
x
Hyderabad हैदराबाद: हैदराबाद यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज़ की पीएचडी शोधार्थी पूजा शुक्ला को वर्ष 2026–2027 के लिए प्रतिष्ठित फुलब्राइट-नेहरू डॉक्टोरल रिसर्च फ़ेलोशिप से सम्मानित किया गया है। यह फेलोशिप भारत और अमेरिका के बीच शैक्षणिक और शोध सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दी जाती है।
पूजा शुक्ला वर्तमान में प्लांट साइंसेज़ विभाग में अपनी डॉक्टोरल रिसर्च कर रही हैं। वह मिलेट लैब में काम कर रही हैं, जहां उनके शोध कार्य का मार्गदर्शन डॉ. एम. मुथमिलारसन कर रहे हैं। उनके निर्देशन में पूजा का शोध कार्य कृषि विज्ञान के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र पर केंद्रित है।
उनकी रिसर्च का मुख्य विषय फॉक्सटेल मिलेट, जिसे वैज्ञानिक रूप से Setaria italica कहा जाता है, की पैदावार को प्रभावित करने वाले कृषि गुणों के जेनेटिक आधार को समझना है। यह फसल जलवायु परिवर्तन के दौर में महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसमें कम पानी में भी अच्छी उपज देने की क्षमता होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मिलेट्स को क्लाइमेट-रेज़िलिएंट फसलों के रूप में देखा जाता है, जो बदलते मौसम और सीमित संसाधनों के बीच भी खेती के लिए उपयुक्त होती हैं। इसके अलावा, पोषण के लिहाज से भी ये फसलें महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, क्योंकि इनमें आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं।
फुलब्राइट-नेहरू फेलोशिप के तहत पूजा शुक्ला को अपने शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। इस कार्यक्रम के अंतर्गत वह अमेरिका के किसी प्रमुख संस्थान में जाकर अपने शोध कार्य को विस्तारित कर सकेंगी और नए संसाधनों व तकनीकों का उपयोग कर सकेंगी।
यह फेलोशिप चयन प्रक्रिया के आधार पर दी जाती है, जिसमें उम्मीदवार की शैक्षणिक उपलब्धियां, शोध की गुणवत्ता और उसके संभावित प्रभाव को ध्यान में रखा जाता है। पूजा का चयन इस बात का संकेत है कि उनका शोध कार्य महत्वपूर्ण और प्रभावशाली माना गया है।
हैदराबाद यूनिवर्सिटी के शिक्षकों और शोधार्थियों ने इस उपलब्धि पर खुशी जताई है। संस्थान का कहना है कि यह उपलब्धि न केवल पूजा शुक्ला के लिए बल्कि विश्वविद्यालय के लिए भी गौरव का विषय है।
कृषि और वैज्ञानिक समुदाय के अनुसार, इस तरह के शोध कार्य भविष्य में खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ खेती के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। खासकर ऐसे समय में जब जलवायु परिवर्तन कृषि क्षेत्र के लिए चुनौती बना हुआ है, मिलेट्स पर आधारित शोध को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फेलोशिप के जरिए मिलने वाले अंतरराष्ट्रीय अनुभव से शोधार्थियों को अपने काम को बेहतर बनाने और वैश्विक स्तर पर योगदान देने का अवसर मिलता है। इससे भारत और अन्य देशों के बीच ज्ञान और तकनीक का आदान-प्रदान भी बढ़ता है।
कुल मिलाकर, पूजा शुक्ला को मिली यह फेलोशिप उनके शोध कार्य की गुणवत्ता को दर्शाती है और यह आने वाले समय में कृषि और विज्ञान के क्षेत्र में नए आयाम जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
Tagsपूजा शुक्लाहैदराबाद यूनिवर्सिटीफुलब्राइट नेहरू फेलोशिपप्लांट साइंसेज़फॉक्सटेल मिलेटसेटेरिया इटालिकाPuja ShuklaUniversity of HyderabadFulbright Nehru FellowshipPlant SciencesFoxtail MilletSetaria italicaजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताजनता से रिश्ता.कॉमआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperजनताjantasamachar newssamacharहिंन्दी समाचार
Next Story





