तेलंगाना
तुम्मिडीहेट्टी बैराज परियोजना पर बड़ा फैसला सिंचाई को मिलेगी रफ्तार
Ratna Netam
23 Oct 2026 7:28 PM IST

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हैदराबाद। तेलंगाना सरकार ने किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तुम्मिडीहेट्टी बैराज परियोजना को आगे बढ़ाने की कवायद तेज कर दी है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को सिंचाई विभाग के अधिकारियों को महाराष्ट्र सरकार के साथ प्रस्तावित बैराज के निर्माण को लेकर बातचीत की तैयारी करने के निर्देश दिए। तेलंगाना सरकार चाहती है कि परियोजना का पूर्ण जलाशय स्तर 152 मीटर रखा जाए, जिससे अधिक पानी का उपयोग किया जा सके और अविभाजित आदिलाबाद जिले की लगभग दो लाख एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिल सके।
महाराष्ट्र सरकार से सहमति लेने की तैयारी
तेलंगाना मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 23 अक्टूबर के बाद इस परियोजना पर बातचीत करने की सहमति जताई है।इसके बाद मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को सभी तकनीकी रिपोर्ट और आवश्यक दस्तावेज तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार के सामने ऐसा ठोस प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाना चाहिए, जिससे 152 मीटर के प्रस्तावित पूर्ण जलाशय स्तर पर सहमति प्राप्त की जा सके।उन्होंने अधिकारियों को पानी की उपलब्धता, जलभराव से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों और परियोजना के संभावित लाभों का विस्तृत विवरण तैयार करने को कहा।
बोधि पैवेलियन में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बोधि पैवेलियन में सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।बैठक में उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्का, सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी, मंत्री जुपल्ली कृष्णा राव और दुडिला श्रीधर बाबू उपस्थित रहे।इसके अलावा राज्यसभा सदस्य वेम नरेंद्र रेड्डी और सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से परियोजना की वर्तमान स्थिति, तकनीकी चुनौतियों और विभिन्न सरकारी मंजूरियों से जुड़े मामलों की जानकारी ली।
दो लाख एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई का लक्ष्य
तेलंगाना सरकार का लक्ष्य तुम्मिडीहेट्टी बैराज के माध्यम से अविभाजित आदिलाबाद जिले में करीब दो लाख एकड़ कृषि भूमि तक सिंचाई का पानी पहुंचाना है।मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना से विशेष रूप से आदिवासी, वन क्षेत्रों में रहने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों को लाभ मिल सकता है।आदिलाबाद क्षेत्र के कई हिस्सों में कृषि कार्यों के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार आवश्यक माना जाता है।सरकार का मानना है कि परियोजना पूरी होने पर किसानों को अधिक भरोसेमंद जल आपूर्ति उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
152 मीटर जलस्तर पर क्यों जोर दे रही सरकार?
तुम्मिडीहेट्टी बैराज का प्रस्ताव प्राणहिता नदी से जुड़ा है। परियोजना की ऊंचाई और जलाशय स्तर को लेकर तेलंगाना तथा महाराष्ट्र के बीच पहले भी बातचीत हो चुकी है।महाराष्ट्र ने वर्ष 2016 में 148 मीटर के पूर्ण जलाशय स्तर वाले प्रस्ताव पर सहमति जताई थी। हालांकि, तेलंगाना सरकार का कहना है कि जलस्तर 150 से 152 मीटर रखने से अधिक पानी उपलब्ध कराया जा सकता है।राज्य सरकार के अनुसार, इस स्तर पर पानी को प्राकृतिक ढलान के सहारे येल्लमपल्ली परियोजना तक पहुंचाने की संभावना है। इससे पंपिंग पर खर्च होने वाली बिजली और परिचालन लागत कम हो सकती है।हालांकि, अधिक जलस्तर के कारण महाराष्ट्र में संभावित डूब क्षेत्र का आकलन भी महत्वपूर्ण है। इसीलिए दोनों राज्यों की सहमति आवश्यक है।
केंद्र सरकार से भी मांगा गया सहयोग
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने इससे पहले केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से मुलाकात करके परियोजना के लिए महाराष्ट्र से आवश्यक मंजूरी दिलाने में सहयोग मांगा था।29 सितंबर को हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया था कि तेलंगाना सरकार परियोजना से संबंधित तकनीकी जानकारी महाराष्ट्र को उपलब्ध करा चुकी है।उन्होंने केंद्र सरकार से दोनों राज्यों के बीच समझौते की प्रक्रिया तेज कराने का आग्रह किया था।
डिंडी और अचमपेट परियोजनाओं पर भी निर्देश
शुक्रवार की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने डिंडी और अचमपेट लिफ्ट सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा की।उन्होंने एडुला जलाशय से डिंडी परियोजना के लिए 0.5 टीएमसी और अचमपेट परियोजना के लिए 0.1 टीएमसी पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।इसके साथ ही श्रीशैलम और नारलापुर से एडुला जलाशय में अतिरिक्त 0.6 टीएमसी पानी पहुंचाने के वैकल्पिक उपाय तैयार करने को कहा।मुख्यमंत्री ने आवश्यक पंप हाउस, पंप और संबंधित बुनियादी ढांचे के निर्माण कार्य शुरू करने के भी निर्देश दिए।
किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना प्राथमिकता
तेलंगाना सरकार का कहना है कि राज्य में सिंचाई परियोजनाओं को गति देना कृषि विकास के लिए आवश्यक है।तुम्मिडीहेट्टी बैराज के मामले में अब महाराष्ट्र के साथ प्रस्तावित बातचीत महत्वपूर्ण होगी। दोनों राज्यों के बीच तकनीकी और प्रशासनिक मुद्दों पर सहमति बनने के बाद ही परियोजना के निर्माण की आगे की प्रक्रिया स्पष्ट हो सकेगी।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि परियोजना से संबंधित सभी रिपोर्ट तैयार रखी जाएं, ताकि बातचीत में किसानों की जरूरतों और राज्य के जल हितों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके।
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