी किया।
स्थिति को देखते हुए डॉ. के. संजय ने सीधे हस्तक्षेप किया और खुद एक खरीद केंद्र का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि किसानों को बार-बार इंतजार कराना सही नहीं है और इससे उनकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों से जवाबदेही तय करने की भी मांग की।
किसानों का कहना है कि मक्का की फसल तैयार होने के बाद समय पर खरीद न होने से उन्हें भंडारण और कीमत दोनों के मामले में नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई किसानों ने बताया कि लगातार देरी के कारण उन्हें अपनी उपज खुले में रखने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिससे खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
डॉ. संजय ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोहराई गई, तो सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ तभी मिल सकता है जब उन्हें समय पर लागू किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि किसानों के मुद्दों को प्राथमिकता देना जरूरी है, क्योंकि कृषि क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए और प्रक्रिया को सरल बनाया जाए, ताकि किसानों को किसी तरह की दिक्कत न हो।
स्थानीय प्रशासन की ओर से कहा गया है कि खरीद प्रक्रिया को जल्द ही पूरी तरह से शुरू कर दिया जाएगा और देरी के कारणों की समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि आगे से इस तरह की समस्या नहीं आने दी जाएगी और किसानों की सुविधा का ध्यान रखा जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि फसल खरीद में देरी से किसानों की आय पर सीधा असर पड़ता है और इससे कृषि क्षेत्र में असंतोष बढ़ सकता है। ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई और बेहतर समन्वय जरूरी होता है, ताकि किसानों को नुकसान से बचाया जा सके।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर कृषि खरीद व्यवस्था की चुनौतियों को सामने ला दिया है। किसानों ने उम्मीद जताई है कि अब खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से चलेगी और उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा।
कुल मिलाकर, कोरुटला में मक्का खरीद में हुई देरी ने प्रशासन और किसानों के बीच तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। डॉ. के. संजय के हस्तक्षेप के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि स्थिति में सुधार आएगा और किसानों को राहत मिलेगी।
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