तेलंगाना

Hyderabad में मानसून से पहले ड्रेनेज सफाई अभियान तेज, 217 किमी क्षेत्र में काम जारी

Harrison
13 April 2026 9:35 PM IST
Hyderabad में मानसून से पहले ड्रेनेज सफाई अभियान तेज, 217 किमी क्षेत्र में काम जारी
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Hyderabad हैदराबाद : मानसून से पहले जलभराव की समस्या को रोकने के लिए साइबराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (CMC) ने बड़े स्तर पर ड्रेनेज डीसिल्टिंग अभियान को तेज कर दिया है। इस पहल का उद्देश्य शहर में बारिश के दौरान जल निकासी व्यवस्था को मजबूत बनाना और वॉटर-लॉगिंग की समस्या को कम करना है।
अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान के तहत 217 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में कुल 72 डीसिल्टिंग कार्य शुरू किए गए हैं। इन कार्यों में नालों और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई की जा रही है, ताकि बारिश के पानी का बहाव सुचारु रूप से हो सके।
इस अभियान में मैकेनिकल और मैनुअल दोनों तरीकों का उपयोग किया जा रहा है। मशीनों की मदद से बड़े नालों की सफाई की जा रही है, जबकि संकरे और कठिन क्षेत्रों में मैनुअल तरीके से गाद हटाने का काम किया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि अब तक इस काम का लगभग आधा हिस्सा पूरा कर लिया गया है। बाकी कार्यों को मानसून से पहले तेजी से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि बारिश के दौरान किसी भी तरह की समस्या से बचा जा सके।
सीएमसी अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारी बारिश के दौरान कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार पहले से ही व्यापक तैयारी की जा रही है।
इस अभियान के तहत न केवल मुख्य नालों की सफाई की जा रही है, बल्कि छोटे ड्रेनेज सिस्टम और कॉलोनियों के अंदरूनी क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे पानी की निकासी में सुधार आने की उम्मीद है।
स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे कचरा नालों में न फेंकें और स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें। अधिकारियों का मानना है कि जनभागीदारी के बिना इस तरह के अभियान पूरी तरह सफल नहीं हो सकते।
विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित डीसिल्टिंग और ड्रेनेज रखरखाव से शहर में बाढ़ जैसी स्थिति को काफी हद तक रोका जा सकता है। इससे न केवल यातायात व्यवस्था बेहतर रहती है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी कमी आती है।
कुल मिलाकर, हैदराबाद में शुरू किया गया यह ड्रेनेज सफाई अभियान मानसून से पहले शहर की तैयारियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो जलभराव की समस्या को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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