तेलंगाना

मतदाता सूची पर मचा सियासी बवाल, BJP अध्यक्ष ने कांग्रेस को दी खुली चुनौती

Ratna Netam
3 Nov 2026 7:55 PM IST
मतदाता सूची पर मचा सियासी बवाल, BJP अध्यक्ष ने कांग्रेस को दी खुली चुनौती
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हैदराबाद। देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच तेलंगाना भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में केवल वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम ही शामिल होने चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर SIR को लेकर गलत नैरेटिव फैलाने और लोगों के बीच भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया। रामचंदर राव ने कहा कि मतदाता सूची को सही और पारदर्शी बनाए रखना लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से मतदाता सूची से किसी वास्तविक मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाए जाने के आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत पेश करने की मांग भी की।तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची में मौजूद गलत, दोहराई गई और अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस और उसके सहयोगी दल राजनीतिक लाभ के लिए भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। भाजपा नेता के मुताबिक, चुनाव आयोग द्वारा संचालित इस प्रक्रिया को किसी राजनीतिक दल के अभियान के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
रामचंदर राव ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उन्हें लगता है कि SIR के माध्यम से वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, तो वे ऐसे मामलों के प्रमाण सार्वजनिक करें। उन्होंने कहा कि बिना प्रमाण के चुनाव आयोग पर आरोप लगाने से संवैधानिक संस्थाओं के प्रति लोगों का विश्वास प्रभावित हो सकता है।प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए मतदाता सूची का सटीक होना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, यदि किसी मतदाता का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज है अथवा मतदाता की मृत्यु हो चुकी है, तो नियमानुसार ऐसी प्रविष्टियों की जांच और आवश्यक सुधार होना चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि किसी पात्र नागरिक का मतदान अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए। भाजपा का दावा है कि SIR की प्रक्रिया इसी उद्देश्य से संचालित की जा रही है। हालांकि, इन दावों और प्रक्रिया के वास्तविक प्रभाव को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दल अलग राय रखते हैं।तेलंगाना में SIR को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव पहले से जारी है। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की आड़ में कुछ समुदायों और विपक्ष समर्थक मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी भी इस मुद्दे पर भाजपा को निशाने पर ले चुके हैं।
कांग्रेस ने आशंका जताई है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव से कमजोर वर्गों, अल्पसंख्यकों और दूसरे स्थानों पर रोजगार के लिए जाने वाले मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। कांग्रेस की मांग है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो और किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटाया जाए।दूसरी ओर भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बता रही है। रामचंदर राव का कहना है कि कांग्रेस मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया का विरोध करके जनता में अनावश्यक आशंका पैदा कर रही है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से भी अपील की है कि वे मतदाताओं को SIR के उद्देश्य और प्रक्रिया के बारे में सही जानकारी दें।तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में किसी का नाम हटाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है। उन्होंने फॉर्म-7 को लेकर चल रहे विवाद पर भी प्रतिक्रिया दी। उनके अनुसार, किसी मतदाता के नाम पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए फॉर्म-7 जमा करने मात्र से उसका नाम स्वतः मतदाता सूची से नहीं हट जाता। इसके लिए चुनाव अधिकारियों द्वारा जांच और आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाती है।हालांकि, तेलंगाना में फॉर्म-7 के इस्तेमाल को लेकर भी विवाद सामने आया है। हैदराबाद में कुछ मतदाताओं के नाम हटाने संबंधी आवेदन जमा किए जाने का मामला चर्चा में रहा। कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटवाने का प्रयास किया जा रहा है। एक बूथ लेवल अधिकारी द्वारा पहले से भरे हुए आवेदनों को स्वीकार करने से इनकार करने की घटना भी सामने आई थी।
इस मामले ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया और चुनाव अधिकारियों की भूमिका पर नई बहस छेड़ दी। विपक्ष का कहना है कि ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जबकि भाजपा का दावा है कि सभी आवेदन चुनाव आयोग के नियमों के अनुरूप ही दिए जाने चाहिए।SIR का पूरा नाम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन है। यह मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है, जिसके माध्यम से चुनाव आयोग मतदाताओं की पात्रता और सूची में दर्ज जानकारी की जांच करता है। इसका घोषित उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन रखना, गलत या दोहराई गई प्रविष्टियों की पहचान करना और पात्र नागरिकों का पंजीकरण सुनिश्चित करना है।इस प्रक्रिया में मतदाताओं से आवश्यक विवरण और दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। मतदाता सूची में नाम शामिल कराने, सुधार कराने अथवा किसी प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए निर्धारित आवेदन प्रक्रिया उपलब्ध होती है। चुनाव आयोग ने 3 नवंबर को यह भी स्पष्ट किया कि जिन पहले से पंजीकृत मतदाताओं के नाम SIR की मसौदा सूची में नहीं हैं, वे अंतिम सूची में नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 जमा कर सकते हैं।
SIR को लेकर विवाद केवल तेलंगाना तक सीमित नहीं है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल देश के विभिन्न हिस्सों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर सवाल उठा रहे हैं। एक नवंबर को दिल्ली में हुए विपक्षी प्रदर्शन में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया से वास्तविक मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, जबकि भाजपा ऐसे आरोपों को निराधार बताती रही है।राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, मतदाता सूची में सुधार और नागरिकों के मतदान अधिकार की सुरक्षा, दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। एक ओर अपात्र और दोहराई गई प्रविष्टियों की पहचान आवश्यक है, वहीं दूसरी ओर यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से नहीं हटे।फिलहाल तेलंगाना में SIR को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। रामचंदर राव के ताजा रुख के बाद यह मुद्दा फिर राजनीतिक चर्चा में है। अब निगाहें चुनाव आयोग की प्रक्रिया, आपत्तियों के निपटारे और अंतिम मतदाता सूची पर टिकी हैं।
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