तेलंगाना
42 साल बाद उसी विमान में वायुसेना प्रमुख एपी सिंह की आखिरी उड़ान
Ratna Netam
20 Oct 2026 4:02 PM IST

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हैदराबाद। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को अपने उड़ान करियर का एक यादगार अध्याय पूरा किया। उन्होंने हैदराबाद के पास डुंडीगल स्थित वायुसेना अकादमी में HJT-16 किरण Mk-1 ट्रेनर विमान से अपनी आखिरी उड़ान भरी। खास बात यह रही कि इस ऐतिहासिक उड़ान में उनके साथ वही प्रशिक्षक मौजूद थे, जिन्होंने करीब 42 साल पहले उन्हें पहली बार विमान उड़ाना सिखाया था। इस अवसर ने वायुसेना प्रमुख को भावुक कर दिया और उन्होंने इसे अपने जीवन का सपना सच होने जैसा बताया।
55 मिनट की उड़ान बनी यादगार
वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने अपने पहले उड़ान प्रशिक्षक विंग कमांडर वीएस कोचर (सेवानिवृत्त) के साथ 55 मिनट की उड़ान पूरी की। उन्होंने जिस विमान से उड़ान भरी, उसका टेल नंबर U-707 था।यह उड़ान केवल उनके करियर की अंतिम सॉर्टी नहीं थी, बल्कि उनके शुरुआती प्रशिक्षण के दिनों की यादों को ताजा करने वाला विशेष अवसर भी था।वायुसेना अकादमी में प्रशिक्षक और शिष्य का यह पुनर्मिलन बेहद भावुक रहा। चार दशक से अधिक समय बाद दोनों ने एक बार फिर उसी प्रकार के विमान में साथ उड़ान भरी, जिससे एपी सिंह ने अपने सैन्य उड़ान करियर की शुरुआत की थी।
1984 में शुरू हुआ था उड़ान का सफर
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बताया कि उन्होंने 28 जनवरी 1984 को इसी स्थान पर अपने प्रशिक्षक वीएस कोचर के मार्गदर्शन में किरण विमान से पहली उड़ान भरी थी।उन्होंने कहा कि उस समय विमान उड़ाने का प्रशिक्षण लेने वाले एक युवा कैडेट के रूप में उनका सपना भारतीय वायुसेना में एक सफल पायलट बनना था।करीब 42 वर्षों के लंबे सफर के बाद जब उन्हें उसी विमान में अपने पहले प्रशिक्षक के साथ उड़ान भरने का अवसर मिला, तो यह उनके लिए बेहद भावुक क्षण बन गया।उन्होंने अपने प्रशिक्षक के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उड़ान के शुरुआती दिनों में मिले मार्गदर्शन ने उनके पूरे करियर को नई दिशा दी।
एपी सिंह बोले- मेरा सपना सच हो गया
अंतिम उड़ान पूरी करने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि यह उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है।उन्होंने कहा, "यह सच में एक सपना सच होने जैसा है। मैंने अपना सफर इसी विमान से शुरू किया था। मुझे लगता है कि मैं शायद इकलौता ऐसा वायुसेना प्रमुख हूं, जो उस समय सेवानिवृत्त हो रहा है, जब वह बुनियादी विमान, जिसे उसने कभी उड़ाया था, आज भी सेवा में है।"उन्होंने कहा कि अपने पहले प्रशिक्षक के साथ दोबारा उड़ान भरना उनके लिए विशेष अनुभव रहा।एपी सिंह ने बताया कि वह अपने उड़ान करियर का पूरा चक्र देखना चाहते थे। जिस विमान और प्रशिक्षक के साथ उनकी यात्रा शुरू हुई थी, उसी के साथ अंतिम उड़ान भरना उनके लिए गर्व और संतोष की बात है।
आखिरी उड़ान के बाद मिला वाटर कैनन सैल्यूट
उड़ान पूरी करने के बाद जब एपी सिंह का विमान वायुसेना अकादमी में उतरा, तो उन्हें वाटर कैनन सैल्यूट देकर सम्मानित किया गया।यह सम्मान उनकी लंबी सैन्य सेवा और उड़ान करियर की उपलब्धियों को समर्पित था।एपी सिंह वर्ष 1984 में वायुसेना अकादमी से पास आउट हुए थे और उन्हें स्वॉर्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया था।इससे पहले 12 अक्टूबर 2026 को उन्होंने जोधपुर वायुसेना स्टेशन पर अभ्यास तरंग शक्ति के दौरान स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान में अपनी अंतिम फाइटर सॉर्टी पूरी की थी।
वायुसेना के प्रशिक्षकों के योगदान को मिला सम्मान
भारतीय वायुसेना में किरण विमान का विशेष महत्व है। इस विमान ने कई पीढ़ियों के सैन्य पायलटों को उड़ान प्रशिक्षण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।वायुसेना के अनुसार, यह अवसर उड़ान प्रशिक्षकों की उस परंपरा का भी सम्मान है, जिसके तहत प्रशिक्षक अपने विद्यार्थियों को केवल विमान उड़ाना ही नहीं सिखाते, बल्कि उनके पूरे सैन्य करियर में मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं।एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की यह उड़ान प्रशिक्षक और शिष्य के मजबूत संबंधों का उदाहरण बनी।अक्टूबर 2026 के अंत में सेवानिवृत्त होने जा रहे एपी सिंह के लिए यह उड़ान व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन की अविस्मरणीय उपलब्धि बन गई। जिस आसमान में उन्होंने एक युवा प्रशिक्षु के रूप में अपने सपनों को उड़ान दी थी, उसी आसमान में चार दशक बाद वायुसेना प्रमुख के रूप में अपनी अंतिम सॉर्टी पूरी की।
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