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Hyderabad हैदराबाद : तेलंगाना के मुख्यमंत्री A. Revanth Reddy ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित डिलिमिटेशन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि वह इस प्रस्ताव के खिलाफ दक्षिणी और छोटे राज्यों से समर्थन जुटाने की पूरी कोशिश करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित डिलिमिटेशन के तहत सभी राज्यों में प्रो-राटा आधार पर लोकसभा सीटों में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की योजना है, जो क्षेत्रीय संतुलन पर असर डाल सकती है। इसी कारण कई दक्षिणी राज्यों में इस मुद्दे को लेकर चिंता जताई जा रही है।
रेवंत रेड्डी ने कहा कि लोकसभा सीटों के पुनर्गठन का यह प्रस्ताव राज्यों की जनसंख्या और प्रतिनिधित्व के संतुलन को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि इस मुद्दे पर एक संयुक्त मोर्चा बनाने की आवश्यकता है, जिसमें दक्षिण भारत और छोटे राज्यों की एकजुटता हो।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वे इस विषय को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएंगे और संबंधित राज्यों के नेताओं से बातचीत कर साझा रणनीति बनाने की कोशिश करेंगे। उनका मानना है कि किसी भी पुनर्गठन प्रक्रिया में सभी राज्यों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने महिलाओं के लिए प्रस्तावित 33 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इस आरक्षण के भीतर पिछड़े वर्ग (OBC) समुदायों के लिए एक अलग कोटा भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि सामाजिक न्याय को और मजबूत किया जा सके।
रेवंत रेड्डी का कहना है कि आरक्षण नीति तभी प्रभावी होगी जब इसमें सभी वंचित वर्गों का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने इस मुद्दे को सामाजिक संतुलन और समान अवसर से जोड़कर देखा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डिलिमिटेशन और आरक्षण जैसे मुद्दे आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं। विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों में इस पर चर्चा तेज हो गई है।
कई क्षेत्रीय नेताओं ने भी इस प्रस्ताव पर चिंता जताई है और कहा है कि जनसंख्या आधारित बदलाव से कुछ राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। इस वजह से राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल, यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर केंद्र और राज्यों के बीच बातचीत और तेज हो सकती है।
कुल मिलाकर, डिलिमिटेशन प्रस्ताव और आरक्षण नीति को लेकर मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का बयान दक्षिण भारत की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दे रहा है।
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