तेलंगाना
दक्षिण भारत में साइबर ठगी पर बड़ा एक्शन 101 आरोपी गिरफ्तार
Ratna Netam
7 Oct 2026 5:17 PM IST

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हैदराबाद। तेलंगाना साइबर सिक्योरिटी ब्यूरो (TGCSB) ने दक्षिण भारत के छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलाए गए बड़े संयुक्त साइबर क्राइम ऑपरेशन में 18 महिलाओं समेत 101 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दो सप्ताह तक चले इस अभियान में कथित साइबर वित्तीय अपराधों और म्यूल बैंक खातों के जरिए किए गए लगभग 17 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता लगाया गया है।
TGCSB के मुताबिक, यह विशेष अभियान 23 सितंबर को शुरू किया गया था। इसमें तेलंगाना के साथ केरल, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में एक साथ कार्रवाई की गई। जांच एजेंसियों का मुख्य फोकस ऐसे व्यक्तियों और नेटवर्क पर था, जिन पर साइबर ठगी से हासिल रकम को बैंक खातों के जरिए एक जगह से दूसरी जगह भेजने और निकालने में भूमिका निभाने का संदेह था।
अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन को प्रभावी तरीके से चलाने के लिए छह विशेष टीमें गठित की गई थीं। इन टीमों में कुल मिलाकर 100 से अधिक कर्मचारी शामिल थे। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय स्तर पर समन्वय स्थापित करते हुए संदिग्ध खातों, बैंक लेन-देन, मोबाइल नंबर और साइबर अपराध से जुड़े अन्य डिजिटल सुरागों की जांच की गई।
इस अभियान के दौरान गिरफ्तार किए गए 101 आरोपियों में 18 महिलाएं भी शामिल हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि गिरफ्तार लोगों की कथित भूमिका अलग-अलग स्तर पर सामने आई है। इनमें म्यूल बैंक खातों के उपयोग, खातों की उपलब्धता कराने, संदिग्ध रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने और साइबर अपराध से जुड़े नेटवर्क को सहायता देने जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है।
म्यूल बैंक अकाउंट साइबर अपराध के मामलों में बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। ऐसे मामलों में ठगी के पैसों को सीधे मुख्य आरोपियों के खातों में भेजने के बजाय दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता है। इन खातों के जरिए रकम को कई स्तरों पर ट्रांसफर किया जाता है, जिससे पैसे के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थी का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
TGCSB ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान करीब 17 करोड़ रुपये के संदिग्ध या कथित फर्जी लेन-देन की पहचान की गई। जांचकर्ता अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि इन खातों के जरिए कितना पैसा वास्तव में साइबर ठगी से आया, कितनी रकम आगे भेजी गई और इस नेटवर्क के पीछे कौन-कौन से लोग सक्रिय थे।
साइबर वित्तीय अपराधों में आमतौर पर फर्जी निवेश, ऑनलाइन ट्रेडिंग, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कस्टमर केयर, लोन, नौकरी, ई-कॉमर्स और अन्य ऑनलाइन धोखाधड़ी के जरिए लोगों से रकम ऐंठे जाने के मामले सामने आते हैं। ऐसे अपराधों में रकम को कई बैंक खातों में घुमाकर जांच एजेंसियों से बचने की कोशिश की जाती है। म्यूल खातों का इस्तेमाल इस पूरी व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है।
दो सप्ताह तक चले अभियान में अलग-अलग स्थानों पर जमीनी जांच भी की गई। विशेष टीमों ने संदिग्ध खाताधारकों और उनसे जुड़े लोगों की पहचान कर पूछताछ की। इसके अलावा यह भी पता लगाने की कोशिश की गई कि खाते जानबूझकर अपराधियों को दिए गए थे या खाताधारकों को किसी तरह लालच देकर अथवा धोखे में रखकर उनका इस्तेमाल किया गया।
TGCSB के मुताबिक, विभिन्न राज्यों के बीच बेहतर समन्वय इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। साइबर अपराधों की प्रकृति ऐसी होती है कि पीड़ित एक राज्य में हो सकता है, बैंक खाता दूसरे राज्य में और रकम निकालने वाला व्यक्ति तीसरे स्थान पर हो सकता है। इसलिए केवल एक राज्य की सीमा में जांच करने से पूरे नेटवर्क तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
इस संयुक्त अभियान में छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश की एजेंसियों के बीच जानकारी साझा की गई। साइबर शिकायतों, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध डिजिटल डेटा के आधार पर संदिग्धों तक पहुंचने की कोशिश की गई। कई मामलों में लेन-देन की कड़ियां एक राज्य से दूसरे राज्य तक जुड़ी मिलीं।
अधिकारियों का कहना है कि म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई साइबर अपराध रोकने के लिए बेहद जरूरी है। यदि अपराधियों को ठगी की रकम लेने और निकालने के लिए बैंक खाते उपलब्ध न हों तो उनके नेटवर्क को काफी हद तक बाधित किया जा सकता है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से कितने लोग सीधे साइबर ठगी में शामिल थे और कितने लोगों ने कमीशन या अन्य लाभ के बदले अपने बैंक खाते उपलब्ध कराए थे। इसके साथ ही इनसे जुड़े संभावित बड़े नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।
TGCSB ने लोगों से अपने बैंक खाते, सिम कार्ड, मोबाइल नंबर और डिजिटल भुगतान से जुड़ी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को उपलब्ध नहीं कराने की अपील की है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि कमीशन के लालच में बैंक खाता किसी दूसरे व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए देना गंभीर कानूनी परेशानी पैदा कर सकता है।
साइबर अपराधियों के खिलाफ यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब डिजिटल लेन-देन बढ़ने के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों के सामने अब चुनौती केवल ठगी करने वालों की पहचान करना नहीं, बल्कि उस पूरी वित्तीय श्रृंखला को तोड़ना भी है जिसके जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर किया जाता है।
दो सप्ताह तक चले TGCSB के इस संयुक्त अभियान में 101 गिरफ्तारियां और करीब 17 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता लगना साइबर अपराध नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल जांच आगे जारी है और अधिकारियों का फोकस गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े अन्य खातों, सहयोगियों और पूरे नेटवर्क की पहचान पर है।
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