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New Delhi नई दिल्ली : द्रौपदी मुर्मू ने बढ़ते इकोलॉजिकल संकट से निपटने के लिए प्रकृति के साथ गहरे आध्यात्मिक जुड़ाव की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने यह बात राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘वृक्ष वेदम 2.0’ कार्यक्रम के दौरान कही, जहां पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण की रक्षा केवल नीतियों और योजनाओं से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए लोगों के मन में प्रकृति के प्रति भावनात्मक और आध्यात्मिक जुड़ाव होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्ति खुद को प्रकृति का हिस्सा नहीं मानता, तब तक पर्यावरण संरक्षण के प्रयास पूरी तरह सफल नहीं हो सकते।
उन्होंने इस अवसर पर ग्रीन इंडिया चैलेंज की सराहना की और बताया कि इस अभियान के तहत पिछले आठ वर्षों में लगभग 19.6 करोड़ पौधे लगाए गए हैं। उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि इस तरह के अभियान समाज में जागरूकता बढ़ाने और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
राष्ट्रपति ने नागरिकों से अपील की कि वे पर्यावरण बचाने की जिम्मेदारी को सामूहिक रूप से निभाएं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जैव विविधता में गिरावट जैसे मुद्दे पूरी दुनिया के लिए चुनौती बन चुके हैं और इनसे निपटने के लिए हर व्यक्ति का योगदान जरूरी है।
अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय संस्कृति और परंपराओं का भी उल्लेख किया, जहां प्रकृति को पूजा जाता है और पेड़ों, नदियों तथा पहाड़ों को विशेष महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इन परंपराओं को अपनाकर हम आधुनिक समय की पर्यावरणीय चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने भी भाग लिया और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। वृक्षारोपण के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति का यह संदेश समय के अनुरूप है, क्योंकि तेजी से बढ़ते औद्योगीकरण और शहरीकरण के कारण पर्यावरण पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में समाज के हर वर्ग को जागरूक करना और उन्हें संरक्षण के लिए प्रेरित करना जरूरी हो गया है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक जीवन में ऐसे कदम उठाएं, जिससे प्रकृति को कम से कम नुकसान पहुंचे, जैसे जल संरक्षण, प्लास्टिक का कम उपयोग और अधिक से अधिक पेड़ लगाना।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में इस तरह के कार्यक्रमों को और व्यापक स्तर पर आयोजित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ सकें। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव भी देखने को मिलेगा।
कुल मिलाकर, राष्ट्रपति मुर्मू का यह संदेश पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उनका यह जोर कि प्रकृति के साथ आध्यात्मिक जुड़ाव जरूरी है, लोगों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित करता है और एक बेहतर भविष्य की ओर संकेत करता है।
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