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हैदराबाद। तेलंगाना में दलबदल के मुद्दे पर सियासी टकराव एक बार फिर तेज हो गया है। भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव (KTR) ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दानम नागेंद्र की अयोग्यता बरकरार रखे जाने के बाद कांग्रेस नेतृत्व पर हमला बोला। KTR ने इस फैसले को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के लिए “जबरदस्त तमाचा” बताया। यह KTR की राजनीतिक प्रतिक्रिया है। सुप्रीम कोर्ट ने नागेंद्र की अपील खारिज करते हुए तेलंगाना हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार किया है।KTR ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व ने दूसरे दलों के निर्वाचित विधायकों को अपने साथ लेकर जनादेश को कमजोर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने दलबदल विरोधी कानून के तहत नागेंद्र की अयोग्यता को बरकरार रखा है। KTR ने इसे कांग्रेस की तेलंगाना में अपनाई गई राजनीतिक रणनीति पर सवाल खड़ा करने वाला फैसला बताया।सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने गुरुवार को नागेंद्र की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि तेलंगाना हाई कोर्ट ने कानून की सही व्याख्या की है और उसके फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।
2023 में BRS से जीते थे नागेंद्र
दानम नागेंद्र ने 2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव में BRS उम्मीदवार के रूप में खैरताबाद विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी। इसके बाद मार्च 2024 में वह कांग्रेस में शामिल हो गए। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में सिकंदराबाद संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुनाव भी लड़ा, लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली।इसी राजनीतिक घटनाक्रम को आधार बनाकर BRS विधायक पाडी कौशिक रेड्डी और भाजपा विधायक दल के नेता एलेटी महेश्वर रेड्डी ने नागेंद्र की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। मामला तेलंगाना विधानसभा अध्यक्ष तक पहुंचा था, जहां अयोग्यता की मांग खारिज कर दी गई। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट का रुख किया।तेलंगाना हाई कोर्ट की खंडपीठ ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को पलटते हुए नागेंद्र को संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित कर दिया। हाई कोर्ट ने खैरताबाद विधानसभा सीट को भी खाली घोषित किया था।
सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत
हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ नागेंद्र सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी। सुनवाई के दौरान यह सवाल प्रमुख रहा कि कांग्रेस में जाने के बाद नागेंद्र की BRS में वापसी की कोशिश क्या पहले हो चुके दलबदल के कानूनी प्रभाव को समाप्त कर सकती है।सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने हाई कोर्ट के कानूनी निष्कर्ष में दखल देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने पार्टी बदलने और फिर वापस लौटने की स्थिति का उल्लेख करते हुए मौखिक टिप्पणी की—“आया राम, गया राम, फिर आया राम?अदालत की मौखिक टिप्पणियां अंतिम आदेश का विकल्प नहीं होतीं, लेकिन मामले में शीर्ष अदालत का निष्कर्ष स्पष्ट रहा कि हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप का आधार नहीं बनता।
KTR ने कांग्रेस नेतृत्व पर लगाए आरोप
सुप्रीम कोर्ट का फैसला सामने आने के बाद KTR ने राहुल गांधी और रेवंत रेड्डी को निशाने पर लिया। उन्होंने कांग्रेस पर BRS के टिकट पर निर्वाचित विधायकों को अपने पक्ष में करने का आरोप लगाया। ये आरोप BRS और KTR के राजनीतिक दावे हैं।KTR इससे पहले हाई कोर्ट का फैसला आने पर भी नागेंद्र की अयोग्यता का स्वागत कर चुके थे। उन्होंने कांग्रेस सरकार से BRS छोड़ने वाले अन्य विधायकों को भी इस्तीफा दिलाकर चुनाव का सामना कराने की मांग की थी।BRS का कहना है कि मतदाताओं ने जिन उम्मीदवारों को पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनकर विधानसभा भेजा, उनका बाद में दूसरे दल में जाना मतदाताओं के जनादेश के खिलाफ है। दूसरी ओर दलबदल से जुड़े प्रत्येक विधायक का मामला उसके तथ्यों और लंबित कानूनी या विधायी प्रक्रिया के आधार पर तय होगा।
दलबदल कानून पर केंद्रित रहा मामला
भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची दलबदल के आधार पर सांसदों और विधायकों की अयोग्यता से संबंधित है। नागेंद्र के मामले में महत्वपूर्ण तथ्य यह था कि वह BRS के टिकट पर विधायक चुने जाने के बाद कांग्रेस में गए और कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव भी लड़ा। हाई कोर्ट ने इसी घटनाक्रम को दलबदल के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना था।सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खैरताबाद विधानसभा सीट को खाली घोषित करने वाला हाई कोर्ट का आदेश बरकरार है। नागेंद्र ने फैसले के बाद कहा कि वह अदालत के आदेश का स्वागत करते हैं और उपचुनाव होने पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे।
तेलंगाना में बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
इस फैसले के बाद तेलंगाना में BRS और कांग्रेस के बीच दलबदल को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। BRS इसे अपने लंबे समय से उठाए जा रहे दलबदल के मुद्दे से जोड़ रही है, जबकि नागेंद्र ने कानूनी फैसला स्वीकार करते हुए दोबारा चुनाव लड़ने की बात कही है।KTR ने अपने बयान में राहुल गांधी और रेवंत रेड्डी पर राजनीतिक हमला करते हुए नागेंद्र मामले को कांग्रेस की रणनीति से जोड़ा है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला नागेंद्र की अयोग्यता से संबंधित कानूनी विवाद पर है; KTR द्वारा कांग्रेस नेतृत्व के बारे में की गई टिप्पणियां उनकी राजनीतिक व्याख्या और आरोप हैं।फिलहाल शीर्ष अदालत से नागेंद्र को राहत नहीं मिलने के बाद खैरताबाद सीट खाली रहने का हाई कोर्ट का आदेश प्रभावी है। अब इस मामले का राजनीतिक फोकस संभावित उपचुनाव और तेलंगाना में दलबदल से जुड़े अन्य लंबित मामलों की ओर बढ़ गया है।
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