
हैदराबाद: एक ऑटोनॉमस मोबाइल रोबोट ने फैक्ट्री फ्लोर पर, पारंपरिक LiDAR मैप्स (जो आमतौर पर रोबोटिक नेविगेशन में इस्तेमाल होते हैं) का सहारा लिए बिना, कैमरा इमेज और AI-आधारित 3D रिकंस्ट्रक्शन की मदद से अपने लक्ष्य तक नेविगेट किया। यह प्रदर्शन, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी हैदराबाद (IIIT-H) के रोबोटिक्स रिसर्च सेंटर द्वारा 'अति रोबोटिक्स' (Ati Robotics) के साथ मिलकर किए गए शोध का एक व्यावहारिक परीक्षण था।
2023 में शुरू हुई इस साझेदारी में, शोधकर्ताओं ने यह पता लगाया कि क्या रोबोट विज़ुअल संकेतों (visual cues) और स्थानिक संबंधों (spatial relationships) का उपयोग करके नेविगेट कर सकते हैं—ठीक वैसे ही जैसे इंसान किसी जगह का रास्ता खोजने के लिए जानी-पहचानी जगहों या लैंडमार्क को पहचानते हैं।
रोबोटिक्स रिसर्च सेंटर के प्रो. माधव कृष्ण ने बताया, "LiDAR सिस्टम आसपास के वातावरण का मैप बनाते हैं और 'साइमल्टेनियस लोकलाइजेशन एंड मैपिंग' (SLAM) के जरिए रोबोट को अपनी स्थिति का पता लगाने में मदद करते हैं। इसके विपरीत, IIIT-H की टीम ने यह जांचा कि क्या रोबोट विस्तृत और जटिल मैप बनाए बिना, केवल इमेज, पहचाने जा सकने वाले लैंडमार्क और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके अपनी स्थिति जान सकते हैं और रास्ते की योजना बना सकते हैं।"
उन्होंने समझाया कि इस तरीके में वातावरण को कुछ चुनिंदा लैंडमार्क के जरिए समझा जाता है। उदाहरण के लिए, किसी वेयरहाउस में, इसमें पूरी जगह का सटीक माप वाला मैप होने के बजाय, दरवाजे के पास या लिफ्ट के सामने जैसी कुछ खास जगहें शामिल हो सकती हैं।
शोधकर्ताओं ने इमेज-आधारित नेविगेशन का भी परीक्षण किया, जिसमें एक ऑपरेटर सटीक कोऑर्डिनेट (coordinates) डालने के बजाय, इमेज में किसी पिक्सेल को चुनकर गंतव्य (destination) तय करता है। यह सिस्टम इमेज की तुलना करके वास्तविक दुनिया में उनसे जुड़े बिंदुओं की पहचान करता है, उनके बीच के स्थानिक संबंधों का अनुमान लगाता है और संभावित रास्तों का आकलन करता है।
सेंटर के प्रो. सौरव गर्ग ने बताया कि इस शोध के आधार पर कई रिसर्च पेपर तैयार किए गए, जिन्हें IEEE इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन रोबोटिक्स एंड ऑटोमेशन, NeurIPS और कॉन्फ्रेंस ऑन रोबोट लर्निंग जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुत किया गया।
IIIT-H ने वेयरहाउस रोबोट में परीक्षण और इस्तेमाल के लिए अपना कोड 'अति रोबोटिक्स' को सौंप दिया है। कंपनी ने इस शोध के कुछ हिस्सों को 'ऑक्यूपेंसी-रिएक्ट' (OccupancyReact) में शामिल किया है, जो एक LiDAR-आधारित सिस्टम है और उनके मौजूदा सिस्टम से काफी मिलता-जुलता है।
'अति रोबोटिक्स' का कहना है कि उनका अभी मुख्य फोकस रोबोट की गतिविधियों के अंतिम चरणों को बेहतर बनाने पर है—जैसे कि डॉकिंग (docking), पैलेट के पास पहुंचना और तंग जगहों से गुजरना। इन कामों में अगर थोड़ा भी समय बचाया जा सके, तो पूरी वर्किंग शिफ्ट के दौरान काफी समय की बचत हो सकती है।





