तेलंगाना
तुम्मिडीहट्टी बैराज पर बड़ा फैसला, CM रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को दिए अहम निर्देश
Ratna Netam
3 Nov 2026 9:34 PM IST

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हैदराबाद : 3 नवंबर 2026। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने बहुप्रतीक्षित तुम्मिडीहट्टी बैराज परियोजना को लेकर अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को सिंचाई विभाग के अधिकारियों से कहा कि वे महाराष्ट्र सरकार के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें और परियोजना से जुड़े लंबित मुद्दों को बातचीत के माध्यम से सुलझाने का प्रयास करें। उन्होंने दोनों राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और तकनीकी स्तर पर सभी आवश्यक जानकारियों का आदान-प्रदान करने पर जोर दिया। इस परियोजना को तेलंगाना के आदिलाबाद क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हैदराबाद स्थित अपने जुबली हिल्स आवास पर सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा बैठक की। बैठक में सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान तुम्मिडीहट्टी बैराज के निर्माण, प्रस्तावित ऊंचाई, जल उपलब्धता और महाराष्ट्र में संभावित जलमग्न क्षेत्रों से संबंधित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र की चिंताओं को समझना और उनका समाधान करना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि परियोजना से संबंधित तकनीकी रिपोर्ट, पुराने समझौते और सर्वेक्षण के आंकड़े महाराष्ट्र सरकार के साथ साझा किए जाएं, ताकि दोनों राज्य किसी व्यावहारिक समाधान तक पहुंच सकें।तुम्मिडीहट्टी बैराज का निर्माण गोदावरी नदी की प्रमुख सहायक नदी प्राणहिता पर प्रस्तावित है। यह परियोजना तेलंगाना और महाराष्ट्र की सीमा के निकट स्थित है। इसके माध्यम से तेलंगाना के उत्तरी हिस्से में सिंचाई और जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने की योजना बनाई गई है। विशेष रूप से आदिलाबाद के आदिवासी बहुल और पिछड़े क्षेत्रों के किसानों को इससे लाभ मिलने की उम्मीद है।परियोजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती बैराज की ऊंचाई को लेकर दोनों राज्यों के बीच सहमति बनाना है। वर्ष 2016 में दोनों राज्यों के बीच हुए समझौते के तहत बैराज की ऊंचाई 148 मीटर निर्धारित की गई थी। हालांकि, तेलंगाना सरकार अब इसे बढ़ाकर 152 मीटर करने की अनुमति चाहती है।
राज्य सरकार का तर्क है कि 148 मीटर की ऊंचाई पर बैराज बनने से अपेक्षित मात्रा में पानी उपलब्ध नहीं हो पाएगा। दूसरी ओर, 152 मीटर की ऊंचाई से अधिक पानी का संग्रहण और उसे नहरों के माध्यम से दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचाना संभव हो सकता है। हालांकि, ऊंचाई बढ़ाने से महाराष्ट्र के कुछ कृषि क्षेत्रों के जलमग्न होने की आशंका भी है।मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजना के कारण महाराष्ट्र में प्रभावित होने वाली भूमि का विस्तृत आकलन किया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि महाराष्ट्र सरकार अपने स्तर पर स्वतंत्र सर्वेक्षण कराना चाहती है, तो तेलंगाना को इस पर कोई आपत्ति नहीं होगी।सरकार का मानना है कि दोनों राज्यों द्वारा तैयार किए गए तकनीकी आंकड़ों की तुलना से बैराज की ऊंचाई और संभावित प्रभावों को लेकर बेहतर निर्णय लिया जा सकेगा। इससे परियोजना से संबंधित विवादों को भी कम करने में मदद मिलेगी।इससे पहले 26 अक्टूबर को मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं के बीच तुम्मिडीहट्टी बैराज के निर्माण को लेकर विस्तृत चर्चा हुई थी। इस बैठक में महाराष्ट्र सरकार ने तेलंगाना के प्रस्ताव पर विचार करने के प्रति सकारात्मक रुख दिखाया था।
बैठक के दौरान दोनों राज्यों ने एक संयुक्त समिति गठित करने पर सहमति जताई थी। इस समिति का नेतृत्व दोनों राज्यों के सिंचाई विभागों के प्रमुख सचिवों द्वारा किया जाना प्रस्तावित है। समिति बैराज की ऊंचाई, पानी की उपलब्धता, संभावित जलमग्न क्षेत्र और तकनीकी व्यवहार्यता की समीक्षा करेगी।महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संकेत दिया था कि यदि परियोजना से महाराष्ट्र के लोगों और उनके हितों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है, तो राज्य सरकार तेलंगाना के प्रस्ताव का समर्थन करने पर विचार कर सकती है। हालांकि, इसके लिए विस्तृत तकनीकी और पर्यावरणीय अध्ययन जरूरी होगा।तेलंगाना सरकार का मुख्य उद्देश्य आदिलाबाद के किसानों को पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध कराना है। राज्य सरकार के अनुसार, परियोजना से अविभाजित आदिलाबाद जिले के लगभग दो लाख एकड़ कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है।मुख्यमंत्री का मानना है कि लंबे समय से सिंचाई सुविधाओं की कमी का सामना कर रहे आदिवासी क्षेत्रों में यह परियोजना कृषि विकास को नई दिशा दे सकती है। पर्याप्त पानी उपलब्ध होने से किसानों की वर्षा पर निर्भरता कम हो सकती है और फसल उत्पादन में सुधार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
सरकार का यह भी मानना है कि बैराज की उपयुक्त ऊंचाई तय होने से पानी को प्राकृतिक ढलान के माध्यम से आगे पहुंचाने की संभावनाएं बेहतर होंगी। इससे बड़े पैमाने पर पंपिंग की जरूरत और उससे जुड़ी बिजली की लागत कम करने में मदद मिल सकती है।तेलंगाना सरकार ने पहले अधिकारियों को निर्देश दिया था कि तुम्मिडीहट्टी से येल्लमपल्ली तक पानी पहुंचाने के लिए संभावित मार्गों और भूमि अधिग्रहण की तैयारियों पर भी काम किया जाए। हालांकि, इन योजनाओं को अंतिम रूप बैराज की ऊंचाई पर सहमति बनने के बाद ही दिया जा सकेगाइस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू प्रभावित किसानों के हितों की सुरक्षा भी है। तेलंगाना सरकार ने संकेत दिया है कि महाराष्ट्र में यदि कृषि भूमि परियोजना के कारण प्रभावित होती है, तो संबंधित नियमों के अनुसार मुआवजे की व्यवस्था पर विचार किया जाएगा।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि दोनों राज्यों के बीच बातचीत सकारात्मक माहौल में होनी चाहिए। उन्होंने परियोजना को केवल एक राज्य की आवश्यकता के रूप में देखने के बजाय आपसी सहयोग और क्षेत्रीय विकास के अवसर के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
तुम्मिडीहट्टी परियोजना पर केंद्रीय जल आयोग की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आयोग पूर्व में दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच बातचीत में सहयोग कर चुका है। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए जल उपलब्धता, पर्यावरणीय प्रभाव और तकनीकी मंजूरी जैसे पहलुओं का समाधान आवश्यक होगा।फिलहाल तुम्मिडीहट्टी बैराज के निर्माण को लेकर अंतिम सहमति नहीं बनी है। ऐसे में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के ताजा निर्देशों को परियोजना की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।अब दोनों राज्यों की संयुक्त समिति की रिपोर्ट और आगामी बैठकों के परिणाम पर नजर रहेगी। यदि बैराज की ऊंचाई, जलमग्न क्षेत्र और मुआवजे जैसे मुद्दों पर सहमति बनती है, तो वर्षों से लंबित इस परियोजना को नई गति मिल सकती है। इससे तेलंगाना के उत्तरी क्षेत्रों में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की पानी संबंधी समस्याओं को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होने की उम्मीद है।
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